फूलन देवी के कातिल शेर सिंह राणा की हैरतअंगेज कहानी

By: | Last Updated: Tuesday, 12 August 2014 4:11 PM
phoolan devi muder case

नई दिल्ली: चंबल के बीहड़ों को त्यागकर राजनीति में उतरीं पूर्व सांसद फूलन देवी की हत्या के मामले में यहां की एक अदालत ने शुक्रवार को मुख्य आरोपी शेर सिंह राणा को दोषी करार दिया. इस पर अदालत सजा सुनाएगी. राणा ने पर आरोप था कि उसने 25 जुलाई, 2001 को फूलन देवी की गोली मार कर हत्या कर दी थी.

 

मौत की वह कहानी. जिसने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी . जिस कातिल ने डाकू से सांसद बनी फूलन देवी को अपनी गोलियों से भून दिया था. फूलन के कत्ल के बाद उसने क्या किया. वह कहां भागा. वह किससे मिला. आत्मसमर्पण के बाद देश की सबसे सुरक्षित कहे जाने वाले जेल तिहाड की उंची -उंची दीवारों को उसने कैसे चकमा दिया. वह कैसे तिहाड से फरार होने के बाद अफगानिस्तान पुहंच गया. अफगानिस्तान में उसने क्या किया. अफगानिस्तान में वो कहां-कहां गया और फिर वो कैसे पकडा गया.

 

फूलन देवी के कातिल शेर सिंह राणा की हैरतअंगेज कहानी

 

शेर सिंह राणा ने डाकू से सांसद बनी फूलन देवी को गोली मारी थी. अब अदालत ने भी शेर सिंह राणा को फूलन का कातिल करार दिया है. लेकिन इसके बाद भी खत्म नहीं हुई है राणा के जिंदगी के रहस्यों की कहानी. तिहाड से कंधार तक फैले उसकी जिंदगी की कहानी.

 

फूलन देवी 80 के दशक में चंबल के बीहडों में राज करने वाली दस्यु सुदंरी. जिसके नाम से ही लोग कांपते थे. कहा जाता है कि फूलन ने अपने साथ हुई ज्यादतियों का बदला लेने के लिए बंदूक उठाई. उसने अपना गिरोह बनाया और फिर बीहड़ों में कूद पडी.

 

कहा तो ये भी जाता है कि अपने साथ हुए दुराचार का बदला लेने के लिए ही फूलन देवी ने बेहमई में उंची जाति के 22 लोगों को गोलियों से भून दिया था. नरसंहार की ये खबर जब दुनिया के सामने आई तो फूलन देवी की कहानी देश और विदेश दोनों जगह सुर्खियों में छा गई. दिल दहला देने वाले उस हत्याकांड के बाद फूलन ने नरसंहार की बात से इंकार किया था. लेकिन पुलिस हर जगह फूलन को ढूंढ रही थी.

 

उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश सरकार ने चंबल की बीहडों में राज करने वाली दस्यु सुंदरी फूलन देवी को पकडने की कई नाकाम कोशिश की..और आखिरकार इंदिरा गांधी की सरकार ने 1983 में फूलन से ये समझौता किया कि अगर वह आत्मसमपर्ण कर दे. तो उसे मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा और ना ही उसके परिवार के किसी सदस्य को कोई नुकसान पहुंचाया जाएगा. फूलन इस शर्त पर राजी थी और फिर अपने दस हजार समर्थकों के सामने उसने आत्मसमर्पण कर दिया.

 

बिना मुकदमा चले 11 साल तक जेल में रहने के बाद फूलन को 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने रिहा कर दिया. जेल से रिहा होने के बाद 1996 में फूलन देवी ने समाजवादी पार्टी की टिकट पर उत्तर प्रदेश के भदोही सीट से लोकसभा का चुनाव लडा और फिर जीत कर फूलन संसद पहुंच गई.

