Exclusive: मोदी की 24 घंटे में दिनचर्या क्या है?

By: | Last Updated: Monday, 5 May 2014 3:06 PM
PM Modi Routine

अहमदाबाद. बीजेपी के पीएम कैंडिटेट के तौर पर सात महीने के अंदर चार सौ से भी अधिक रैलियां, पचीस से भी अधिक राज्यों का दौरा, तीन लाख किलोमीटर से भी अधिक की यात्रा, चाय पर चर्चा से लेकर थ्रीडी सभा जैसे नये प्रयोग, चुनावी एजेंडा सेट करते हुए विरोधियों पर हमले बोलना और इन सबके बीच गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी प्रशासनिक भूमिका का निर्वाह. कैसे कर पाते हैं नरेंद्र मोदी ये सब.

 

यही नहीं, दर्जनों मीडिया इंटरव्यू, वीआईपी मेहमानों से मुलाकात और देश-दुनिया की नब्ज हासिल करने के लिए खास लोगों और अपनी कोर टीम से बातचीत. ये न सिर्फ मोदी समर्थकों, बल्कि मोदी के विरोधियों के लिए भी एक पहेली है, क्योंकि भारतीय राजनीति में न तो इतनी कम अवधि में किसी ने इतनी चुनावी सभाएं की हैं और न ही इतने सारे मोर्चों पर एक साथ कोई सक्रिय रहा है. एबीपी न्यूज़ खास पेशकश में जानें आखिर एक दिन के चौबीस घंटे का मोदी कैसे करते हैं इस्तेमाल और क्या है उनकी उस शक्ति का रहस्य, जिसके आधार पर चला रहे हैं वो मैराथन चुनावी कैंपेन.

 

मोदी की मानसिक ताकत का सबसे बड़ा रहस्य है योग और ध्यान. मोदी भले ही तीन घंटे के लिए सोएं, लेकिन सुबह-सुबह आधे घंटे तक योग, प्राणायाम और ध्यान में वो कोई समझौता नहीं करते. देश-विदेश में सबसे अधिक, सियासी या सरकारी मकसद से यात्रा करने वाले मोदी 365 दिनों में कम से कम तीन सौ दिन तो अपनी इस रुटीन को फॉलो करते ही हैं. अगर समय ज्यादा रहा, तो इस तरह की कुछ कसरतें भीं. दरअसल अपनी हर रैली में तरोताजा दिखने वाले मोदी को फिट रखने में सुबह के इस वक्त का खासा महत्व है, जब मोदी पूरी तरह से अपने शरीर पर ध्यान देते हैं. मोदी ये सारा कुछ गांधीनगर के अपने आधिकारिक आवास, जो मिनिस्टिरियल कॉम्पलेक्स में बंगला नंबर 26 के तौर पर जाना जाता है, के अंदर करते हैं. कभी लॉन में बैठकर, तो कभी कमरे के अंदर दरी डालकर.

 

मोदी के दिन की शुरुआत अमूमन पांच बजे सुबह हो जाती है, रात में भले ही कितनी देर से क्यों ने सोए हों. चाय के कप के साथ किताबें पलटना मोदी को पसंद है, लेकिन उनकी एक आदत और है, जो ज्यादातर लोगों के ध्यान में नहीं. मोदी के क्लोज सर्किल और कोर टीम में कई लोग ऐसे हैं, जिनके ईमेल बॉक्स में सुबह पांच बजे भी मोदी का जवाब गिर जाता है. यानी बिस्तर से उठने के साथ ही एक बार अपने ईमेल एकाउंट पर निगाह मार लेते हैं मोदी और अगर अत्यंत आवश्यक हुआ, तो लगे हाथों उसका जवाब भी दे देते हैं. हालांकि रुटीन में योग-ध्यान, प्राणायम और कसरत करने के बाद मोदी हल्का नाश्ता करते हैं. सामान्य तौर पर पोहा, खाखरा या भाखरी जैसी गुजराती बानगियां.

