मोदी जो कभी खुद कैंटीन में काम किया करते थे!

By: | Last Updated: Monday, 2 March 2015 10:36 AM
pm narendra modi lunch

नई दिल्ली: मोदी ने हमेशा जमीन से जुड़े होने की छवि पेश की है फिर चाहे चुनाव प्रचार के दौरान चाय बेचने की बात हो या फिर जीवन से कुछ दूसरे किस्से.

प्रधानमंत्री मोदी संसद की कैंटीन में खाना खाते नजर आए तो ये घटना सुर्खियां बन गई. आज से कई साल पहले एक वक्त वो भी था जब मोदी खुद कैंटीन में काम किया करते थे.

 

1960 के दशक के अंत में मोदी ने गुजरात राज्य परिवहन निगम की कैंटीन में सुपरवाइजर का काम शुरू किया. यही वह समय था जब आरएसएस के साथ वे करीब से जुड़े और उन्हें स्थानीय विश्व हिंदू परिषद इकाई का प्रभार सौंपा गया. अहमदाबाद में उन्हें आरएसएस के करीब लाने का श्रेय अंबालाल कोष्टि नाम के व्यक्ति को जाता है जो आज भी गुजरात बीजेपी के मुख्यालय में काम करते हैं. मोदी जिस कैंटीन में काम करते थे वहीं उनकी अंबालाल कोष्टि से मुलाकात हुई थी.

 

बचपन में भी खाने को लेकर मोदी की कोई खास पसंद या नापसंद नहीं हुआ करती ज्यादातर खिचड़ी और कढ़ी मोदी का भोजन हुआ करता था. और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वो सादा खाना ही पसंद करते हैं नाश्ता भी हल्का, कभी पोहा तो कभी खाखरा, तो कभी भाखरी. गांधीनगर से मोदी दिल्ली गये, तो अपने खास रसोइए बद्री को ले जाना नहीं भूले. बद्री उनके लिए सुबह का नाश्ता तैयार करता है.

मोदी खाना कहीं भी खाए पर वो भोजन समय पर करना पसंद करते हैं वो दोपहर डेढ़ से ढाई बजे के बीच लंच लेते हैं. मोदी को भोजन अकेले करना पसंद है . खाना सरल, गरिष्ठ भोजन पसंद नहीं है. ऐसे में कभी दाल,  तो कभी सब्जी, कभी सलाद, हल्का भोजन करते हैं. लंच का ये समय करीब बीस मिनट का होता है. लंच के बाद आराम करने की आदत नहीं है मोदी की.

 

रात साढ़े दस बजे के करीब मोदी भोजन कर लेते हैं. रात के भोजन में खिचड़ी- कढ़ी या फिर कोई और हल्का-फुल्का गुजराती व्यंजन.