 

एक सांसद के रुप में फूलन दलितों के दिलों पर राज करती थी. लेकिन पिछली जिंदगी की कहनी सतत फूलन का पीछा करती रही. फूलन कथित दुराचार की उस कहानी को कभी नहीं भूल पाई. जिसने उसकी जिंदगी बदल थी. अपने एक इंटरव्यू में खुद फूलन ने कहा था . उन्होंने मुझे एक आदमी से दूसरे आदमी. और एक गांव से दूसरे गांव में भेजा. घूरती नजरों के सामने मेरी परेड कराई गई..जहां मुझे वेश्या कहा गया.

 

बीहड और जेल की जिंदगी को पीछे छोड सांसद बनी फूलन समाज के हासिए पर जी रही महिलाओं के लिए कुछ करना चाहती थी. वह राजनीति के शिखर पर पहुंचाना चाहती थी. लेकिन इससे पहले कि फूलन की ये चाहत पूरी हो पाती. 25 जुलाई 2001 को गोली मारकर फूलन देवी की हत्या कर दी गई. दिल दहला देने वाली वह वारदात चौदह साल पुरानी है. लेकिन अब चौदह साल बाद दिल्ली की पटियाला कोर्ट ने फूलन देवी की हत्या के मुख्य अभियुक्त शेर सिंह राणा के गुनाहों का हिसाब कर दिया है. अदालत ने शेर सिंह राणा को फूलन देवी का कातिल करार दिया है. लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि अदालत के इस फैसले के बाद भी राणा के घरवाले उसे कातिल मानने को राजी नहीं हैं.

 

एबीपी न्यूज के सामने शेर सिंह राणा के घरवालों ने जो कहानी सुनाई है उसके मुताबिक राणा को फूलन के कत्ल के मामले में फंसाया गया है. और इसके पीछे बहुत बडी राजनीतिक साजिश है.

 

फूलन देवी हत्याकांड में शेर सिंह राणा समेत कुल बारह अभियुक्त थे. जिसमें से एक की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी. बाकी बचे 11 आरोपियों में से अदालत ने सिर्फ शेर सिंह राणा को हत्या का दोषी ठहराया. और बाकी दस आरोपी बरी हो गए. अदालत के इस फैसले के बाद राणा के घरवाले जो आरोप लगा रहे हैं. उसकी कहानी चौंकाने वाली है. उनका कहना है कि फूलन की हत्या में शेर सिंह राणा का नहीं. फूलन के पति उम्मेद सिंह का हाथ है.

 

शेर सिंह राणा के घरवाले फूलन के पति उम्मेद सिंह पर जो आरोप लगा रहे हैं. ये आरोप तब भी लगा था जब 2001 में फूलन की हत्या की गई थी. तब फूलन की हत्या के बाद फूलन की बहन भी संदेह के घेरे में थी. लेकिन जांच के बाद पुलिस ने शेर सिंह राणा समेत बारह अन्य लोगों को अभियुक्त बनाया. चौदह साल तक ये मामला अदालत में चला. दूसरे लोग तो बरी हो गई. लेकिन अदालत ने शेर सिंह राणा को फूलन देवी की हत्या का दोषी करार दिया.

 

शेर सिंह राणा. फूलन देवी का हत्यारा. वो शख्स जिसे अब सुनाई जाएगी उसके गुनाहों की सजा और इसके साथ ही एक बार फिर उस खौफनाक वारदात की कहानी ताजा हो गई है. जिसने चौदह साल पहले सारे शहर में फैला दी थी सनसनी.

 

14 साल पहले उत्तराखंड के रुडकी के रहने वाले शेर सिंह राणा ने फूलन देवी की हत्या कैसे की और इस हत्या के पीछे उसका मकसद क्या था. ये कहानी बेहद सनसनीखेज है. वाकया 25 जुलाई 2001 का है. उस रोज फूलन देवी संसद से अशोक रोड स्थित अपने सरकारी आवास पर खाना खाने पहुंची थी और उसी दौरान शेर सिंह राणा ने फूलन देवी पर जानलेवा हमला बोल दिया. फूलन देवी की हत्या के बाद शेर सिंह राणा अपने साथियों समेत फरार हो गया था और जब हत्या की ये कहानी लोगों तक पहुंची. हर कोई सन्न रह गया.