 

नाश्ता निबटाने के बाद मोदी के कामकाज में गति आ जाती है. सबसे पहले उनकी निगाह जाती है देश-दुनिया की हलचल पर. न सिर्फ वो अपने लैपटॉप, आईपैड या डेस्कटॉप पर देश-दुनिया की खबरें देखते हैं, बल्कि उनकी कोर टीम उनकी टेबल पर सुबह-सुबह पहुंचा देती है तमाम अखबारों में छपी खबरें, जिसमें उनकी रुचि हो सकती है. रिपोर्ट की शक्ल में पेश किये गये कागजों में अखबारों मे छपी सकारात्मक और नकारात्मक दोनों किस्म की रिपोर्ट होती हैं, जिनका संबंध उनसे होता है. इन पर बारीक नजर डालते हैं मोदी. जानकार बताते हैं कि ऐसी रिपोर्ट अमूमन उनके पास टाइम्स रोमन फौंट की 18 साइज में भेजी जाती है, ताकि पढ़ने में न तो कोई असुविधा हो और न ही कोई तथ्य उनके ध्यान से निकल जाए. सामान्य तौर पर सुबह के सात बजे तक मोदी देश-दुनिया का हाल जानकर निबट चुके होते हैं.

 

देश-दुनिया का हाल जानने के बाद मोदी दिन के लिए अपना प्लान ऑफ एक्शन सामने रखना शुरु करते हैं और इसके लिए पहुंचते हैं वो बंगला नंबर एक में, जो उनके आवास बंगला नंबर 26 से जुड़ा है. बंगला नंबर एक उनका आवासीय कार्यालय है. यहां आकर वो करते हैं कोर टीम के सदस्यों से बातचीत. एक के बाद एक सभी लोगों से फोन पर बातचीत होती है, किससे किस किस्म का काम लेना है ये निर्देश देते हैं वो. चुनावी सीजन में कैंपेन से जुड़े लोगों से बातचीत ही प्राथमिकता पर रहती है. लेकिन सामान्य दिनों में गुजरात के अलग-अलग हिस्सों मे जरुरी मसलों पर लोगों से फीडबैक लेना नहीं भूलते मोदी.

 

जरुरी फोन कॉल्स के बाद मोदी के मिलने-जुलने का सिलसिला शुरु हो जाता है. चाहे उनकी चुनाव स्पेशल टीम के सदस्यों से मिलना-जुलना हो या फिर गुजरात सरकार के कामकाज के तहत जरुरी आधिकारिक बैठकें, मोदी इसे पूरा करते हैं. सरकारी फाइलों को देखना और उस पर आवश्यक निर्देश देना भी सुबह के इसी वक्त होता है. निजी स्टाफ पहले से ही मौजूद होता है.

 

लेकिन सुबह सात बजे के बाद की इस रुटीन में कई बार फेर-बदल भी होता है इस चुनावी सीजन में. पिछले महीने कुछ ऐसे मौके भी आए, जब सुबह-सुबह ही उन्होंने अपना इंटरव्यू रिकॉर्ड कराया. मसलन न्यूज़ एजेंसी एएनआई या फिर सीएनबीसी आवाज चैनल को दिया इंटरव्यू मोदी ने सुबह में ही रिकॉर्ड कराया था.

 

इस चुनावी सीजन में सबसे बड़ा सवाल ये है कि मोदी आखिर अपनी रैलियां करने के लिए घर से कितने बजे निकलते हैं. आम तौर पर वो नौ-साढ़े नौ बजे गांधीनगर का अपना आधिकारिक आवास छोड़ देते हैं. लेकिन पिछले महीनों में जब सुदूर नॉर्थ ईस्ट या फिर दक्षिण भारत में सभाएं थीं, तो सुबह के सात बजे ही घर से निकल पड़े थे मोदी. गांधीनगर के मुख्यमंत्री आवास से अहमदाबाद एयरपोर्ट तक पहुंचने में मोदी को पंद्रह से बीस मिनट का समय लगता है. जेड प्लस सुरक्षा और एनएसजी कमांडो से लैस ये काफिला मोदी को एयरपोर्ट पहुंचाकर वापस लौट जाता है.

