ABP News Exclusive ऑपरेशन ब्लैकमनी: कैसे हुआ 6 हजार करोड़ का घोटाला?

By: | Last Updated: Thursday, 8 October 2015 3:43 PM
opration black money

नई दिल्ली: सरकार की नाक के नीचे 6 हजार करोड़ का घोटाला हुआ है. 59 कंपनियों ने मिलकर काला कारोबार किया है. काला धन देश से बाहर भेजने के लिए राजधानी दिल्ली के एक सरकारी बैंक का इस्तेमाल हुआ है. ABP News Exclusive: सरकार की नाक के नीचे हुआ 6 हजार करोड़ का घोटाला!

 

काजू और चावल मंगाने के नाम पर एक साल के भीतर 6 हजार करोड़ देश की सीमा से पार. सारे नियम कानून की उड़ाई गई धज्जियां. एबीपी न्यूज के पास मौजूद है घोटाले से जुड़े तमाम दस्तावेज.

 

कैसे हुआ घोटाला?

ये सुनकर आप जरूर हैरान हुए होंगे लेकिन घोटाला कैसे हुआ ये जानकर आप और भी ज्यादा हैरान हो जाएंगे? क्योंकि काजू, दाल और चावल मंगाने के नाम पर 6 हजार करोड़ देश के बाहर भेज दिए गए लेकिन कभी एक रुपए का भी सामान देश में नहीं आया.

 

हांगकांग शहर जो अपनी गगनचुंबी इमारतों और दुनिया के बड़े औद्योगिक और वित्तीय केंद्र के तौर पर जाना जाता है. इसी शहर में भारत से 6 हजार करोड़ का काला धन जमा किया गया वो भी दाल चावल खरीदने के नाम पर. हांगकांग तो खुद अपनी खाने-पीने की जरूरतें चीन से पूरी करता है जहां कोई पैदावार नहीं होती वहां से दिल्ली का बैंक ऑफ बड़ौदा कभी मसाले, कभी चावल, कभी ड्राय फ्रूट्स और कभी जनरल कॉस्मैटिक खऱीदने के नाम पर एक साल के भीतर हजारों करोड़ भेजता रहा.

 

ये होता कैसे था उसे समझिए?

बैंक ऑफ बड़ौदा में 59 कंपनियों के जो 59 खाते थे उसमें नकद रकम जमा कराई जाती थी और फिर उस रकम को विदेशों से सामान मंगाने के लिए एडवांस के तौर पर भेजने को कहा जाता था. जबकि बैकं के पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि जिस सामान के लिए पैसा भेजा गया वो सामान आया भी या नहीं. हैरान करने वाली बात ये है कि 59 खातों से डॉलर के जरिए भेजी जा रही ये रकम हांगकांग की कुछ गिनी-चुनी कंपनियों के पास ही जा रही थी.

 

सरकारी नियमों के मुताबिक यदि बैंक डालर की बडी रकम के तौर पर विदेशो में पेमेन्ट कर रहा होता है तो वो पैसा भेजने वाली पार्टी से कहता है कि वो जिस कंपनी को पैसा भेजा जाना है उसके बारे में पूरी जानकारी बैंक को मुहैया कराए और बड़ी रकम होने की स्थिति में वह पैसा लेने वाली पार्टी से एलसी यानि लैटर आफ क्रेडिट की भी मांग करता है जिसके तहत पैसा लेने वाली पार्टी अपने यहां के बैक की गांरटी भी मुहैया कराए लेकिन इसमें ऐसा कुछ नहीं किया गया.

 

बैक की आतंरिक रिपोर्ट बताती है कि बैंक अधिकारियो ने इन कंपनियों के साथ मिलकर ना तो प्रोफार्मा इनवाइस लिया और ना ही एग्रीमेंट आफ सेल परचेज वाले कागज लिए. यहां तक कि एक रकम भेजने के बाद दूसरी बार रकम भेजने के पहले मगांए गए सामान के भारत आने के बारे में भी बैक ने कोई दस्तावेज नहीं लिया. यानि जो नियम कानून थे वो सब ताक पर रख दिए गए औऱ कंपनियों के कहने पर पैसा सीधे हांगकांग भेजा जाने लगा. दस्तावेज बताते है कि ये पैसा इन कंपनियों से हांगकाग की.

 

victoroxx international ltd

great Asian exports

king winner international ltd

star exim ltd

I touch infocom ltd

fortune trading pvt ltd.

jasco ltd को भेजा गया.

 

बैंक ने ये जानते बूझते हुए भी कि ज्यादातर कंपनियां एक ही कंपनी को बड़ी तादाद में रकम भेज रही है पर कोई ध्यान नहीं दिया और धीरे धीरे छह हजार करोड रुपये की बड़ी धनऱाशि देश के बाहर हांगकांग भेज दी गई और किसी को इसके बारे में भनक तक नहीं लगी.

 

नियम के मुताबिक अगर एक लाख डालर से ज्यादा रकम एक साथ भेजी जाती तो इसका पता चल जाता. लेकिन एक ही दिन में रकम तोड़कर कई बार में भेजी जाती थी ताकि किसी को शक ना हो.