 

फूलन की हत्या के बाद पुलिस फूलन के कातिल शेर सिंह राणा की तलाश में जुटी थी. वहीं राजनीतिक गलियारों में फूलन की हत्या के बाद मातम पसरा था. फूलन की हत्या ने दिग्गज राजनेताओं को भी सन्न कर दिया था. फूलन की हत्या के बाद दिल्ली पुलिस लगातार कातिल की तलाश में अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही थी. और जब दो दिन बाद शेर सिंह राणा ने देहरादून में आत्मसमपर्ण किया. तो उसके बयान ने हर किसी को चौंका दिया. शेर सिंह राणा का कहना था कि उसने बेहमई में 22 ठाकुरों की हत्या का बदला लेने के लिए फूलन की हत्या की है.

 

गिरफ्तारी के बाद शेर सिंह राणा को तिहाड जेल भेजा गया. लेकिन इसके दिमाग में खुराफात चलती रही. देखने में बेहद सीधा सादा शेर सिंह राणा कितना शातिर है इसका अंदाजा उसी दिन लग गया. जब राणा देश के सबसे सुरक्षित कहे जाने वाले तिहाड जेल सुरक्षाकर्मियों को भी चकमा देकर भाग गया.

 

वह 24 फरवरी 2004 का दिन था. उत्तराचंल पुलिस के तीन जवान तिहाड पुहंचे उन्होंने तिहाड के अधिकारियों से कहा कि वो हरिद्वार की एक अदालत में पेशी के लिए शेर सिंह राणा को लेने आए हैं. वे पुलिसवाले अपने साथ हथकडी और अदालत में राणा की पेशी के आर्डर की कॉपी भी लेकर आए थे. तिहाड के अधिकारियों ने ऑर्डर की कॉपी देखा और फिर शेर सिंह राणा को बैरक से निकालकर उत्तराचंल से आए पुलिसवालों को सौंप दिया. और फिर वो पुलिसवाले राणा को वहां से लेकर चले. बाद में जब हकीकत का खुलासा हुआ. तो पूरे तिहाड में हडकंप मच गया.

 

फूलन के हत्यारे शेर सिंह राणा ने फर्जी वारंट और नकली पुलिसवालों के जरिए तिहाड जेल के सुरक्षाकर्मियों को भी चकमा दे दिया था. वो तिहाड जेल से भाग गया था. जेल से भागने के बाद शेर सिंह राणा ने रांची से संजय गुप्ता के नाम से एक फर्जी पासपोर्ट बनवा लिया. और फिर फर्जी पासपोर्ट पर ही वो नेपाल, बांग्लादेश और अफगानिस्तान की .यात्राएं करता रहा. 2006 में शेर सिंह राणा कोलकाता के एक होटल में जॉय टिर्की के नाम से ठहरा था. दिल्ली पुलिस को कहीं से इसका सुराग मिल गया और फिर वो पुलिस के हत्थे चढ गया.

 

तिहाड जेल से फरार होने के बाद शेर सिंह राणा दो साल बाद एक बार फिर पुलिस की गिरफ्त में पुहंच गया था. लेकिन पकडे जाने के बाद राणा ने अपनी अफगानिस्तान यात्रा की जो कहानी पुलिस को सुनाई वो बेहद चौंकने वाली थी.

 

राणा ने पुलिस के सामने खुलासा किया कि तिहाड़ की जेल से भागने के बाद फर्जी पासपोर्ट पर अफगानिस्तान में अंतिम हिंदू सम्राट पृथ्वी राज सिंह चौहान की सामाधि पर गया था. और वहां से वो उनकी अस्थियां लेकर भारत आया है. अपने इस दावे को सही साबित करने के लिए शेर सिंह राणा ने एक वीडियो भी जारी किया.