 

अहमदाबाद के सरदार पटेल हवाई अड्डे से अमूमन रोजाना उड़ान भरते हैं मोदी. पिछले तीन महीने से उनकी यही रुटीन है. अदाणी समूह की कंपनी कर्णावती एविएशन के चार्टर्ड जेट विमान से अमूमन हवाई यात्रा करते हैं मोदी . विपक्षी दल अदाणी समूह के विमान के इस्तेमाल को लेकर उन पर हमला बोलते रहते हैं, लेकिन खुद अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने इस बात का खुलासा कर डाला है कि बकायदा भुगतान लिया जाता है, न कि मुफ्त में दिया जाता है मोदी को विमान.

 

जेट विमान में मोदी के साथ होते हैं उनके पीए, जिनके पास होती हैं फाइलें. ये फाइलें चुनाव से लेकर सरकारी कामकाज तक की होती हैं. जिन सरकारी फाइलों को मोदी घर पर निबटा नहीं पाते हैं, उनको हवाई जहाज के अंदर निबटाते हैं मोदी. फाइलों पर साफ निर्देश डालते रहते हैं कि किस में क्या किया जाए. यही नहीं, जिन लोगों ने उनको चिट्ठियां भेजी होती हैं, उसका क्या जवाब भेजा जाए, इसका भी निर्देश रहता है उसमें. मुख्यमंत्री के नाते मोदी ये सारा निर्देश लाल कलम से लिखते रहते हैं और निबटी हुई फाइलों को पकड़ाते जाते हैं अपने पीए को.

 

चूंकि ये दौर चुनावी है, इसलिए मोदी दिन के दौरान जिन चार-पांच जगहों पर रैलियां होनी हैं, उनसे संबंधित मुद्दों और सियासी-जातिगत समीकरण पर निगाह डाल लेते हैं. ये जानकारी पार्टी के स्थानीय नेताओं से लेकर कोर रिसर्च टीम की तरफ से उन्हें पहले ही मुहैया करा दी जाती है. 2009 के लोकसभा चुनावों के दौरान मोदी ने हवाई यात्रा के दौरान भी कुछ इंटरव्यू दिये थे.

 

लेकिन 2014 के लोकसभा चुनावों में हवाई इंटरव्यू का ये सिलसिला बंद है. आम तौर पर नेता हवाई यात्रा के दौरान थोड़ी नींद ले लेते हैं, लेकिन मोदी की रुटीन में ये नहीं के बराबर है. कहां, किस रैली में कौन सा नया मुद्दा लेना है, वो उनके दिमाग में कौंधते रहता है. चूंकि हवाई जहाज में फोन का कोई चक्कर नहीं होता, इसलिए पूरी एकाग्रता से वो इस पहलू पर ध्यान दे पाते हैं. मोदी को हवाई यात्रा के दौरान गपशप पसंद नहीं, वैसे भी आम वीआईपी नेताओं से उलट उनके विमान में निजी सहायक के अलावा और कोई यात्रा नहीं कर रहा होता है. चुनावी सीजन में सरकारी पीआरओ भी नहीं होते हैं उनके साथ.

 

पहली रैली के नजदीक जो भी हवाई अड्डा मुहैया होता है, वहां उतरता है मोदी का विमान. वहां से वो हेलिकॉप्टर के जरिये रैली स्थल के बगल में बनाये गये हैलिपैड पर पहुंचते हैं. हैलिपैड पर पहुंचने के साथ ही मोदी बिना समय गंवाये गाड़ी में बैठ जाते हैं और फटाफट सीढ़ीयां फलांगते हुए पहुंच जाते हैं मंच पर.

