LIVE: सार्वजनिक हुईं नेता जी से जुड़ी गोपनीय फाइलें

By: | Last Updated: Saturday, 23 January 2016 1:10 PM
PM Modi all set to declassify secret files on Netaji

नई दिल्ली: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज जयंती है. उनकी जयंती के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी आज उनसे जुड़ी कुछ फाइलों को सार्वजनिक करने वाले हैं. पीएम मोदी नेशनल आर्काइव पहुंच चुके हैं.

लाइव अपडेट:

  • इस वेबसाइट पर
  • से जुड़ी सभी गोपनीय फाइलें पर देखी जा सकती हैं
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  • पीएम मोदी ने नेता जी के परिवार से भी मुलाकात की
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  • सार्वजनिक हुईं #NetajiSubhasChandraBose से जुड़ी गोपनीय फाइलें. पीएम मोदी ने वेबसाइट का अनावरण किया
  • Netaji.com के जरिए इन फाइलों को ऑनलाइन देखा जा सकेगाmodi3
  • अखबार इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक नेताजी के 1950 में देखे जाने की जानकारी का आधार सोवियत न्यूज एजेंसी तास और जर्मनी के अखबारों में छपी कुछ खबरें हैं.
  • अखबार का दावा है कि आज नेशनल आर्काइव में होने वाले कार्यक्रम में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के अंतिम सस्कार के वक्त की तस्वीरें भी फिल्म के जरिए दिखाई जाएगी.

 

इन फाइलों से नेताजी सुभाष चंद्र की मौत से जुड़ा रहस्य सामने आने वाला है. इस बीच कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं. अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स ने उच्च सूत्रों के हवाले से खबर छापी है कि प्रधानमंत्री जो जानकारी सार्वजनिक करने वाले हैं उसमें ये बताया जाएगा कि 1945 में हुए विमान हादसे के बाद भी नेताजी जिंदा थे. अखबार इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक नेताजी के 1950 में देखे जाने की जानकारी का आधार सोवियत न्यूज एजेंसी तास और जर्मनी के अखबारों में छपी कुछ खबरें हैं. इन रिपोर्ट के मुताबिक 1950 तक नेताजी को जर्मनी, अमेरिका और नेपाल में देखा गया था. अखबार का दावा है कि आज नेशनल आर्काइव में होने वाले कार्यक्रम में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के अंतिम सस्कार के वक्त की तस्वीरें भी फिल्म के जरिए दिखाई जाएगी. जिसमें नेताजी के जैसा एक शख्स खड़ा दिखाई दे रहा है.

सुबह 9 बजे के करीब नेता जी का परिवार भी पार्लियामेंट के लिए रवाना हो चुका है. नेता जी के भतीजे चंद्र बोस ने कहा है कि आज पूरे देश के लिए बहुत बड़ा दिन है.

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इससे पहले पिछले साल सितंबर में पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने नेताजी से जुड़ी 64 फाइलों को सार्वजनिक किया था. जिसके बाद नेताजी के परिवार ने दावा किया था कि वो कम से कम साल 1964 तक जिंदा थे. नेताजी की मौत को लेकर आज भी संशय है.

इस मामले में अब तक क्या हुआ जानें-
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में कहा जाता है कि उनकी मौत 18 अगस्त 1945 को ताइपे में एक विमान दुर्घटना में हुई..लेकिन बाद में इस पर कई सवाल उठने लगे. भारत में बहुत बड़ा तबका ये मानता है कि सुभाष बोस उस विमान दुर्घटना में जीवित बच निकले थे और वहां से रूस चले गए थे.

जबकि बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी के मुताबिक विमान दुर्घटना के समय ताइवान जापानियों के कब्ज़े में था. उसके बाद उस पर अमेरिका का कब्ज़ा हो गया. दोनों देशों के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि उस दिन वहां कोई विमान दुर्घटना हुई थी. सुब्रमण्यम स्वामी रूस के एक स्कॉलर के हवाले से कहते हैं कि नेता जी तो ताइवान गए ही नहीं थे. वो साएगोन से सीधे मंचूरिया आए थे, जहां उन्हें सोवियत संघ ने गिरफ़्तार कर लिया था. बाद में स्टालिन ने उन्हें साइबेरिया की यकूत्स्क जेल में भिजवा दिया था जहां 1953 में उनकी मौत हो गई थी.

नेताजी की मौत की गुत्थी को सुलझाने के लिए साल 1956 में भारत सरकार ने शाहनवाज खान कमिटी का गठन किया. इस कमिटी ने ताइवान गए बिना ही सिर्फ जापान में कुछ लोगों से बात करके रिपोर्ट दे दी. खान कमिटी की रिपोर्ट में बताया गया कि सुभाष चंद्र बोस की मौत प्लेन क्रेश में ही हुई थी. हालांकि सुभाष बोस के साथ उस विमान में सवार हबीबुररहमान ने पाकिस्तान से आकर शाहनवाज़ समिति के सामने गवाही दी कि नेता जी उस विमान दुर्घटना में मारे गए थे और उनके सामने ही उनका अंतिम संस्कार किया गया था. इस रिपोर्ट पर कमिटी में शामिल नेताजी के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस ने कड़ी आपत्ति जताई. ज्यादातर सांसद भी इस रिपोर्ट से सहमत नहीं थे.

कुछ सालों बाद नेता जी की मौत के रहस्य को लेकर जांच की मांग फिर से तेज हुई. 1970 में खोसला कमिशन का गठन किया गया…खोसला कमिशन ने अपनी रिपोर्ट में वही बात दोहराई कि नेता जी का 1945 में प्लेन क्रैश में मौत हो गई.हालांकि इस पर भी नेताजी से जुड़े कई लोगों ने आपत्ति जताई. लेकिन 1978 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने संसद में कहा कि कुछ ऐसे कागजात मौजूद हैं, जिनसे नेताजी की मौत प्लेन क्रेश में होने की बात स्वीकार नहीं की जा सकती.

इसके बाद 1999 वाजपेयी सरकार के दौरान जस्टिस मुखर्जी कमिशन ने इस गुत्थी को सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई. मुखर्जी कमिशन ने शाहनवाज और खोसला कमिशन की रिपोर्ट के उलट अपनी रिपोर्ट में कहा कि नेताजी की मौत प्लेन क्रेश में नहीं हुई थी. ताइवान ऑथॉरिटी ने भी कहा कि 14 अगस्त से 20 सितंबर 1945 के बीच वहां कोई प्लेन क्रेश नहीं हुआ था. लेकिन मुखर्जी आयोग यह बताने में सफल नहीं हो पाया कि नेताजी की मौत कब, कैसे और कहां हुई थी?

सरकार ने अब तक इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया है. वहीं नेताजी से जुड़े ज्यादातर लोग भी इस नेताजी के हवाई हादसे में बचने की बात को दुनिया के सामने स्वीकार नहीं करते.

 

 

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