जब्त किए गए ड्रग्स के दोबारा बाजार में पहुंचने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

By: | Last Updated: Thursday, 3 September 2015 2:40 PM
Pilferage of seized narcotics very serious, says Supreme court

नई दिल्ली: देश में अलग-अलग एजेंसियों की तरफ से ज़ब्त किये जाने वाले ड्रग्स के दोबारा बाजार में पहुंच जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. नियमों के मुताबिक ज़ब्त किये गए नारकोटिक्स पदार्थों को नष्ट कर देना चाहिए, लेकिन ऐसा बहुत कम हो रहा है.

 

सुप्रीम कोर्ट में रखे गए आंकड़ों के मुताबिक़ पिछले 10 साल में देश में 51.4 लाख किलो नारकोटिक्स को ज़ब्त किया गया, लेकिन इनमे से लगभग 16 लाख किलो को ही नष्ट किया गया.
 

आंकड़ो के मुताबिक़ पिछले 10 सालों में देश में 19 लाख किलो गांजा, 29 हज़ार किलो स्मैक, 22 हज़ार किलो चरस, 15 हज़ार किलो अफीम और 20 लाख किलो दूसरे नशीले पदार्थ ज़ब्त किये गए. इनमें हशीश और मॉर्फिन बनाने में काम आने वाले पोस्त की स्ट्रॉ (poppy straw) की बड़ी मात्रा है.

 

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस टी एस ठाकुर और कुरियन जोसफ ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में जमा नशीले पदार्थों की चोरी और दोबारा बेचे जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. अदालत ने कहा कि नारकोटिक्स को ज़ब्त करने, उसका भंडारण करने से लेकर उसे नष्ट करने तक की प्रक्रिया में तमाम खामियां हैं.

 

देश में ज़ब्त होने वाले ड्रग्स को ले कर सुप्रीम कोर्ट ने 3 साल पहले ब्यौरा मांगा था. अदालत ने ऐसा केंद्र सरकार की एक अपील पर सुनवाई करते हुए किया था. अपील में अफीम रखने के एक आरोपी को बरी करने के मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी. हाई कोर्ट ने उस शख्स को इसलिए बरी कर दिया था क्योंकि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो उसके पास से ज़ब्त किये गए अफीम को अदालत में पेश नहीं कर पाया था. न ही ब्यूरो इस बात का सबूत दे पाया कि अफीम को कानूनी तरीके से नष्ट कर दिया गया है.

 

इस बात को बेहद चिंताजनक मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में पकड़े जाने वाले नारकोटिक्स पदार्थों के बारे में ब्यौरा मांग लिया था. इसी के जवाब में ये चौंकाने वाले आंकड़े सामने आये हैं. हालांकि, इन आंकड़ों से ये साफ़ नहीं है कि नारकोटिक्स की जितनी मात्रा को अब तक नष्ट नहीं हुआ बताया जा रहा है, उसमें कितना वाकई बचा हुआ है और कितना गायब हो चुका है.

 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की तरफ से अदालत में पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार से कहा है कि वो ये बताएं कि नशीले पदार्थों को पकड़ने और मालखाने में जमा कराने की प्रक्रिया में किस तरह का बदलाव किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस के अलावा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, सेंट्रल कस्टम्स और डायरेक्टरेट ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलिजेंस जैसे विभाग भी नारकोटिक्स पदार्थों के मामले में छापा मारते हैं. लेकिन पुलिस थानों के अलावा दूसरे विभागों के पास आमतौर पर मालखाना नहीं होता.

 

दूसरे विभाग के अधिकारी ज़ब्त की गई सामग्री को नज़दीकी थाने में जमा करा देते हैं. इस सारी प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है. सरकार को सुप्रीम कोर्ट को ये भी बताना है कि क्या हर ज़िले में नारकोटिक्स को जमा करने के लिए एक सेंट्रलाइज्ड स्टोरेज बनाया जा सकता है?

 

साथ ही ये भी कि ऐसे मालखाने से नशीले पदार्थों के गायब न होने का बंदोबस्त कैसे किया जा सकता है. सरकार को ये भी बताना है कि देश में जमा नारकोटिक्स को जल्द से जल्द नष्ट के लिए क्या किया जा सकता है.

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Web Title: Pilferage of seized narcotics very serious, says Supreme court
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