 

चूंकि मोदी का समय कीमती है और वो न सिर्फ बीजेपी बल्कि एनडीए के भी सबसे बड़े कैंपेनर हैं, इसलिए उनके मंच पर पहुंचने के पहले ही स्थानीय नेताओं या फिर राज्य स्तर के नेताओं के भाषण पूरे कर दिये जाते हैं, ताकि मोदी के आने के बाद समय बाकी नेताओं के भाषण में न बिगड़े. मंच पर पहुंचते ही कुछ प्रमुख नेताओं से फूल, माला या गुलदस्ता हासिल करने के बाद मोदी अपने भाषण के मूड में आ जाते हैं. कई बार स्वागत भाषण की औपचारिकता खत्म होने के पहले ही मोदी थाम लेते हैं माइक और शुरु हो जाता है उनका भाषण.

 

भाषण के दौरान मोदी न सिर्फ महत्वपूर्ण स्थानीय मुद्दों को उठाते हैं, बल्कि कोशिश करते हैं कि स्थानीय भाषा की कुछ लाइनें भी अपने भाषण के शुरुआत में बोलें, ताकि वहां मौजूद जनता से तत्काल एक सकारात्मक रिश्ता बन जाए. उसके बाद अमूमन राष्ट्रीय मुद्दों पर आ जाते हैं मोदी और फिर एक के बाद एक करने लगते हैं विपक्षी पार्टियों पर प्रहार.

 

 

मोदी के भाषण के दौरान हर पंद्रह-बीस मिनट के अंतराल पर उनके पास पहुंचाया जाता है पानी का एक ग्लास. सामने बैठे लोगों को ये लगता है कि मोदी गर्मी की वजह से या फिर उंची पिच पर बोलने की वजह से सांस को नियंत्रित करने के लिए ठंडा पानी पी रहे हैं. लेकिन मसला कुछ और होता है. दरअसल मोदी को दिया जाता है गरम पानी का ग्लास. गरम पानी पीना मोदी की व्यवहारिक मजबूरी है, रोजाना आधी दर्जन सभाएं कर रहे हैं, पिछले तीन महीने से तो ये स्थापित रुटीन है. ऐसे में गला न बिगड़ जाए, इसके लिए डॉक्टर की सलाह पर उन्हें हर पंद्रह-बीस मिनट के अंतराल पर पीना पड़ता है गरम पानी. मोदी इस बात का खतरा नहीं उठा सकते कि गरम पानी न पीने की एवज में उनका गला खराब हो जाए और वो रैलियां न कर पाएं. अगर ऐसा हो जाए, तो फिर मोदी और पूरी बीजेपी के कैंपेन को कितना बड़ा झटका लग सकता है इसका भली-भांति अंदाज है मोदी को.

 

एक जगह की सभा खत्म करने के बाद मोदी तत्काल दूसरी सभा के लिए रवाना हो जाते हैं. हेलिकॉप्टर में बैठने के पहले उनके कोर चुनावी टीम से रियल टाइम फीडबैक आ जाता है कि आखिर उनके भाषण के किस पहलू का कैसा संभावित प्रभाव पड़ा या फिर आगे की सभाओं में किस पहलू को छुआ जाए. कोर टीम की तरफ से मोदी को ये भी बता दिया जाता है कि उनके सियासी विरोधियों ने थोड़ी देर पहले उन पर क्या हमला बोला.

 

ऐसी व्यवस्था की वजह से मोदी महज कुछ घंटो के अंतराल पर अपनी अगली सभा में अपने सियासी विरोधियों को जवाब दे देते हैं. ऐसा तब देखने को मिला, जब सोनिया गांधी ने गुजरात के विकास के आंकड़े को लेकर उन पर हमला बोला या फिर राहुल गांधी ने मोदी पर गुस्से की राजनीति करने का आरोप लगाया. मोदी ने फटाफट इस मामले में कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं का इतिहास गिना डाला.

