ABP News Exclusive: सरकार की नाक के नीचे हुआ 6 हजार करोड़ का घोटाला!

By: | Last Updated: Friday, 9 October 2015 1:10 AM

नई दिल्ली: सरकार की नाक के नीचे 6 हजार करोड़ का घोटाला हुआ है. 59 कंपनियों ने मिलकर काला कारोबार किया है. काला धन देश से बाहर भेजने के लिए राजधानी दिल्ली के एक सरकारी बैंक का इस्तेमाल हुआ है.

ABP News Exclusive ऑपरेशन ब्लैकमनी: कैसे हुआ 6 हजार करोड़ का घोटाला? 

काजू और चावल मंगाने के नाम पर एक साल के भीतर 6 हजार करोड़ देश की सीमा से पार. सारे नियम कानून की उड़ाई गई धज्जियां. एबीपी न्यूज के पास मौजूद है घोटाले से जुड़े तमाम दस्तावेज.

 

आखिर कैसे एक सरकारी बैंक के जरिए हुआ 6 हजार करोड़ का गड़बड़झाला?

EXCLUSIVE: सरकार की नाक के नीचे हुआ 6 हजार करोड़ का घोटाला!  

काले धन से जुड़े सबसे बड़े घोटाले का खुलासा. मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद देश में ये चर्चा बड़े जोरों पर थी काला धन वापस आएगा. मोदी सरकार की तमाम कोशिशों के बाद विदेशों से कुल 4100 करोड़ का काला धन देश में वापस आया. लेकिन खबर ये है कि आया तो 4100 करोड़ जबकि पिछले एक साल के भीतर उससे कहीं ज्यादा 6 हजार करोड़ का काला धन देश से बाहर चला गया. यानि देश के अंदर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं देने वाला बैंक.

 

देश में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बाद दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक है बैंक ऑफ बड़ौदा. लेकिन इसी बैंक का इस्तेमाल करके 6 हजार करोड़ का काला धन दिल्ली से करीब 3 हजार 800 किमी दूर हांगकांग भेज दिया गया और किसी को भनक तक नहीं लगी. जबकि देश के तमाम खुफिया जानकारी देने वाले करीब सारे विभाग यहीं मौजूद हैं.

 

बैंक आफ बडौदा की अशोक विहार की वो शाखा है जहां 59 बैंक खाते आनन फानन में खोले गए औऱ यही से घोटाले की शुरूआत हुई.

 

घोटाले की शुरुआत जुलाई 2014 से हुई थी. बैंक ऑफ बडौदा की इस ब्रांच से विदेश में भी पैसे भेजने का काम किया जाता है और दुनिया के 25 देशों में इसकी शाखाएं. इसीलिए 59 कंपनियों ने एक-एक करके अशोक विहार के बैंक ऑफ बड़ौदा में 59 करंट अकाउंट यानि चालू खाते खुलवाए थे. बैंक के दस्तावेजों के मुताबिक बैंक में खाते खुलने के फौरन बाद ही यानि पहले ही दिन से इन खातों में करोडों की नगदी जमा कराई जाने लगी.

 

जबकि बैंक नियमों के मुताबिक एक निश्चित धनराशि जमा होने के बाद बैंक को अपने मुख्यालय औऱ अन्य सरकारी विभागों में लिखित में जानकारी देनी होती है कि कौन सी कंपनी या फिर कौन वो शख्स है जो एक निश्चित सीमा के बाहर बैंक में नकद पैसे जमा करा रहा है.

 

रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से बैंक के जरिए छह हजार करोड रूपये अवैध तरीके से देश के बाहर भेज दिए गए.

 

ABP News Exclusive ऑपरेशन ब्लैकमनी: कैसे हुआ 6 हजार करोड़ का घोटाला? 

दस्तावेजों के मुताबिक एक बैंक खाते में खाता खुलने के दो महीने से भी कम समय में लगभग सात करोड़ रूपये नगद जमा कराए गए. 59 खातों में से एक खाते में खाता खुलने के 23 दिनों के भीतर साढे तीन करोड़ रुपये नगद जमा कराए गए.

 

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतनी बड़ी नगदी कहां से आ रही है इस पर बैंक ने कभी सवाल क्यों नहीं उठाए?

 

दिल्ली से हांगकांग भेजे जा रहे हजारों करोड़ का ये गोरखधंधा पिछले एक साल से चल रहा था लेकिन इस घोटाले की पोल इस साल अगस्त महीने में खुली जब बैंक के जोनल इंटरनल आडिट डिवीजन ने इस बैंक के पिछले एक साल के कामकाज की जांच शुरू की. बैंक अधिकारी जैसे जैसे अपनी जांच आगे बढ़ाते गए वैसे ही वैसे आडिट टीम के साथ ही बैंक मुख्यालय के अंदर हडकंप मच गया.

 

हैरान करने वाली बात ये है कि ना तो बैंक के अंदर अलर्ट करने वाले सिस्टम ने कोई अलर्ट जारी किया औऱ ना ही बैंक के खंचाजी या मैनेजर ने इस बारे में अपने अधिकारियों को कोई सूचना दी. बात केवल नगदी जमा कराने तक ही होती तो शायद कुछ नहीं होता लेकिन साजिश रचने वालों ने पहले से ही शायद ये सोचा हुआ था कि इस नगदी का इस्तेमाल कैसे करना है और उसे कैसे ठिकाने लगाना है?

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Web Title: opration black money: black money scam
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