आखिर इस दर्द की दवा क्या है?

By: | Last Updated: Wednesday, 26 November 2014 11:21 AM
pm narendra modi

नई दिल्ली : आज काठमांडू में अजीब नजारा दिखा . भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ एक साथ, एक मंच पर थे. वह भी थोड़ी देर के लिए नहीं, करीब 2 घंटे तक दोनों साथ रहे . लेकिन इतनी देर में दोनों के बीच ना दुआ सलाम, ना नजरों से कोई गिला शिकवा .

 

26/11 हमला कभी न खत्म होने वाला दर्द: मोदी  

बाद में पीएम मोदी ने 26/11 के दर्द का जिक्र किया तो नवाज शरीफ ने कहा कि आपस में भरोसा बढ़ाना बहुत जरुरी है. अब सवाल उठता है कि आखिर 26/11 के दर्द की दवा क्या है? और यहां ये भी सवाल है कि आखिर भारत-पाकिस्तान के बीच भरोसा कैसे बढ़ेगा ?

 

सार्क सम्मेलन में मोदी-नवाज ने एक दूसरे को देखा तक नहीं 

नवाज शरीफ पहली बार पास से गुजरे तो मोदी के हाथ में पत्रिका थी. नवाज शरीफ दूसरी बार गुजरे तो मोदी की मुट्ठी बंधी हुई. और दो घंटे तक एक मंच पर, एक साथ बैठने के बावजूद दोनों के बीच कोई आई कॉन्टेंक्ट नहीं. नजरों से कोई गिला शिकवा तक नहीं.

 

पीएम मोदी के इस अंदाज को देखकर लग रहा है मानो वह नवाज शरीफ से कह रहे हों … तुम्हें आतंकवाद से कब फुर्सत, हम अपने काम से कब खाली?

चलो बहुत हो चुका अपना मिलना मिलाना, ना तुम खाली, ना हम खाली.

 

वरिष्ठ पत्रकार दिबांग बताते हैं कि हाथ बंधे हुए थे, मानो वो किसी कीमत पर हाथ तक मिलाने के लिए तैयार नहीं .

 

बेरूखी का अजीब नजारा दिखा सार्क के सम्मेलन में .जब नवाज शरीफ के सम्मान में तालियां गुंज रही थी तब पीएम मोदी अपने हाथों में एक पत्रिका को जकड़े हुए थे. जब नवाज शरीफ मंच से उतर रहे थे तब पीएम मोदी नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला से गुफ्तगू कर रहे थे .

 

नवाज शरीफ मंच से उतरते समय हल्का सा मुडे कि शायद चलते-चलते कोई दुआ सलाम हो लेकिन मोदी का चेहरा पहले की तरह तना रहा. नवाज शरीफ हवा में हाथ हिलाते हुए मंच से उतर गये .

 

नवाज शरीफ ने आपस में भरोसा बढ़ाने की बात कही, जवाब में पीएम मोदी ने कह दिया कि 26/11 का जख्म सीने में समेट कर कैसे किसी पर भरोसा करें ?

 

ये सच है कि 26/11 का जख्म हर भारतीय के सीने में हरा है. आज भी तबाही का वह मंजर याद है जो छह साल पहले मुंबई में कसाब और उसके साथियों ने मचाया था. लेकिन सवाल उठता है कि आखिर 26/11 के दर्द की दवा क्या  है?

 

पाकिस्तान का बयान था कि हम बातचीत के लिए तैयार है लेकिन पहल भारत को करना होगा. पाकिस्तान की इस शर्त का पीएम मोदी ने किस अंदाज में जवाब दिया वो आपके सामने है. दूसरी तरफ नवाज शरीफ के अंदाज को देखकर निदा फाजली का वो मशहूर शेर याद आ रहा है जिसमें उन्होंने कहा है..

 

दुश्मनी लाख सही, खत्म न कीजे रिश्ता

दिल मिले ना मिले, हाथ मिलाते रहिए…

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