 

 

यूं तो मोदी जब गांधीनगर में अपने कार्यालय या घर पर बैठे होते हैं, तो एकांत में डेढ़ से दो बजे के बीच लंच करते हैं. भोजन अकेले में करना उन्हें पहले से पसंद है. लेकिन चूंकि समय चुनावी है, इसलिए मोदी या तो विमान या फिर हेलिकॉप्टर में ही हल्का लंच कर लेते हैं. भोजन भी अमूमन घर से लाया गया ही होता है, बाहर का खाना खाने से परहेज बरतने की कोशिश करते हैं मोदी. भोजन भी हल्का ही, रोटी-चावल-दाल-सब्जी की जगह कई बार सिर्फ मूंग वाली दाल पी कर काम चला लेते हैं तो मोदी. वैसे भी उन्हें करीब से जानने वाले बताते हैं कि खाने में कोई खास च्वायस नहीं रही है उनकी, जो भी मिल जाता है, बिना ज्यादा तेल-मसाले का, वो खा लेते हैं मोदी.

 

मोदी की रैलियों का सिलसिला दोपहर ग्यारह बजे से शुरु होकर शाम तक चलता है. रैली खत्म करने के बाद एक बार फिर से चार्टर्ड विमान में सवार होते हैं. इस बार उनके विमान की वापसी यात्रा शुरु होती है. विमान में एक बार फिर वही से रुटीन, फाइलों को निबटाना, नियमित अंतराल पर गरम पानी पीना और फिर कभी-कभार गरम पानी से उकता कर अदरख वाली चाय पी लेना.

 

कई बार मोदी एयरपोर्ट पर मौजूद हैंगर वाली बिल्डिंग के ही अतिथि कक्ष में कपड़े भी बदल लेते हैं. पूरे दिन गर्मी में सभाएं संबोधित करने के बाद उनका कुर्ता चूर-चूर हो जाता है, पसीने से भर जाता है. ऐसे में वापसी के बाद अगर सीधे घर नहीं जाना है, कोई और बैठक कही और है, तो मोदी एयरपोर्ट पर ही अपने को तरोताजा कर लेते हैं. एयरपोर्ट पर रहने के दौरान ही एक बार फिर से उनके फोन का सिलसिला शुरु हो जाता है. विमान में रहने के दौरान क्या घटा, क्या सियासी हमले हुए या फिर आगे क्या करना है, इस पर कोर टीम के साथ बातचीत. मोदी सार्वजनिक तौर पर खुद मोबाइल रखते हुए नहीं दिखाई देते, ऐसे में बातचीत अमूमन वो अपने पीए के मोबाइल फोन पर ही करते हैं.

 

गांधीनगर के बाहरी हिस्से में गुजरात बीजेपी का नया बना हुआ मुख्यालय कमलम. देश के जिन राज्यों में अब भी चुनाव प्रचार चल रहा है, वहां रैलियां करने के बाद शाम के वक्त मोदी कमलम ही पहुंचते हैं. दरअसल बीजेपी के प्रदेश मुख्यालय में ही वो खास सेटअप लगाया गया है, जहां स्टूडियो में बैठकर या खड़े होकर मोदी करीब पैंतालीस मिनट लंबा भाषण देते हैं, जो  थ्रीडी होलोग्राम तकनीक के जरिये एक साथ सौ से डेढ़ सौ जगहों तक पहुंचता है, थ्रीडी सभाओं में बैठे हुए लोग मोदी को अपने सामने खड़े होकर भाषण देने का अहसास करते हैं.

 

 

 

मोदी आजकल रोजाना ही थ्रीडी सभा कर देश में सैकड़ों जगहों पर हजारों लोगों से संवाद कायम कर रहे हैं. इन सभाओं के बाद मोदी या तो कमलम में ही पार्टी नेताओं के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बैठक कर लेते हैं या फिर मीडिया को इंटरव्यू. पिछले कुछ दिनों में बीजेपी मुख्यालय में ही बैठकर मोदी ने कई इंटरव्यू दिये हैं.

