मोदी के काम को टॉप सीईओ ने सराहा, लेकिन कहा-इतना काफी नहीं रिफॉर्म 

By: | Last Updated: Friday, 25 September 2015 3:15 AM
PM Modi meets with leading Fortune 500 CEOs

न्यूयार्क : भारत में अमेरिकी निवेश आमंत्रित करने का पुरजोर प्रयास करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शीर्ष कंपनियों के सीईओ से मुलाकात की. पीएम ने उनके समक्ष भारत की आर्थिक वृद्धि की कहानी पेश की और भारत में कारोबार करने में आ रही रुकावटों को दूर करने का आश्वासन दिया. सभी टॉप सीईओ ने भारत के प्रयासों की सराहना की. लेकिन, साथ में उन्होंने यह भी कहा की इतना रिफॉर्म काफी नहीं है. लालफीताशाही की ओर सीईओ ने खास ध्यान आकर्षित किया.

 

इससे पहले अमेरिका के पांच दिवसीय दौरे पर न्यूयार्क पहुंचे प्रधानमंत्री ने पिछले 15 महीने में कराधान, आधारभूत संरचना और एफडीआई में तेजी लाने के अपनी सरकार के कदमों का जिक्र किया. साथ ही आर्थिक कूटनीति पर बल दिया और उद्योगों से मेक इन इंडिया पहल में हिस्सेदार बनने की पुरजोर अपील की. प्रधानमंत्री ने उद्योगों के प्रमुखों के समक्ष सरकार के सुधार एजेंडे की तस्वीर पेश की और आर्थिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए अब तक किये गए प्रयासों का उल्लेख किया. पीएम ने विश्वास दिलाया कि कोई भी रूकवाट जो नहीं होनी चाहिए, वह नहीं रहेगी.

फार्चून 500 से जुड़ी कई कंपनियों के प्रमुखों से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमारी सरकार निजी सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) का मजबूती से समर्थन करती है. पिछले वर्ष हमारी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रही. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में भी 40 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है. वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ और मूडीज का कहना है कि आर्थिक माहौल और बेहतर होगा.’

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने स्वरूप ने कहा कि कंपनियों के सीईओ ने प्रधानमंत्री के साथ भारत में कारोबार करने के अपने अनुभवों को साझा किया. प्रधानमंत्री ने चर्चा के दौरान इनके सुझाव नोट किये, साथ ही भारत में विदेशी संस्थागत निवेशकों और एफडीआई के लिए उपलब्ध व्यापक अवसरों का जिक्र किया.

उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान निवेशकों ने कुछ चिंताएं व्यक्त कीं और कहा कि अभी भी कुछ लालफीताशाही शेष है, विनियमन उम्मीदों के अनुरूप तेज गति से नहीं हो रहा है. कराधान नीतियों, दिवालिया होने से संबंधित कानून, विनियमन के बारे में भी उनकी कुछ चिंताएं थीं और वे चाहते हैं कि आधारभूत संरचना का विकास तेज गति से हो. मोदी ने सीईओ से सभी मुद्दों और अपनी चिंताओं पर विस्तृत नोट सौंपने को कहा ताकि इन पर विचार करके कदम उठाए जा सके.

 

वाल्डोर्फ टावर्स होटल में प्रधानमंत्री मोदी के साथ वित्तीय क्षेत्र पर विश्व की कुछ शीर्ष कंपनियों के सीईओ ने गोलमेज बैठक में चर्चा की. इनमें जे पी मोर्गन के सीईओ जेमी डिमोन, ब्लैकस्टोन के सीईओ एवं सह संस्थापक स्टीव स्वार्जमैन, वार्गर पिंकस के सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी चार्ल्स काई, केकेआर के सह अध्यक्ष हेनरी क्रैविस, जनरल एटलांटिक के सीईओ बिल फोर्ड, एआईजी इंश्योरेंश के सीईओ पीटर हैंकाक, टाइगर ग्लोबल के सह संस्थापक चेज कोलमैन, एनवाई स्टेट कामन रिटार्यमेंट फंड के मुख्य निवेश अधिकारी विक्की फुलर आदि शामिल थे.

