सेक्युलरिज़्म और सोशलिज़्म शब्द पर संसद में संग्राम

By: | Last Updated: Friday, 27 November 2015 1:13 AM
PM Modi to respond on the discussion on constituion

नई दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र में संविधान पर चर्चा के दौरान नई बहस शुरू हो गई. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को संविधान निर्माता बी.आर. आंबेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश को एकता के सूत्र में पिरोया. इसके बाद उन्होंने कई शब्दों पर ऐतराज जताया. इस बीच कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने भी संविधान पर मोदी सरकार को घेरा.

 

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इससे पहले डॉक्टर बी आर आंबेडकर की देशभर में मनाई जा रही 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में संविधान के प्रति प्रतिबद्धताओं पर चर्चा के लिए संसद में दो दिवसीय विशेष सत्र आयोजित हुआ. इसके दौरान गृह मंत्री ने लोकसभा में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को भी श्रद्धांजलि दी.

इस दौरान लोकसभा में राजनाथ सिंह ने कहा कि आज की राजनीति में सबसे ज्यादा दुरुपयोग सेक्युलर शब्द का हो रहा है. राजनाथ ने कहा कि बाबा साहब आंबेडकर मानते थे कि हमारे देश की मूल भावना सोशलिस्ट और सेक्युलर है, इसलिए इसे प्रस्तावना में नहीं जोड़ा गया.

 

राजनाथ का कहना था कि संविधान के प्रस्तावना में 1976 में 42वें संसोधन में सोशलिस्ट और सेक्युलर जोड़ा गया. राजनाथ का कहना है कि सेक्युलर शब्द का हिन्दी अनुवाद ग़लत किया जा रहा है. राजनाथ सिंह के मुताबिक सेक्युलर शब्द का सही हिंदी अनुवाद धर्मनिरपेक्ष नहीं बल्कि पंथनिरपेक्ष है.

 

कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा कि बाबा साहब आंबेडकर सोशलिस्ट और सेक्युलर शब्द संविधान की प्रस्तावना में जोड़ना चाहते थे, लेकिन उस समय कुछ लोगों ने इसे जोड़ने नहीं दिया. मल्लिकार्जुन का इशारा आरएसएस की ओर बताया जा रहा है.

 

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सरदार ने ‘एक भारत’ दिया,

 

इसके अलावा राजनाथ ने कहा, “जब हमारा देश स्वतंत्र हुआ, यह विभिन्न रियासतों में बंटा था. वे चकित थे कि क्या देश फिर कभी एकजुट हो पाएगा. सरदार वल्लभभाई पटेल ने हमें ‘एक भारत’ दिया, लेकिन उस समय हमें एक ऐसी सामग्री की आवश्यकता थी, जो देश को एकजुट रख सके.”

 

उन्होंने कहा, “देश को एकजुट रखने वाला वह साधन संविधान था. इसने महत्वपूर्ण भू्मिका निभाई. हम जानते हैं कि इस दौरान उन्होंने कितनी समस्याओं का सामना किया, जिनसे उन्हें जरूर चोट पहुंची होगी, लेकिन उन्होंने अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखा.”

 

उन्होंने अभिनेता आमिर खान का नाम लिए बगैर असहिष्णुता पर की गई उनकी टिप्पणी के संदर्भ में कहा, “लेकिन उन्होंने (आंबेडकर) कभी नहीं कहा कि उन्हें देश में भेदभाव का सामना करना पड़ा है और इसलिए वह कहीं और जाकर बस जाएंगे.”

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राजनाथ के ऐसा कहने पर कई कांग्रेस सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई. हालांकि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उन्हें अपनी बात जारी रखने की अनुमति देते हुए कहा कि इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है.

 

देश के गृह मंत्री ने यह भी कहा कि आंबेडकर को सिर्फ एक दलित नेता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उन्हें सिर्फ इस नजरिए से देखना ओछी मानसिकता को दर्शाता है.

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