संसद की कैंटीन में सब्सिडी पर सवाल क्यों?

By: | Last Updated: Tuesday, 11 August 2015 11:42 AM
Parliament canteen

नई दिल्ली: संसद में कामकाज नहीं हो पा रहा है. सवाल ये है कि इससे जो नुकसान हो रहा है उसकी भरपाई कौन करेगा? वैसे एक सवाल संसद की कैंटीन को मिलने वाली सब्सिडी को लेकर भी उठी थी लेकिन कमेटी ने फैसला किया है कि संसद की कैंटीन में सब्सिडी वाला सस्ता खाना बंद नहीं होगा. एबीपी न्यूज ने पड़ताल की है जिसमें पता चला है कि संसद की कैंटीन में ज्यादातर सांसद खाना खाते ही नहीं.

 

चिकन बिरयानी 50 रूपये, वेज बिरयानी 20रूपये, वेज थाली 18 रूपये, मटन बिरयानी 50 रूपये, चिकन मसाला 37 रूपये, चिकन फ्राई 31 रूपये, मटन करी 20 रूपये, कीमा करी 20 रूपये, पोंगल 10रूपये, दही भात 10 रूपये.

 

अब आप कहेंगे खाने का ये रामराज्य कहां आ गया. ये सस्ता खाना अपने ही देश की संसद की कैंटीन में मिलता है. संसद की कैंटीन के खाने पर दी जाने वाली सब्सिडी पर पिछले दिनों खूब हंगामा मचा था. सवाल उठा था कि आखिर लाख रुपये से ज्यादा सैलरी पाने वाले सांसदों को खाने में सब्सिडी में क्यों दी जाए? मामले को सांसदों की फूड सब्सिडी समिति के पास भेजा गया. अब समिति ने फैसला लिया है कि संसद की कैंटीन में मिलने वाली सब्सिडी बदस्तूर जारी रहेगी.

 

हाल ही में आरटीआई से मिली सूचना से पता चला कि संसद की कैंटीन को पिछले पांच सालों में जमकर सब्सिडी दी गई. साल 2013-14 में संसद की कैंटीन को जहां 14 करोड़ की सब्सिडी दी गई है वहीं साल 2012-13 में 12.5 करोड़ की. इस तरह पांच साल में संसद की कैंटीन को 60 करोड़ 70 लाख की सब्सिडी दी जा चुकी है.

 

इस खुलासे के बाद सब्सिडी को हटाए जाने की मांग तेज हो गई. सिविल सोसायटी और राजनेताओं का एक वर्ग इसे जल्द से जल्द हटाए जाने की मांग करने लगा. ये मांग तब और तेज हो गई जब पीएम मोदी ने सक्षम लोगों से गैस सब्सिडी छोड़ने की अपील की.

 

बीजू जनता दल सांसद जय पांडा ने लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को एक पत्र लिखकर कहा कि जनता का सांसदों के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए ज़रुरी है कि इस सब्सिडी को हटा लिया जाए. लोकसभा के स्पीकर को लिखी चिट्टी में जय पांडा ने लिखा कि जिस तरह से रसोई गैस की सब्सिडी छोड़ना एक सराहनीय कदम है उसी तरह से सांसदों को पार्लियामेंट की कैंटीन में जो खाने पर सब्सिडी मिलती है उसे छोड़ देना चाहिए.

 

लोकसभा स्पीकर ने ये चिट्टी खाने सबंधी सभी शिकायतों और सुझावों के लिए बनी सांसदों की फूड सब्सिडी समिति को बढ़ा दी. संसद की फ़ूड समिति ने एक सर्वे कराया जिसमें पाया गया कि संसद की कैंटीन में सिर्फ 9 फीसदी सांसद सब्सिडी वाला खाना खाते हैं. सर्वे के मुताबिक सब्सिडी वाली कैंटीन का खाना 9 फ़ीसदी पत्रकार भी खाते हैं. जो सत्र न चलने पर 2 फ़ीसदी होता है. कैंटीन का 48 फ़ीसदी खाना आधिकारिक बैठकों यानी सेलेक्ट कमिटी और स्थाई समिति वगैरह के लिए जाता है जबकि 34 फ़ीसदी खाना यहां काम करने वाले कर्मचारी भी खाते हैं.

 

संसद परिसर में 4 कैंटीन है. इसमें से एक कैंटीन रिसेप्शन पर है जो स्टाफ और बाहर से आने वाले मेहमानों के लिए है. दूसरा संसद भवन में है जिसमें मीडिया और सांसदों के बैठने के लिए अलग अलग व्यवस्था है. एक कैंटीन पार्लियामेंट एनेक्सी में है जिसमें स्टाफ खाना खा सकते हैं. और चौथा पार्लियामेंट लाइब्रेरी में है जहां सांसद, उनके गेस्ट और मीडिया भी खाना खा सकते हैं.

 

जय पांडा के प्रस्ताव के विरोध में न सिर्फ फ़ूड कमेटी है बल्कि कई और संसद भी है. उनका अपना तर्क है. पहला तर्क ये कि जिस सब्सिडी की बात है वह है 2 करोड़ 40 लाख की जो की इतनी बड़ी रकम नहीं जिससे कोई लाभकारी परियोजना में रोड़े आये. दूसरा तर्क ये कि पहले प्रस्ताव रखने वाले खुद अपना सरकारी बकाया वापस करने.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Parliament canteen
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: parliament Parliament canteen
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017