संसद में हंगामे के आसार

By: | Last Updated: Tuesday, 25 November 2014 1:06 AM

नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र का आज दूसरा दिन है. संसद का शीतकालीन सत्र कल से शुरू हुआ है.

 

इस सत्र में विपक्ष ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर रखी है. तृणमूल और जेडीयू ने राज्यसभा में काला धन के मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए प्रश्नकाल स्थगित करने की मांग की है.

 

आज लोकसभा में दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट संशोधन ऐक्ट पेश हो सकता है. सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए बनी कमेटी में विपक्ष के नेता की जगह सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को शामिल करने का प्रावधान है.

 

राज्यसभा में श्रम सुधार क़ानून को भी सदन के सामने पेश किया जा सकता है. लोकसभा में भी काले धन के मुद्दे पर तृणमूल समेत विपक्षी दल हंगामा कर सकते हैं.

 

आखिर प्रधानमंत्री को ये अपील क्यों करनी पड़ी ?

 

इससे पहले कल संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया. पहले दिन नए सांसदों को शपथ दिलाने के अलावा कोई बड़ा काम नहीं हुआ. शपथ शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से इस सत्र को शांति से चलाने देने की अपील की.

 

 

बीमा बिल पर सरकार की मुश्किल

सबसे बड़ी परीक्षा बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ाने वाले बीमा संशोधन विधेयक बिल पर होगी. ये बिल फिलहाल राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी के पास है. जेडीयू, टीएमसी लेफ्ट पार्टियां, समाजवादी पार्टी और बीएसपी ने साफ कहा है कि वह इस बिल का विरोध करेंगे.

 

सेलेक्ट कमेटी को इसी हफ्ते के आखिर में रिपोर्ट देने का वक्त दिया गया है. हालांकि उम्मीद कम है कि सेलेक्ट कमेटी इस हफ्ते रिपोर्ट देगी. सरकार को लगता है कि अगर इस बिल पर कांग्रेस के विरोध को मान लिया जाए तो कांग्रेस विरोध नहीं करेगी. कांग्रेस चाहती है कि 49 फीसदी के भीतर ही विदेश निवेश और विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सादीर आ जाए. कांग्रेस का कहना है कि FDI 26 फीसदी हो और विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII की हिस्सेदारी 23 फीसदी हो. हालांकि सरकार ऐसा कोई बंटवारा नहीं चाहती है .

 

GST बिल पर मुश्किल

 

जीएसटी बिल सरकार की अगली चुनौती होगी. हालांकि इस बिल के सिर्फ पेश किए जाने की संभावना है. इस बिल पर सभी राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाने को विपक्ष मुद्दा बना सकता है.

 

कोयला आवंटन बिल पर मुश्किल

 

कोयला आवंटन अध्यादेश को बिल के तौर पर पेश कर पास करवाना भी मोदी सरकार की मुश्किल होगी. सूत्रों के मुताबिक कांग्िरेस को इस बात की आपत्ति है कि अध्यादेश में निजी कंपनियों को कोयले की कमर्शियल माइनिंग देने की तैयारी सरकार कर रही है. हालांकि सरकारी सूत्रों का दावा है कि इसे पास करने में दिक्कत नहीं आएगी. ये अध्यादेश इसी हफ्ते लोकसभा में आ सकता है.

 

लोकसभा में तो सरकार को कोई बिल पास कराने में दिक्कत नहीं होगी लेकिन राज्यसभा में संख्या कम होने की वजह से उसे काफी मुश्किल होगी.

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