संसद से नए सीबीआई चीफ की नियुक्ति का रास्ता साफ

By: | Last Updated: Friday, 28 November 2014 1:45 AM

नई दिल्ली: संसद से गुरुवार को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम में संशोधन विधेयक पारित हो गया. इस विधेयक में सीबीआई निदेशक की चयन समिति में विपक्ष के नेता की जगह लोकसभा में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के नेता को शामिल करने का प्रावधान किया गया है. इस विधेयक के पारित होने से अब नए सीबीआई निदेशक की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है.

 

मौजूदा निदेशक रंजीत सिन्हा दो दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट अमेंडमेंल बिल-2014 गुरुवार को राज्यसभा द्वारा पारित कर दिया गया. इससे पहले वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सदन को भरोसा दिलाते हुए कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक की नियुक्ति पर सरकार सभी को साथ लेकर काम करने का इरादा रखती है और व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना चाहती है.

 

लोकसभा में यह विधेयक बुधवार को पारित कर दिया गया था. इस विधेयक में सीबीआई निदेशक की चयन समिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता की जगह सबसे बड़ी पार्टी के नेता को शामिल करने का प्रावधान शामिल किया गया है.

 

यह संशोधन जरूरी था क्योंकि मौजूदा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद किसी को भी नहीं दिया गया है. सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस के पास भी इस पद के लिए जरूरी कुल लोकसभा सदस्यों का 10 फीसदी संख्या बल नहीं है.

 

विधेयक से उस प्रावधान को भी हटा दिया गया है जिसके मुताबिक सीबीआई निदेशक के चयन के समय सभी सदस्यों का मौजूद होना जरूरी था.

 

लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को चयन समिति में पद मिलने की संभावना है.

 

राज्यसभा में विधेयक रखते समय जेटली ने कहा, “जब किसी को भी नेता विपक्ष की मान्यता न दी गई हो तो चयन समिति में एक विपक्ष का प्रतिनिधि होना आवश्यक है.”

 

विधेयक पर चर्चा करते हुए कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि ऐसा प्रतीत नहीं होना चाहिए कि सरकार विपक्ष पर एहसान कर रही है.

 

उन्होंने कहा, “हम सभी को पता है कि सरकार संशोधन कर रही है, पर इस तरह का प्रभाव न छोड़ा जाए कि सरकार विपक्ष पर दया दिखा रही है.”

 

जेटली ने प्रतिउत्तर में कहा, “इस विधेयक को हम स्वेच्छा से लाए हैं इसके द्वारा हम किसी पार्टी के प्रति शिष्टाचार नहीं दिखा रहे हैं, बल्कि हम इस अधिनियम को और सुदृढ़ बना रहे हैं.”

 

उन्होंने कहा, “यह सीबीआई में सुधार लाने का हिस्सा है. सीबीआई के कामकाज में कुछ सुधार लोकपाल अधिनियम के अंतर्गत हैं. जिसे हम सर्वसम्मति से पहले ही मंजूरी दे चुके हैं. सीबीआई को निष्पक्ष होना चाहिए.”

 

दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम में सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय समिति का प्रावधान है, जिसमें प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), भारत के मुख्य न्यायाधीश या फिर उनके द्वारा नामित उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश और लोकसभा में नेता विपक्ष मिलकर केंद्र सरकार से सिफारिश कर सकते हैं.

 

संशोधन विधेयक में नेता विपक्ष के प्रावधन को बदल दिया गया है. सरकार की दलील थी, चूंकि मौजूदा समय में कोई नेता विपक्ष नहीं है, इसीलिए सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी का नेता इस समिति का हिस्सा होगा.

 

उन्होंने स्वीकारा कि कुछ कानूनों की भाषा में विसंगतियां हैं. सूचना का अधिकार अधिनियम की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें चयन प्रक्रिया में सबसे बड़ी पार्टी की जगह ‘सबसे बड़े समूह’ का प्रावधान है.

 

जेटली ने कहा कि अगर सरकार इस विधेयक में भी इसी शब्द का प्रयोग करती तो संभव था कि लोकसभा में दो पार्टियां हाथ मिला लेतीं और अपने आपको सबसे बड़ा समूह बतातीं.

 

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “मैं तृणमूल कांग्रेस को नया विचार नहीं दे रहा हूं.”जेटली ने कहा कि कुछ जगहों पर विभिन्न कानूनों में भाषा की विसंगतियां दूर करनी होंगी.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: parliament_cbi_chief_related_bill
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: ???? parliament
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017