समस्याओं के समाधान की जड़ी-बूटी है विकास: पीएम मोदी

By: | Last Updated: Monday, 18 May 2015 12:18 PM

सोल : भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने संबंधों का स्तर बढा कर उसे ‘विशेष रणनीतिक भागीदारी’ के स्तर पर ले जाने तथा रक्षा क्षेत्र में सहयोग को प्रगाढ़ बनाने पर आज सहमति जतायी. दोनों देशों ने दोहरे कराधान से बचाव समेत सात समझौतों पर हस्ताक्षर किये.

 

अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में मंगोलिया से यहां पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति पार्क गुएन-हाई के साथ राष्ट्रपति भवन ‘चेओंग वाई देई’ में विभिन्न मुद्दों पर व्यापक बातचीत की.

 

राष्ट्रपति पार्क के साथ ‘शानदार’ बातचीत के बाद मोदी ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हम द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत बनाकर इसे ‘विशेष रणनीतिक भागीदारी’ के स्तर पर ले जाने को सहमत हुए हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने संबंधों की ऐसी आधारशिला रखी है जो दो साझा मूल्य वाले प्रमुख एशियाई देशों के बीच होनी ही चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि आज जो निर्णय किये गये, वे इस बात को प्रतिबिंबित करते है कि दोनों देश संबंधों की नयी व्यवस्था को कितनी गंभीरता से रहे हैं.

 

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि भारत अपने आर्थिक आधुनिकीकरण में दक्षिण कोरिया को ‘महत्वपूर्ण सहयोगी’ मानता है. उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया भारत में वैश्विक स्तर का विनिर्माण क्षेत्र विकसित करने के प्रयासों में प्रमुख सहयोगी हो सकता है.

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह राजनीतिक लाभ के लिए कुछ नहीं करना चाहते . एक साल में बदलाव हुआ. देश का युवा परिवर्तन चाहता है और हम उस दिशा में लगे हुए हैं. हर क्षेत्र में हमें विकास की नई उंचाई को पार करना है. मोदी ने कहा कि वह दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए भारत को विनिर्माण केंद्र बनना चाहते हैं.

 

उन्होंने विदेशों में बसे भारतीयों को स्वदेश लौटने और देश में निवेश करने का निमंत्रण देते हुए कहा कि पिछले एक साल में भारत के बारे में लोगों का मूड और धारणा बदल चुकी है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ आज लोग भारत आने को लेकर काफी उत्साहित हैं. यह मूड में बदलाव का प्रतीक है. अखिर यह जनता ही है जो राष्ट्र का निर्माण करती है. दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी को भारत आना चाहिए.’’ मोदी ने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर उसकी पूरब की ओर देखों यानी ‘लुक ईस्ट’ नीति पर चुटकी लेते हुए कहा कि हमने इसे बहुत देख लिया और अब वक्त है पूरब पर काम करने यानी ‘एक्ट ईस्ट’ का. उन्होंने कहा कि यह भू-भाग, अड़ोस-पड़ोस के सारे देश तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं.

 

मोदी ने कहा कि अब हिन्दुस्तान का सूर्य उदय हो चुका है, अब हिन्दुस्तान विश्व के अन्दर अपनी एक बहुत बड़ी अहम भूमिका निभाएगा.

 

उन्होंने कहा 21वीं सदी एशिया की सदी बन कर रहेगी और हिंदुस्तान बड़ी भूमिका निभाएगा. साल भर में दुनिया के लोगों का भारत के प्रति नजरिया बदला. इंडिया के बिना ब्रिक्स संभव नहीं है. पिछले दो-तीन महीनों में दुनिया की सभी मंचों पर चर्चा हुई है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है.

 

विश्व के अर्थशास्त्रियों का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि दुनिया के सामने एक नया शब्द दिया गया ‘ब्रिक्स’.. ब्राजील, रूस, इंडिया, चाइना, साउथ अफ्रीका. तब कहा गया था कि ब्रिक्स देशों का समूह, विश्व के आर्थिक जीवन का संचालन करेगा. ये 20वीं सदी के आखिरी दिनों में और 21वीं सदी के प्रारंभ में कहा जाता था. उन्होंने कहा कि लेकिन पिछले 10 साल, 15 साल के भीतर-भीतर दुनिया के स्वर बदल गये. आर्थिक विशेषज्ञों के स्वर बदल गये हैं और वो कहने लगे कि लगता है कि ब्रिक्स में ‘‘आई’’ :इंडिया: लुढ़क रहा है, ‘आई’ तो नीचे जा रहा है, सब तरफ चिंता हो रही थी कि जो सपना ब्रिक्स के रूप में पूरे विश्व की आर्थिक व्यवस्था के लिए देखा था वो अब क्यों लुढ़क रहा है, क्योंकि ‘आई’ लुढ़क रहा है.’’ मोदी ने कहा कि लेकिन पिछले एक वर्ष में दुनिया के स्वर बदले हैं . दुनिया का नज़रिया भी बदल गया है. दुनिया को अब लगने लगा है कि आई :इंडिया: ब्रिक्स के बिना संभव नहीं होगा. पिछले 2-3 महीने में, चाहे आईएमएफ हो, विश्व बैंक हो, रेटिंग एजेंसी हो या मूडी हो सबने अलग-अलग मंचों पर एक स्वर से कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है.

 

उन्होंने कहा कि आज एशिया को लगता है कि हिन्दुस्तान जिस तरह से उठ खड़ा हुआ है, 21वीं सदी एशिया की सदी बनकर रहेगी.

 

नरेंद्र मोदी ने एशिया में दक्षिण कोरिया को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया और कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता बनाये रखने के लिये कूटनीतिक प्रयासों का स्वागत किया.

 

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनकी :राष्ट्रपति पार्क: इस चिंता को भी साझा किया कि परमाणु और अन्य व्यापक नरसंहार वाले हथियार क्षेत्र के देशों के हित में नहीं होंगे. मैंने कोरियाई प्रायद्वीप के शांतिपूर्ण तरीके से पुनर्एकीकरण के लिये भारत के समर्थन की भी पेशकश की.’’ दोनों नेताओं ने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और आसियान के साथ सहयोग पर भी चर्चा की.

 

मोदी ने कहा, ‘‘ खुली, संतुलित और समावेशी क्षेत्रीय संरचना में हमारे साझा हित हंै. इस क्षेत्र में समुद्रीय सुरक्षा को लेकर हमारे साझा विचार है.’’ उन्होंने कहा कि नौवहन की आजादी और संचार के समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर दोनों पक्षोंने क्षेत्र में अन्य देशों के साथ मिलकर काम करने पर सहमति जतायी है.’’ प्रधानमंत्री ने साइबर सुरक्षा और आतंकवाद की चुनौतियों को लेकर भी चिंता जतायी और कहा कि भारत इन चुनौतियों से निपटने में सहयोग में रूचि रखता है.

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Web Title: pm modi
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