जासूसी कांड: टूटे दरवाजे को देख हरकत में आए जांच अधिकारी

By: | Last Updated: Sunday, 22 February 2015 12:52 PM

नई दिल्ली: पेट्रोलियम मंत्रालय से गोपनीय दस्तावेज गायब होने की घटना को ‘कंपनी जासूसी’ का बड़ा मामला माना जा रहा है जिसमें बड़े औद्योगिक घराने के नाम जुड़ गए हैं. लेकिन इसमें शामिल लोगों द्वारा जिस तरीके से दस्तावेज चुराने के काम को अंजाम दिया गया वह अनाड़ियों जैसा था और इससे ही लम्बे समय से चल रहे उनके गोरखधंधे का पर्दाफाश हुआ.

 

करीब आठ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के तुरंत बाद एक दिन सुबह मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज एक फोटोकापी मशीन पर पड़ा पाया गया.

 

उसके पश्चात एक निदेशक के कमरे के दरवाजे को संदिग्ध अवस्था में देखे जाने के बाद संदेह और गहरा गया. इन घाटनाओं पर उठे संदेह के बाद गोपनीय दस्तावेज मंत्रालय के बाहर ले जाने वालों को धर दबोचने के लिये जांच शुरू की गयी. संदिग्ध कारपोरेट जासूसी के मामले में अब तक की इस सबसे बड़ी कार्रवाई में अबतक दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

 

यह राष्ट्रीय राजधानी में गोपनीय दस्तावेजों को सही तरीके से नहीं रखने का मामला है जहां अक्सर सरकारी दस्तावेज उस शास्त्री भवन के छोटे कमरों और तंग गलियारों से कारपोरेट और उनके लाबिस्ट के हाथ लग जाते हैं जहां कई प्रमुख मंत्रालय हैं.

 

जिस तरीके से दस्तावेज चुराने के काम को अंजाम दिया गया, वह अचंभित करने वाला है. इसके लिये देर रात नकली चाबी और पहचान पत्र की मदद से कमरे में लोग प्रवेश करते. मामले में एक मुख्य आरोपी शांतनू सैकिया का तो यहां तक दावा है कि यह 10,000 करोड़ रपये का घोटाला है और वह केवल इसको ‘कवर अप’ करने का काम कर रहे थे.’’

 

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा, ‘‘हमे कुछ असहज लग रहा था फिर सक्षम अधिकारियों को सूचित किया गया.’’ हालांकि उन्होंने उन विशिष्ट घटनाओं के बारे में बताने से मना कर दिया जिससे जांच शुरू की गयी. कुल सात कमरों के लिये नकली चाबियां बनायी गयी. इसमें विशेष सचिव, दो संयुक्त सचिव और कुछ निदेशक शामिल थे.

 

ये सभी उत्खनन नीति, पेट्रोलियम कीमत और गैस कीमत जैसे संवेदनशील मुद्दों को देख रहे थे. सभी कमरों के ताले बदल दिये गये हैं और मंत्रालय महत्वपूर्ण सूचना के रखरखाव के संदर्भ में मानक परिचालन प्रक्रिया :एसओपी: का पालन कर रहा है.

 

पेट्रोलियम सचिव सौरभ चंद्र ने कहा, ‘‘कोई भी गोपनीय फाइल या दस्तावेज हाथ में दिये जाएंगे या सील लिफाफे में भेजे जाएंगे.’’ इसके अलावा, अन्य मानकों का कड़ाई से पालन किये जाने का फैसला किया गया है.

 

प्रधान ने कहा, ‘‘मानक परिचालन प्रक्रिया है. उसका कड़ाई से पालन किया जा जा रहा है…’’ सूत्रों ने कहा कि पिछले साल जून की बात है जब एक संयुक्त सचिव का कमरा खोला गया तो कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज फोटोकापी मशीन में पाये गये. मामले की गंभीरता इससे और बढ़ गयी कि संबंधित संयुक्त सचिव को गैस कीमत मुद्दे से संबंधित मामले में एक बड़े औद्योगिक घराने का बड़ा आलोचक माना जाता था.

 

सूत्रों के अनुसार शुरू में मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को अपने ही कर्मचारियों को संदेह हुआ. उसके बाद सतर्कता और निगरानी बढ़ा दी गयी. अधिकारी वाशरूम जाते समय भी अपने दरवाजे बंद करके जाने लगे.लेकिन स्थिति और भी गंभीर हो गयी जब दो महीने पहले एक निदेशक के कमरे का दरवाजा संदिग्ध स्थिति में पाया गया.

 

इसके बाद मंत्रालय ने जांच के आदेश दिये और निगरानी बढ़ा दी. इसमें पूरे दफ्तर में बड़े पैमाने पर सीसीटीवी कैमरे लगाये गये. साथ ही जांच एजेंसियों ने निगरानी बढ़ायी और दिल्ली पुलिस ने जाल बिछाया. इसके कारण गुरूवार को मंत्रालय में दो कनिष्ठ कर्मचारियों समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया. उसके बाद से कई और गिरफ्तारी हुई है.

 

पेट्रोलियम मंत्रालय में एस जयपाल रेड्डी के समय मल्टी टास्किंग कर्मचारी के रूप में लाये गये 58 वर्षीय आशाराम तथा उसके सहयोगी 56 साल के इश्वर सिंह ने कथित रूप से महत्वपूर्ण अधिकारियों के कमरों की चाबी बनायी.

 

सूत्रों के अनुसार ये लोग सामान्य रूप से रात में काम करते लेकिन दो महीने पहले उन्होंने तड़के काम किया जब निदेशक के कमरे के दरवाजे साथ छेड़छाड़ की गयी. मंत्रालय अभी भी इस बात का पता लगा रहा है कि कैसे उन लोगों ने सात कमरों की चाबियां जुटायी.

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