 

अपने सनसनीखेज वीडियो को दिखाकर राणा ने तो ये भी दावा किया कि वो गजनी पृथ्वीराज राज चौहान की अस्थियों को ही लाने गया था. राणा ने पुलिस के सामने तब ये बयान दिया था. मैं देश के खोए हुए सम्मान को वापस लाना चाहता था. मैं देश के आखिरी हिंदू राजा पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां लेने के लिए अफगानिस्तान के गजनी में उनकी समाधी पर गया था, जिसकी सीडी मेरे पास है. वहां जाने के लिए मैंने फर्जी पासपोर्ट बनवाया और बांग्लादेश से दुबई के रास्ते अफगानिस्तान गया था. वहां से पृथ्वीराज चौहान की भस्म लाकर मैंने ‘विश्व क्षत्रिय महासभा’ को प्रदान की, जिन्होंने मैनपुरी जिले में कानपुर-बेवर रोड पर स्मारक बनवाया है.

 

फूलन देवी का कातिल शेर सिंह राणा. अपनी अफगानिस्तान यात्रा के इस सनसनीखेज वीडियो को दिखाकर खुद को देश का हीरो साबित करना चाहता था. और अब राणा के घरवाले भी उसे कातिल नहीं. बल्कि देशभक्त बता रहे हैं.

 

शेर सिंह राणा के घरवालों का तो ये भी कहना है कि वो निचली अदालत के फैसले के बाद उंची अदालत में अपील करेंगे. कभी फिल्मी स्टाइन में देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जेल से फरार हो जाना तो कभी अफगानिस्तान से पृथ्वीराज सिंह चौहान की अस्थियों को लाने का दावा करना. शेर सिंह राणा जब भी दुनिया के सामने आया कोई ना कोई नई कहानी भी सामने आई. 2006 में कोलकता से गिरफ्तार होने के बाद शेर सिंह राणा को वापस दिल्ली की तिहाड़ जेल में भेज दिया गया. लेकिन अपने कारनामों से राणा जेल के अंदर रहते हुए भी सुर्खियों में बना रहा. कभी उसने अपने ऊपर फिल्म बनाने की हसरत लेकर अपनी जिंदगी पर फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी …तो कभी चुनावी मैदान में उतरने की इच्छा जाहिर की. जेल में लिखी शेर सिंह राणा की ये किताब तो अब मार्केंट में भी आ गई है. और अब शेर राणा की जिंदगी पर एक फिल्म भी बनाई जा रही है.

 

 

साल 2012 में यूपी में हुए विधानसभा चुनाव में शेर सिंह राणा ने राजनीति में भी अपना पासा फेंका. उसने उत्तरप्रदेश के जेवर से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ा लेकिन वो चुनाव हार गया. उस चुनाव में वो पांचवे नंबर पर रहा. और अब उसे फूलन देवी के कत्ल के मामले में अदालत ने दोषी करार दिया है. लेकिन ऐसा नहीं है कि राणा पर ये कोई पहला अपराधिक मामला दर्ज है. इसके पहले साल 1997 में एक कार चोरी की वारदात में शेर सिंह राणा का नाम सामने आया था. साल 2000 में राणा और उसके साथियों ने हथियारों की नोंक पर एक बैंक में 10 लाख की लूट को अंजाम दिया इस वारदात में बैंक का गार्ड भी उनका शिकार बना था. राणा और उसके साथियों पर उसके कत्ल का इल्जाम है. बैंक लूट की इस सनसनीखेज वारदात के बाद राणा और उसके साथिय़ों नें रुड़की के एक बैंक में भी 15 लाख की लूट की.

 

साल दर साल शेर सिंह राणा के गुनाह की फेहरिस्त लंबी होती गई और अब अदालत ने फूलन देवी के कत्ल के मामले में उसे दोषी करार दिया है. अदालत राणा को अब 12 अगस्त को सजा सुनाएगी. उसके बाद ही पता चलेगा कि फूलन के हत्यारे को उसके किए की क्या सजा मिलती है.

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