Plea on cock fight; SC orders impleadment of Animal Welfare Board

Plea on cock fight; SC orders impleadment of Animal Welfare Board

By: | Updated: 09 Jan 2015 01:50 PM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने आज निर्देश दिया कि पशु कल्याण बोर्ड और अन्य को उस याचिका में पक्ष बनाया जाए जिसमें आंध्र प्रदेश में संक्राति त्योहार के दौरान पारंपरिक खेल मुर्गों की लड़ाई पर प्रतिबंध लगाने के राज्य के उच्च न्यायालय के हालिया आदेश पर रोक लगाए जाने की मांग की गयी है.

 

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच एल दत्तू और न्यायमूर्ति ए के सिकरी की पीठ ने कहा कि विशेष अनुमति याचिका पर पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबी) को एक पक्ष बनाए जाने का याचिकाकर्ता को निर्देश दिया जाता है.

 

पीठ अब सोमवार को मामले की सुनवाई करेगी. पीठ ने एडब्ल्यूबी की याचिका को मंजूर कर लिया कि संवैधानिक निकाय के रूप में उसे भी अनिवार्य पक्ष बनाया जाना चाहिए था.

 

वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के पहले के एक फैसले में इस प्रकार की सभी गतिविधियों पर रोक लगायी गयी है क्योंकि ये पशुओं और पक्षियों के साथ क्रूरता के समान हैं. उन्होंने अपने मुवक्किल को याचिका में एक पक्ष बनाए जाने की मांग की. न्यायालय ने उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया.

 

कल, अदालत सहमत हो गयी थी कि वह याचिका पर आज सुनवाई करेगी. यह याचिका एक सामाजिक कार्यकर्ता सहित क्षेत्र के कुछ लोगों ने दाखिल की थी.

 

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर 29 दिसंबर को अपने एक आदेश में पुलिस अधीक्षक को पश्चिमी गोदावरी जिले में 10 से 16 जनवरी के बीच होने वाले संक्राति समारोह के दौरान सट्टेबाजी के साथ मुर्गों की लड़ाई के आयोजकों तथा शराब की बिक्री, जुआ, पशु.पक्षियों के साथ क्रूरता के मामले में कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.

 

उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इन गतिविधियों पर रोक लगा दी थी. जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि यह प्रताड़ना से पशुओं को बचाने के लिए बने कानून के खिलाफ है.

 

सुनवाई और मामले के निस्तारण तक उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक की मांग करते हुए याचिकाकर्ताओं ने कहा कि संक्राति :पोंगल त्योहार: कृष्णा, पश्चिमी गोदावरी और पूर्वी गोदावरी जिलों सहित आंध्र प्रदेश के सभी क्षेत्रों में मनाया जाता है.

 

मुर्गों की लड़ाई को उचित ठहराते हुए याचिका में कहा गया है, ‘‘ त्योहार के इस मौसम में, बाहर रहने वाले लोगों के परिवारों के सभी सदस्य पांच दिनों के लिए अपने मूल स्थान पर एकत्र होते हैं. मुर्गों की लडाई परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है और इसके बिना त्योहारों का महत्व खत्म हो जाएगा.

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