 

इतना ही नहीं काला धन देश से बाहर भेजने के लिए बैंक ने हर तरह की मदद की जब इन कंपनियों के खातों मे पैसा नहीं था तब बैंक ऑफ बड़ौदा अपने आंतरिक खाते पैसे लेकर इन कंपनियों की मदद कर रहा था.

 

बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपना पक्ष पेश करते हुए कहा कि मामले की जांच चल रही है. बैंक को इस मामले में कोई घाटा नहीं हुआ. हालांकि प्रकिया पूरी करने में कुछ कमी रही.

 

अब खुफिया एजेंसियों को ये आशंका है कि ये पूरा का पूरा धन काले पैसे की कमाई हो सकता है और जिस तरह से इस पूरे आपरेशन को अंजाम दिया गया उसमें कई बड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं.

 

जिन कंपनियों के खातों के जरिए 6 हजार करोड़ का काला धन देश से बाहर भेजा गया एबीपी न्यूज उन कंपनियों के पते पर पहुंचा. एबीपी न्यूज ने 59 में से तीन बड़ी कंपनियों की पड़ताल की. पड़ताल में सामने आया कि कंपनियों ने बैंक में जो पता ठिकाना दिया था वो फर्जी निकला.

 

एबीपी न्यूज अपनी पड़ताल के लिए रोहिणी के सेक्टर -11 पहुंचा. दरअसल बैंक ऑफ बड़ौदा की अशोक विहार ब्रांच में मैसर्स वंदना इंपैक्स ने अपना यही पता दिया था. पते की पुष्टि के लिए शिवनंदन ने अपना लाइसेंस भी मुहैया करवाया था. ये पता था.

 

सी 5 /41, सेक्टर 11, रोहिणी

 

एबीपी न्यूज जब इस पते पर पहुंचा तो पता चला कि यहां तो शिवनंदन नाम का कोई आदमी नही रहता औऱ ये मकान राजेंद्र गर्ग साहब का है और वंदना इम्पैक्स नाम की कोई कंपनी यहां कभी थी ही नहीं.

 

एबीपी न्यूज ने जब वंदना इंपैक्स के दूसरे दस्तावेजों की पडताल की तो सामने आया मार्च 2014 में वंदना इंपैक्स ने अपनी कंपनी एक्सपोर्ट इंपोर्ट के लिए रजिस्टर करवाते वक्त ये साफ कहा था कि कंपनी की कोई और शाखा नही है.

 

यहां से शुरू होती है दूसरी कहानी. कंपनी ने रजिस्टर करवाते समय पता जयपुर का दिया था जबकि बैंक में खाता खुलवाते समय रोहिणा का पता दिया था.

 

जबकि अमूनन जहां कंपनी का मुख्यालय होता है वही करंट एकाउंट भी होता है और जब खुद कंपनी उद्योग मंत्रालय के यहां यह कह चुकी है कि उसकी कोई और शाखा नहीं है तो फिर करंट एकाउंट दिल्ली में खोलने का मकसद क्या था?

 

अब बात दूसरी कंपनी- मयूर इंटरनेशनल

 

मयूर इंटरनेशनल ने अपने पते के तौर पर कंपनी की प्रोपराइटर मुस्कान शर्मा का दिल्ली चुनाव आयोग की तरफ से जारी वोटर आई कार्ड लगाया.

 

पता दिया है- 202 पाकेट तीन सेक्टर 24 रोहिणी

एबीपी न्यूज रोहिणी के इस सेक्टर में पहुंचा तो उसे 200 नंबर के आगे के मकान ही नहीं मिल रहे थे ऐसे में उस इलाके में रहने वाले सुरजीत सिंह से जब एबीपी न्यूज ने बात की तो पता चला है 202 कभी था ही नहीं.

 

कंपनी का बैंक को दिया पता तो फर्जी निकला लेकिन सवाल ये है कि इस पते पर चुनाव आय़ोग का वोटर आईकार्ड कैसे बना?

 

कंपनी नंबर तीन- ए के इंटरप्राइजेज की

 

ए. के इंटरप्राइजेज 59 कंपनियों में से एक कंपनी है जिसने बड़े पैमाने पर करोड़ों रूपया हांगकांग भेजा इस कंपनी के निदेशक अनिल भाटिया ने अपने पते के तौर पर एक पासपोर्ट जमा कराया है बैंक में कंपनी और घर का पता बताया है.

 

के-1/14- माडल टाउन दिल्ली

 

एबीपी न्यूज जब इस पते पर पहुंचा तो इस पते पर एक तीन मंजिला मकान था. हर मंजिल पर अलग अलग परिवार रहता है. इस घर के मौजूद लोग कैमरे पर तो नहीं आए लेकिन ये जरूर बताया कि अब इस घर में अनिल भाटिया नहीं रहते. बैंक आफ बडौदा ने आरंभिक जांच के बाद अपने दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है.

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