नेपाल दौरे के आखिरी दिन पशुपतिनाथ मंदिर में मोदी ने की पूजा, सावन के आखिरी सोमवार को किया रुद्राभिषेक

By: | Last Updated: Monday, 4 August 2014 2:35 AM
PM Modi reaches Pashupatinath Temple in Kathmandu to offer prayers

नई दिल्ली: नेपाल दौरे के दूसरे दिन काठमांडू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किए पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन, मोदी ने पशुपतिनाथ का रुद्राभिषेक भी किया.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब एक घंटे तक पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की, पूजा करने के बाद मोदी माथे पर चंदन औऱ गले में रूद्राक्ष की माला पहने निकले. आज सावन का आखिरी सोमवार है इसलिए इस पूजा का महत्व ज्यादा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के राष्ट्रपति से भी मुलाकात की है.

 

पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचे मोदी का 108 ब्राह्मण छात्रों ने मंत्र पढ़कर किया खास स्वागत. मोदी के अभिवादन के लिए नेपाल का पारंपरिक नेवारी ड्रम धिमे और नेपाली बांसुरी भी बजाई गई. काठमांडू के पशपुति नाथ मंदिर में मोदी की पूजा पाठ के लिए पूरे मंदिर परिसर को सील कर दिया गया था, मोदी के स्वागत के लिए पूरे मंदिर को सजाया गया था.

पशुपति नाथ मंदिर में पूजा के बाद नेपाल के राष्ट्रपति रामबरन यादव से मिले. उसके बाद मोदी नेपाल के नेताओं और कारोबारियों से भी मिलेंगे.

 

क्या है पशुपति का महत्व-

शिव पुराण के 351 वें श्लोक में श्री पशुपति लिंग का उल्लेख ज्योतिर्लिंग के समान ही किया गया है. भगवान आशुतोष, ऐसी सुंदर तपोभूमि के प्रति आकर्षित हो कर, एक बार कैलाश छोड़ कर यहीं आ कर रम गये. इस क्षेत्र में यह 3 सींग वाले मृग बन कर, विचरण करने लगे. अतः इस क्षेत्र को पशुपति क्षेत्र, या मृगस्थली कहते हैं. शिव को इस प्रकार अनुपस्थित देख कर ब्रह्मा, विष्णु को चिंता हुई और दोनों देवता शिव की खोज में निकले. इस सुंदर क्षेत्र में उन्होंने एक देदीप्यमान, मोहक 3 सींग वाले मृग को चरते देखा. उन्हें मृग रूप में शिव होने की आशंका हुई.

 

ब्रह्मा ने योग विद्या से तुरंत पहचान लिया कि यह मृग नहीं, बल्कि शिव ही हैं. तत्काल ही उछल कर उन्होंने मृग का सींग पकड़ने का प्रयास किया. इससे सींग के 3 टुकड़े हो गये. उसी सींग का एक टुकड़ा इस पवित्र क्षेत्र में गिरा और यहां पर महारुद्र उत्पन्न हुए, जो श्री पशुपति नाथ के नाम से प्रसिद्ध हुए. शिव की इच्छानुसार भगवान विष्णु ने नागमती के ऊंचे टीले पर, शिव को मुक्ति दिला कर, लिंग के रूप में स्थापना की, जो पशुपति के रूप में विख्यात हुआ.

 

नेपाल माहात्म्य में तथा सुनी जाने वाली जनश्रुति के अनुसार नित्यानंद नाम के किसी ब्राह्मण की गाय नित्य एक ऊंचे टीले पर जा कर स्वयं दूध बहा देती थी. नित्यानंद को भगवान ने स्वप्न में दर्शन दिया. तब उस स्थान की खुदाई की गई और यह भव्य लिंग प्राप्त हुआ. भगवान् पशुपति नेपाल के शासकों और जनता-जनार्दन के परम आराध्य देवता हैं. इस शिव लिंग की ऊंचाई लगभग 1 मीटर है. यह काले रंग का पत्थर है, जो अवश्य ही कुछ विशेष धातुओं से युक्त है. इसकी चमक, आभा और शोभा अद्धितीय हैं.

 

नेपालवासियों का ऐसा विश्वास है कि इस लिंग में पारस पत्थर का गुण विद्यमान है, जिससे लोहे को स्पर्श करने से वह सोना बन जाता है. जो भी हो, इस भव्य पंचमुखी लिंग में चमत्कार अवश्य है, जो समस्त नेपाल के जनता-जनार्दन एवं भारतवासियों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करता है. नेपालवासी अपने हर शुभ कार्य के प्रारंभ में भगवान पशुपति का आशीर्वाद प्राप्त करना अनिवार्य मानते हैं. कुछ लोगों का विश्वास है कि यह मंदिर पहली शताब्दी का है. इतिहासकार इसे तीसरी शताब्दी का बताते हैं. मंदिर अति प्राचीन है. समय-समय पर इसमें मरम्मत होती रहती है एवं इसका रखरखाव होता रहा है.

