संसद ठप: चेहरे बदले, पर नहीं बदला कामकाज का तरीका?

By: | Last Updated: Wednesday, 3 December 2014 3:29 PM
Parliament: same situation in new government

नई दिल्ली: देश में सरकार भले ही बदल गई है लेकिन कामकाज का तरीका नहीं बदला है, पहले जब यूपीए की सरकार थी तब विपक्ष के तौर पर जो भूमिका बीजेपी निभाती थी अब कांग्रेस भी उसी रोल में नजर आ रही है.  केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के इस्तीफे की मांग को लेकर दो दिनों से संसद ठप है, कई विधेयक अटके हुए हैं लेकिन कोई काम नहीं हो रहा है.

 

सवाल ये है कि मंत्री के लिए संसद ठप करना सही है. इन दिनों संसद के दोनों सदनों का ये हाल है कि कार्यवाही ठीक से शुरू होती भी नहीं कि स्थगित करने की नौबत आ जा रही है.

 

जब यूपीए की सरकार थी तब बीजेपी के सांसद संसद नहीं चलने देते थे अब जब एनडीए की सरकार है तो इस काम का जिम्मा कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों ने ले लिया है.

 

आज संसद नहीं चलने देने के लिए आडवाणी जी विपक्षी पार्टियों को दोषी करार दे रहे हैं, लेकिन जब उनकी पार्टी विपक्ष में थी तब उनके भी नेता वही काम करते थे जो आज कांग्रेस के नेता कर रहे हैं.

 

विवादित बयान देकर भले ही मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने माफी मांग ली हो लेकिन विपक्ष इतने भर से राजी नहीं है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता आनंद शर्मा और कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने निरंजन ज्योति पर जोरदार हमला किया. मंत्री के इस्तीफे की मांग हो रही है.

 

मंत्री की बर्खास्तगी के बहाने संसद के दोनों सदनों में काम नहीं हो पा रहा है. राज्यसभा में तो कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया था. लोकसभा में भी जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और गृह मंत्री राजनाथ सिंह सरकार के कामकाज का ब्योरा पेश कर रहे थे तब विपक्ष ने वाकआउट कर दिया. मंत्री बोलते रहे लेकिन सुनने के लिए कोई विपक्ष सदन में मौजूद नहीं था.

 

सदन में सरकार चलाने वाले भले ही बदल गए हैं लेकिन अंदर का माहौल पहले की तरह ही है. विपक्ष को तल्ख लहजे में सरकार बता रही है कि उनके पास पांच साल तक सुनने के अलावा कोई चारा नहीं है. वैंकया नायडू यही विपक्ष को समझाने की कोशिश कर रहे हैं.

 

लेकिन विपक्ष सुनने को तैयार नहीं है. असल में राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत की कमी है. इसलिए विपक्ष के शोर के आगे सरकार की आवाज यहां दब जा रही है.

 

सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा, आपको हमें भी सुनना होगा नहीं सुनेंगे तो काम नहीं चलेगा.

 

हंगामे की वजह से कई अहम विधेयकों का भविष्य अंधकार में दिख रहा है.

 

बीमा बिल इसी सत्र में पेश होने की उम्मीद की जा रही है. गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी विधेयक भी पेश होने के इंतजार में हैं.  कोयला खदान और टेक्सटाइल से जुड़े विधेयक लटके हुए हैं. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से संबंधित ग्यारह विधेयक पास करने हैं. श्रम और रोजगार से भी जुड़े कई विधेयक लंबित है. सत्र के पहले हफ्ते में लोकसभा से 5 और राज्यसभा से तीन बिल पास किए हैं.

 

23 दिसंबर तक संसद का ये सत्र चलना है लेकिन जिस तरीके से रोज किसी न किसी बहाने से हंगामा हो रहा है उससे तो यही लगता है कि चेहरे भले ही बदल गए हों कामकाज का तरीका नहीं बदला है.

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Web Title: Parliament: same situation in new government
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