भूमि अधिग्रहरण के बारे में चिंताओं पर स्वरूप ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 30 किलोमीटर सड़क प्रतिदिन बनाने का लक्ष्य रखा है जो वर्तमान 13 किलोमीटर प्रतिदिन से कहीं अधिक होगी. उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होगा जब भूमि उपलब्ध होगी. ‘हम इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं.’ सीईओ ने कहा कि भारत में निवेश की काफी क्षमताएं हैं और इस बात को स्वीकार किया कि वित्तीय बाजार में सुधार पहले ही शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में और सुधार होंगे.

 

शीर्ष उद्योगों के प्रमुखों से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने आगे बढायी जा रही और आने वाली वृहद विकास परियोजनाओं का खाका पेश किया जिसमें 5 करोड़ मकान बनाने, 24 घंटे बिजली प्रदान करने और 175 जीडब्ल्यू नवीकरणीय उर्जा की योजना शामिल है. प्रधानमंत्री ने देश में 500 से अधिक रेलवे स्टेशनों के विकास में हिस्सेदारी के लिए निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया. स्वरूप ने बताया कि सीईओ ने प्रधानमंत्री की ओर से भारतीय अर्थव्यवस्था को खोलने के संदर्भ में उठाये जा रहे ‘साहसी’ कदमों की सराहना की.

 

यह पूछे जाने पर कि क्या चर्चा के दौरान चीन का मुद्दा भी सामने आया, स्वरूप ने इसका ‘नहीं’ में उत्तर दिया. स्वरूप ने ट्वीट किया, ‘वित्तीय क्षेत्र के सीईओ से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा, हमारी सरकार निजी सार्वजनिक साझेदारी का मजबूती से समर्थन करती है. बैठक के बाद ब्लैकस्टोन के सीईओ स्टीफन ए स्वार्जमैन ने कहा, ‘देश में पहुंच को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव सामने आए. प्रधानमंत्री ने खुले दिल से इन सुझावों को सुना.’

 

ब्लैकस्टोन के सीईओ ने कहा, ‘बढ़ती आबादी के साथ दुनिया में उनकी (भारत) वृद्धि दर विश्व की सर्वोच्च दरों में एक है. उन्हें सरकार में सुधार करना है, ताकि चीजों में एकरूपता आ जाए.’ इस सवाल पर कि अमेरिकी कंपनियां भारतीय प्रधानमंत्री से किस तरह का सुधार लाने की उम्मीद कर रही हैं, उन्होंने कहा, ‘इनमें कई चीजें हैं जिनमें अमेरिकी कंपनियों की आईपीओ लेने की क्षमता, ग्रामीण क्षेत्रों में और पूंजी लगाने की क्षमता आदि शामिल है.’ अमेरिकी संघीय दर में वृद्धि के आकलन के बारे में पूछे जाने उन्होंने कहा कि इसका भारत पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा.

 

जे पी मार्गन के सीईओ जेम्स डीमन ने कहा, ‘मेरी काफी अच्छी मुलाकात रही. साझेदारी की भावना के साथ काफी रचनात्मक चर्चा हुई. हम भारत के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हासिल करने के प्रयासों को लेकर काफी आशान्वित हैं.’ जे पी मार्गन के बारे में उन्होंने कहा कि वह काफी समय से भारत में है और उसके 28 हजार से अधिक कर्मचारी हैं.

एन वाई कामन रिटायरमेंट फंड के विक्की फुलर ने यह पूछे जाने पर कि क्या भारत में आर्थिक सुधार की गति को लेकर वे संतुष्ट हैं, उन्होंने कहा, ‘हां, मैं हूं.’

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