 

मोदी के इंटरव्यू का सिलसिला उनके आधिकारिक आवास पर भी चलता है. एबीपी न्यूज़ के कार्यक्रम घोषणापत्र की रिकॉर्डिंग मोदी के आवास पर ही हुई थी. हालांकि जिस वक्त इस कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग थी, उससे ठीक पहले राज्य के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद और गांधीनगर में आया था चक्रवात. ऐसे में राहत उपाय करने के लिए मोदी ने राज्य के मुख्य सचिव के साथ बैठक भी कर ली थी उसी वक्त.

 

मोदी अमूमन अपने आधिकारिक आवास पर पहुंचने के बाद या तो जिनसे मिलना तय होता है, उनसे मिलते हैं या फिर दिन के दौरान आई फाइलों को निबटाने में लग जाते हैं. यही नहीं, जिन चिट्ठियों के जवाब में चिट्ठियां टाइप हो चुकी होती हैं, उस पर हस्ताक्षर भी करने में लग जाते हैं. इनसे निबटने के बाद एक बार फिर अपने निजी स्टाफ और कोर टीम के सदस्यों के साथ होती है उनकी बातचीत और तय होती है अगले दिन की रणनीति. इससे निबटने के बाद मोदी एक बार फिर से फोन का सिलसिला शुरु करते हैं. दिन मे जितनी जगहों से संदेशा आया होता है और खुद जिनसे बात करने की जरुरत वो महसूस करते हैं, उनसे बातचीत करने में लग जाते हैं.

 

आम तौर पर नौ-साढ़े नौ या फिर कई बार रात के ग्यारह बजे डिनर करते हैं मोदी. चुनावी सीजन में मोदी अब डिनर भी स्किप करने लगे हैं, उसकी जगह एक बार फिर से गर्म पानी ही पीते रहते हैं. नवरात्र के वक्त तक वो पूरी तरह से उपवास पर रहते हैं, सिर्फ नींबू पानी पर गुजारा करते हैं.

 

ये बात भी कम ही लोगों को पता है कि उनका चार कमरों का जो आधिकारिक आवास है, उसमें अकेले रहते हैं मोदी और करते हैं सिर्फ एक कमरे का इस्तेमाल. उसी कमरे में मोदी की किताबें भी हैं, उनका पूजा घर भी और सोने का बिस्तर भी. आवास के अंदर के उस कमरे में मोदी होते हैं और आवास के बाहर चारों तरफ सुरक्षा का कड़ा पहरा. मोदी कब सोते हैं, इसका पता किसी को नहीं. लेकिन इस चुनावी सीजन में कई बार वो रात के साढ़े बारह या डेढ़ बजे तक लोगों से फोन पर बातचीत करते हैं या फिर देते हैं अपनी कोर टीम के ईमेल का जवाब. एबीपी न्यूज़ के कार्यक्रम घोषणापत्र में जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उनका कहना था कि तीन-साढ़े तीन घंटे सोकर भी चल जाता है उनका काम और नहीं लगती उन्हें थकान.

 

सवाल ये उठता है कि चौबीस घंटे में से बीस से इक्कीस घंटे तक कैसे कर पाते हैं मोदी काम, वो भी देश के अलग-अलग हिस्सों में रैलियां करने के साथ. उनकी सियासत और जिंदगी को लंबे समय से देखने वालों के इस मसले पर हैं अलग-अलग जवाब.

 

बीजेपी ही नहीं एनडीए के भी प्रमुख कैंपेनर और प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर कम से दस मई तक ऐसे ही रहेगी मोदी की दिनचर्या, उसके बाद भी बैठकों का सिलसिला जारी रह सकता है, सरकारी कामकाज भी. सोलह मई को मतगणना है, उसके बाद ही पता चलेगा कि मोदी की दिनचर्या 7 आरसीआर के इर्दगिर्द रहेगी या फिर गांधीनगर के मिनिस्टिरियल कॉम्पलेक्स के बंगला नंबर 26 में, जहां फिलहाल वो रहते हैं. फिलहाल तो मोदी के लिए पसीना बहाने का वक्त है और वो उसमें लगे हैं पूरी ताकत से.

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