अटल बिहारी वाजपेयी चाहते थे मैं बनूं बिहार का CM: पासवान

By: | Last Updated: Sunday, 23 August 2015 11:31 AM
paswan comes in cm race

नई दिल्ली: बिहार में एनडीए ने अभी मुख्यमंत्री पद के लिए किसी का नाम नहीं तय किया है. पासवान की पार्टी कह चुकी है कि उनकी ओर से सीएम का दावेदार कोई नहीं है. ऐसे में आज राम विलास पासवान ने जिस तरीके से साल 2000 का पन्ना पलटा है उससे एक बार फिर ये चर्चा स्वभाविक हो जाती है कि क्या पासवान दावेदारी के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं?

 

एलजेपी अध्यक्ष ने एक इंटरव्यू में कहा है कि साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि मुख्यमंत्री के लिए उनके हिसाब से पासवान सबसे योग्य होंगे. पासवान के मुताबिक वाजपेयी के घर पर हुई बैठक में आडवाणी, यशवंत सिन्हा और खुद नीतीश भी मौजूद थे. इसी बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी थी हम आपको बता दें कि साल 2000 के विधानसभा चुनाव में एनडीए में चार पार्टियां थी. बीजेपी, समता पार्टी, जेडीयू और बिहार पीपुल्स पार्टी. चुनाव बाद जो नतीजे आए उसमें किसी दल या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला था. बाद में नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुना गया और सात दिन के लिए नीतीश मुख्यमंत्री बने थे.

 

बहुमत साबित नहीं करने की सूरत में नीतीश को इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद पांच साल तक राबड़ी देवी मुख्यमंत्री रहीं. कहा जाता है कि उस वक्त जॉर्ज फर्नांडिस की जिद की वजह से नीतीश को बिहार में नेता माना गया था. 2005 के फऱवरी वाले चुनाव में 29 सीटें जीतने के बाद पासवान ने किसी की सरकार अपने जिद की वजह से नहीं बनने दी थी. तब पासवान ने खुद के मुख्यमंत्री बनने की शर्त रखने की बजाए मुस्लिम मुख्यमंत्री की शर्त रख दी. नतीजा हुआ कि बिहार में छे महीने तक राष्ट्रपति शासन लगा रहा और 2010 के नवंबर वाले चुनाव से पहले पासवान के ज्यादतर विधायक पार्टी छोड़कर भाग गए.

 

2010 के नवंबर में पासवान को 3 सीटों पर ही जीत मिली थी. अभी बिहार चुनाव में एलजेपी एनडीए में दूसरी बड़ी पार्टी है. बीजेपी ने किसी नेता का नाम आगे नहीं किया है. पासवान के बेटे चिराग पासवान ने अमित शाह से टिकट बंटवारे को लेकर हुई मुलाकात के बाद कहा था कि उनकी पार्टी से कोई सीएम का दावेदार नहीं है. अब पुराने जख्म कुरेदकर और वाजपेयी के बहाने क्या पासवान कोई नई राजनीति की ओर इशारा कर रहे हैं? 

 

एनडीए की एक और सहयोगी आरएलएसपी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावेदारी जता चुके हैं. बिहार में इन दिनों पासवान को लेकर एक चर्चा जोरों पर है कि चुनाव के बाद कहीं वो पलट तो नहीं जाएंगे? पासवान की अब तक की पॉलिटिक्स को लेकर सवाल उठते रहे हैं.

 

बिहार के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि लालू-नीतीश गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने पर पासवान की पार्टी बड़ा सियासी उलटफेर कर सकती है. आज का बयान कहीं बीजेपी पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति तो नहीं है?

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