सवालों के जवाब क्यों नहीं देते पीएम मोदी?

By: | Last Updated: Tuesday, 21 July 2015 1:11 PM
pm narendra modi

नई दिल्ली: मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मीडिया के सामने आए. पिछले महीने राजस्थान से लेकर मध्य प्रदेश तक और भ्रष्टाचार से लेकर लैंड बिल तक तमाम मुद्दों पर मीडिया ने सवाल पूछने शुरू किए. लेकिन हैरानी की बात ये है कि पीएम ने सवाल सुने जरूर लेकिन जवाब दिए बिना चले गए. आखिर सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं मोदी?

 

भ्रष्टाचार, जमीन बिल पर पत्रकारों के सवालों पर मोदी ने साधा मौन 

एक के बाद एक कई सवाल हुए लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने किसी सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं समझा. सुबह करीब 10.30 बजे का वक्त था. लाइन से माइक लगे हुए थे और दूर गाड़ियों का काफिला आ रहा था. मोदी अपनी काले रंग की गाड़ी से उतरे और संसदीय कार्य मंत्री वैंकेया नायडू, जितेंद्र सिंह, राजीव प्रताप रूडी और मुख्तार अब्बास नकवी के साथ 27 सेकेंड के अंदर दूर लगे माइक के पास पहुंच गए.

23 सेकेंड तक सवाल होते रहे लेकिन मोदी इन तमाम सवालों पर या तो चुप रहे या फिर मुस्कुरा दिए. सत्र शुरू होने से पहले पीएम मीडिया के सामने आए थे तय था कि मोदी माइक के पास जा रहे हैं तो सवाल जरूर होंगे लेकिन इन सवालों पर मोदी की चुप्पी की वजह समझ नहीं आई. मोदी की चुप्पी से ज्यादा चुभ रही थी पीछे खड़े राजीव प्रताप रूडी और मुख्तार अब्बास नकवी की हंसी मानो मीडिया सवाल ना पूछ रहा हो कोई चुटकुला सुनाया जा रहा हो.

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सवाल: सर, करप्शन की बात पर आपको क्या कहना है ?

मोदी चुप्प रहते हैं.

सवाल: सर, आपको सत्र चलने की उम्मीद है क्या ?

मोदी खामोश रहते हैं.

सवाल: सर, कांग्रेस ने स्थगन प्रस्ताव रखा है. क्या आप बहस के लिए तैयार हैं?

 

मोदी कुछ नहीं बोलते. ( राजीव प्रताप रूडी और मुख्तार अब्बास नकवी हंसने लगते हैं. न जाने क्यों?!)

सवाल: सर, विपक्ष लगातार कह रहा है कि प्रधानमंत्री चुप्पी कब तोड़ेंगे?

मोदी मुंह नहीं खोलते. ( दोनों मंत्रियों का हंसी तेज हो जाती है!)

सवाल: सर, इस बार क्या उम्मीद करते हैं विपक्ष को क्या जवाब देंगे?

मोदी इधर-उधर देखते हैं लेकिन बोलते नहीं हैं.

सवाल: सर, लैंड बिल पर क्या?

दोनों मंत्री फिर हंसते हैं. मोदी पलटते हैं. मीडिया को पीठ दिखा कर चले जाते हैं.

 

पांच सवालों के बाद मोदी वो कहा जो वो सोचकर आए थे और एक मिनट 53 सेकेंड तक अपनी बात कहते रहे. पीएम ने कहा कि आज वर्षा सत्र का आरम्भ हो रहा है 13 अगस्त तक ये सत्र चले ऐसा तय हुआ है. कल बहुत ही अच्छे माहौल में सर्वदलीय बैठक हुई है और देश को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय सब मिलकर करें ये प्रयास हमारा निरंतर रहा है आगे भी रहेगा.

 

मोदी की बात खत्म होते ही उनसे छठा और आखिरी सवाल लैंड बिल पर हुआ लेकिन एक बार फिर मोदी चुप रहे एक बार फिर दोनों मंत्री हंसे और प्रधानमंत्री चुप्पी की चादर ओढ़कर वहां से चले गए.

 

ऐसा नहीं था कि पीएम को सवाल सुनाई नहीं दे रहे थे सवाल जिस दिशा से पूछा जा रहा था मोदी उस तरफ रुख कर रहे थे सवाल सुनकर ना जाने क्यों उनके मंत्री हंस रहे थे जबकि सवाल वो ही थे जो देश भर के लोगों के मन में हैं. एक भी सवाल ऐसा नहीं था जिसकी चर्चा इन दिनों ना हो रही हो.

 

सबसे बड़ा सवाल ये है कि दूसरों के मौन पर सवाल उठाने वाले मोदी सवालों से बचने क्यों लगे हैं? क्या मोदी के पास किसी सवाल का जवाब नहीं था लेकिन जिस तरीके से मोदी ने मीडिया के सवालों से किनारा किया उससे तो यही लग रहा था कि मानो पीएम से कोई बचकानी बात पूछी जा रही थी जिसका जवाब देना उन्होंने जरूरी नहीं समझा.

 

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर चुप रहने के आरोप लगते थे. तब मनमोहन सिंह ने संसद के अंदर एक शेर पढ़ा था. मोदी को देश की सत्ता संभाले हुए अभी एक साल ही हुआ है लेकिन सत्ता कितना बदल देती है पहले दस साल मौन रहे मनमोहन सिंह और मौन नजर आ रहे हैं मोदी.

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