सरकार सहमति से चलती है, अल्पमत-बहुमत आखिरी विकल्प: PM मोदी

By: | Last Updated: Friday, 27 November 2015 12:11 PM
pm modi on constitution in loksabha

नई दिल्ली: संसद में दो दिन तक चली संविधान पर चर्चा का जवाब देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने आज बाबा साहब आंबेडकर की संविधान बनाने में बड़ी भूमिका को याद किया तो संविधान पर चर्चा में रुचि दिखाने के लिए सभी संसद सदस्यों को धन्यवाद भी दिया.

 

PM मोदी ने कहा, संविधान पर चर्चा में ‘हम’ निहित है ना कि ‘मैं’ या ‘आप’. संविधान में हम सबको बांधने की ताकत है.” आरक्षण विवाद पर पीएम ने जवाब देते हुए कहा कि, ”हम आरक्षण पर संविधान में कभी संशोधन नहीं करेंगे.  संविधान में कोई बदलाव नहीं होगा, यह आत्महत्या जैसा हो सकता है. ”

 

पीएम मोदी ने संविधान पर चर्चा के दौरान कहा, ” सरकार सहमति से चलती है. अल्पमत और बहुमत तो आखिरी विकल्प होता है. ” पीएम ने कहा कि सरकार का एक ही धर्म होता है वो है ‘इंडिया फर्स्ट’ और एक ही धर्मग्रंथ वो है- भारत का संविधान.

 

PM ने कहा, ”मेरा कुछ नहीं, तो मुझे क्या. यह भाव देश के लिए अच्छा नहीं.. देश के लिए कर्तव्यभाव जगाना होगा. देश में सिर्फ अधिकारों पर बात होती है, अब कर्त्व्य पर ध्यान देना होगा.”

 

पीएम ने कहा कि इस सत्र में बोनस एक्ट लाएंगे जिससे बोनस 3500 से बढ़कर 7000 होगा.

 

पीएम मोदी ने कहा, ”राजनीतिक पार्टियों ने अपने पर ख़ुद बंधन लगाए हैं. चुनावी ख़र्च की सीमा लगाई.मंत्रियों की संख्या को सीमित किया. हमारे यहां एक समय आया, जब मंत्रियों की संख्या बढ़ने लगी, तो कोटा सिस्टम लाया गया. हमने अपने ऊपर बंधन लगाया.”

 

PM ने आगे संविधान पर बोलते हुए कहा, हर पीढ़ी के लोगों को संविधान को समझना और इस पर चर्चा करनी चाहिए. संविधान को लेकर पूरे देश में व्यापक तौर पर ऑनलाइन कॉम्पटीशन होना चाहिए. ”

 

पीएम मोदी ने देश के आगे बढ़ने पर कहा, हमारा देश कई लोगों की तपस्या और सभी सरकारों के सहयोग से आगे बढ़ा है यह देश कोटि-कोटि जन-जन, श्रमिकों, शिक्षकों और मजदूरों ने अपने पसीने से बनाया है. हमारे देश को राजाओं ने नहीं आमजन ने बनाया.”

 

पीएम मोदी ने कहा, संविधान को बनाने में बाबा साहब आंबेडकर की भूमिका को कभी नकारा नहीं जा सकता. जिस देश में विश्व के सभी जीवित 12 धर्म हों, 122 भाषाएं हो, 1600 से ज्यादा बोलियां हों. वहां संविधान बनाना बहुत बड़ा काम है.

 

बाबा साहब आंबेडकर के संविधान बनाने पर भूमिका पर पीएम ने कहा, ”भारत के लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए भारत के संविधान को जन-जन तक सिंचित करना होगा. बाबा साहब आंबेडकर के विचार सबके लिए हैं. आंबेडकर ने 100 साल आगे तक की बात सोची. बाबा साहब आंबेडकर ने जीवनभर अपमान झेला लेकिन संविधान में कहीं वो बदले की भावना दिखाई नहीं दी. आंबेडकर ने अपमान के जहर को पी लिया और हमारे लिए संविधान के रूप में अमृत छोड़कर गए.”

 

पीएम ने संविधान निर्माण पर कहा, ”आज हम एक कानून भी एकदम ठीक से नहीं बना पा रहे, कई बदलाव करने पड़ते हैं.”

 

PM मोदी ने आगे कहा कि, हमारे देश का संविधान एक सामाजिक दस्तावेज है. आंबेडकर की वजह से यह एक सामाजिक दस्तावेज बना वरना एक कानूनी दस्तावेज ही रह जाता.

 

पीएम ने आगे कहा, ”साधु की सच्ची परीक्षा कठिन परिस्थितियों में होती है जैसे कपूर को आग के पास लाने से उसके जलने का डर नहीं रहता वह खुद जलकर अपनी सुरभि से सबको मोहित कर देता है. उसी तरह आंबेडकर ने संविधान में कहीं भी बदले की भावना नहीं आने दी.”   

 

पीएम ने कहा, ”यदि हम लोकतंत्र को एक रूप में ही नहीं बल्कि सच में बनाए रखना चाहिए तो हमें अपने आर्थिक और सामाजिक सक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संवैधानिक तरीके अपनाना चाहिए. और अराजनकता जैसे असंवैधानिक तरीके नहीं अपनाना चाहिए.”

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