 

नेपाल शासकों के अधिष्ठाता देव होने के कारण शासन की ओर से इसकी पूरी देखभाल सदैव होती रही है. इस मंदिर में केवल हिंदू ही प्रवेश कर सकते हैं. मुख्य द्वार पर नेपाल सरकार का संगीनधारी पहरेदार हर समय रहता है. चमड़े की वस्तुएं मंदिर में ले जाना वर्जित है. अंदर फोटो लेना भी मना है. मंदिर की शोभा मंदिर के पूर्व भाग से, बागमती के पूर्वी तट से भी देखी जा सकती है. विदेशी पर्यटकों के लिए यह मंदिर आकर्षण का केंद्र माना जाता है. हर मौसम में प्रायः हजारों विदेशी पर्यटक बागमती के पूर्वी तट से फोटो लेते देखे जाते हैं. बागमती के पवित्र जल से भगवान पशुपति का अभिषेक किया जाता है. बागमती के दाहिनी तट पर ही भगवान् पशुपति ज्योतिर्लिंग के गर्भ गृह के सामने ही, मरणोपरांत, हिंदुओं के शव को अग्नि में प्रज्ज्वलित किया जाता है.

 

नेपालवासी मरने से पूर्व अपने परिजनों को, अंतिम सांस से कुछ समय पहले, यहां ले आते हैं, जिससे पवित्र नदी के स्नान और गोदान के बाद ही मृत्यु प्राप्त हो, ताकि मोक्ष प्राप्त हो सके. मृत व्यक्ति के पैर बागमती में लटका देते हैं. कभी-कभी कोई मृतक इस प्रक्रिया से पुनर्जीवित भी हो जाता है, जैसा की लोगों में विश्वास है. आम तौर पर ब्राह्मण ही शव को स्नान कराते हैं और मस्तक पर पशुपति का चंदन लगाते हैं. तत्पश्चात् कफ़न में लपेट कर दाह कर्म संपादित कराते हैं.

 

भारत-नेपाल के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान की परंपरा, जो आदि काल से थी, वह आज भी विराजमान है. आज भी हर धर्मपरायण नेपाली नर-नारी श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन और गंगा स्नान तथा चारों धाम यात्रा को जीवन की परम सार्थकता मानते हैं, तो भारत के तीर्थ स्थलों–बद्रीनाथ, केदारनाथ, रामेश्वरम, द्वारिकाधीश, जगन्नाथपुरी, गंगा सागर आदि यात्रा करने वाले भारतीय बिना पशुपति दर्शन के अपने आपको पूर्ण नहीं मानते.

 

कैसे पुहंचेंगे काठामांडु-

भारत के बिहार, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों से सड़क मार्ग, गोरखपुर तथा रक्सोल आदि से बस द्वारा नेपाल की राजधानी काडमांडू पहुंच सकते हैं. भारत के दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, पटना, मुंबई आदि स्थानों से वायु मार्ग से भी जाने की व्यवस्था है. काठमांडू में यात्रियों के ठहरने के लिए साधारण से महंगे होटल उपलब्ध हैं. भारतीय मुद्रा में लगभग 25 रु. से 1000 रु. तक के होटल यहां उलबल्ध हैं.

 

फाल्गुनी कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को, शिव-पर्वती के विवाहोत्सव के उपलक्ष्य में, शिव रात्रि को पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है. इस अवसर पर यहां भारत और अन्य राष्ट्र के लोग दर्शन-पूजन के लिए आते हैं. शिव रात्रि के उपलक्ष्य में यहां विराट मेला लगता है. यहां मंदिर में दर्शन करने वाले दर्शनार्थियों का तांता त्रयोदशी की अर्द्ध रात्रि से ही प्रारंभ हो जाता है. यह समय पशुपति दर्शन के लिए उपयुक्त है. यहां के लोगों का विश्वास है कि पशुपति ही नेपाल की रक्षा करते हैं. पशुपति नाथ के दर्शन से आरोग्य, सुख, समृद्धि, शांति, संतोष प्राप्त होते हैं तथा मनुष्य का अगला जन्म पशु योनि में नहीं होता, ऐसा लोगों का विश्वास है.

 

नेपाल दौरे पर पीएम मोदी का पहला दिन ऐतिहासिक रहा

नेपाल की संविधान सभा में बोलते हुए मोदी ने कहा कि नेपाल और भारत एक दूसरे का अंधेरा दूर कर सकते हैं. नेपाल अगर भारत को बिजली देगा तो वो खुद भी समृद्ध बनेगा. मोदी ने नेपाल में एक और महत्वपूर्ण बात कही कि भारत नेपाल से मुफ्त में बिजली और पानी नहीं लेना चाहता, दोनों देशों के विकास के लिए मोदी ने कई नए विचार पेश किए.

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं जिन्होंने नेपाल की संसद को संबोधित किया है. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि नेपाल को विकास के लिए HIT फॉर्मूला अपनाना चाहिए.

 

नेपाली संसद में संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत नेपाल के बीच फोन कॉल रेट कम होना चाहिए..ताकि लोग आराम से बात कर सकें मोदी ने नेपाली संसद में बोलते हुए कहा कि नेपाल में भी मिट्टी हेल्थ कार्ड हो ताकि खेती में उत्पादन को बढ़ाया जा सके.

 

नेपाल की संसद में मोदी के भाषण से विपक्ष के नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड भी खुश हुए, एबीपी न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि बिजली पर दोनों देशों के बीच समझौता जरूर होगा, अभी तक प्रचंड इस समझौते का खुलकर विरोध करते रहे हैं.

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