मोदी का मिशन 44 प्लस क्यों हुआ फेल?

By: | Last Updated: Tuesday, 23 December 2014 2:36 PM

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में चुनाव प्रचार की शुरूआत करते हुए बीजेपी ने मिशन 44 प्लस का नारा लगाया था. मिशन 44 प्लस मतलब 87 सदस्यों वाली विधानसभा में आधी से ज्यादा सीट . बीजेपी इस मिशन को पूरा करने में सफल नहीं हो पाई है हालांकि वह राज्य में दूसरी बड़ी पार्टी बनने में जरुर सफल रही है . आइए देखते हैं कि आखिर बीजेपी अपने मिशन को पूरा करने से कैसे चूक गई ?

 

87 सदस्यों वाली जम्मू कश्मीर विधानसभा के लिए बीजेपी मिशन 44 प्लस का लक्ष्य तय किया था लेकिन चुनावी नतीजे से साफ हो रहा है कि वो अपने मिशन को पूरा करने में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई . दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी है बीजेपी . 

 

बीजेपी के मिशन 44 प्लस को सबसे ज्यादा चोट कश्मीर घाटी और लद्दाख में लगी है . दोनों इलाकों में उसका खाता तक नहीं खुल पाया . लद्दाख की चारों सीट पर उसकी नजर थी लेकिन एक भी सीट उसके हिस्से नहीं आयी . घाटी की 46 सीटों में बीजेपी को उम्मीद थी कि कुछ सीटों पर कमल खिल जायेगा लेकिन सभी सीटों पर कमल कुम्हला गया . श्रीनगर की आठ में से सात विधानसभा सीट पर उसके उम्मीदवार की जमानत भी जब्त हो गई .

 

बीजेपी चुनावी नतीजों के विश्लेषण के बात कह रही है लेकिन वो ये मानने के लिए कतई तैयार नहीं हैं कि पीएम मोदी का जादू केवल जम्मू इलाके के लोगों पर चला है .

 

कश्मीर घाटी और लद्दाख में करारी शिकस्त के बावजूद बीजेपी राज्य में किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है . पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनकर उभरी है लेकिन वो अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती है . अब सीटों के इस समीकरण को देखते हुए बीजेपी नये सिरे से संभावनाएं तलाश रही है .

 

बीजेपी गठबंधन की सरकार में होगी या नहीं, ये अभी तय नहीं लेकिन एक बात तय है कि जम्मू कश्मीर में बीजेपी दूसरी बड़ी पार्टी बन चुकी है और नई सरकार में उसकी प्रभावी भूमिका होगी .

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Web Title: pm modi
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