पीएम मोदी ने नेता जी से जुड़ी 100 फाइलों को सार्वजनिक किया

By: | Last Updated: Saturday, 23 January 2016 1:37 PM
LIVE: PM Narendra Modi releases Netaji’s declassified files

नई दिल्ली: नेता जी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी 100 फाइलों को आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक कर दिया है. इन सभी फाइलों को वेब पोर्टल http://netajipapers.gov.in पर सार्वजनिक किया है. इन फाइल्स को कोई भी इस वेबसाइट पर जाकर देख सकता है.  इस वेबसाइट पर ओरिजिनल फाइल्स को स्कैन करके अपलोड किया गया है.

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पीएम मोदी ने वेबसाइट को लॉन्च करने के बाद नेता जी के परिवार से जाकर मिले. नेता जी का परिवार इस मौके पर भावुक हो गया.  नेता जी परपोजी चित्रा बोस ने कहा है कि जिन फाइलों को कांग्रेस ने नहीं जारी किया उसे पीएम मोदी ने सार्वजनिक कर दिया. इसके लिए वे पीएम की आभारी हैं. आज नेता जी से जुड़ी 100 फाइलों को सार्वजनिक किया गया है. हर महीने 25 फाइलों को इस वेबसाइट  पर सार्वजनिक किया जाएगा.

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नेता जी की फाइल में बड़ा खुलासा-
इस फाइल में खुलासा हुआ हैकि नेता जी की बेटी को 1964 तक हर साल 6000 रूपये कांग्रेस के तरफ से दिए जाते थे. नेता जी की पत्नी ने पैसा लेने से मना कर दिया था. नेता जी की पुत्रीकी शादी के बाद कांग्रेस ने ये पैसा देना बंद कर दिया था.

 

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता शकील अहमद ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इसमें कांग्रेस को शर्माने जैसी कोई बात नहीं. हम नेता जी की फाइलें सार्वनजिक होने का समर्थन करते हैं.

 

नेता जी मामले में अब तक क्या हुआ, जानें-
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में कहा जाता है कि उनकी मौत 18 अगस्त 1945 को ताइपे में एक विमान दुर्घटना में हुई..लेकिन बाद में इस पर कई सवाल उठने लगे. भारत में बहुत बड़ा तबका ये मानता है कि सुभाष बोस उस विमान दुर्घटना में जीवित बच निकले थे और वहां से रूस चले गए थे.

जबकि बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी के मुताबिक विमान दुर्घटना के समय ताइवान जापानियों के कब्ज़े में था. उसके बाद उस पर अमेरिका का कब्ज़ा हो गया. दोनों देशों के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि उस दिन वहां कोई विमान दुर्घटना हुई थी. सुब्रमण्यम स्वामी रूस के एक स्कॉलर के हवाले से कहते हैं कि नेता जी तो ताइवान गए ही नहीं थे. वो साएगोन से सीधे मंचूरिया आए थे, जहां उन्हें सोवियत संघ ने गिरफ़्तार कर लिया था. बाद में स्टालिन ने उन्हें साइबेरिया की यकूत्स्क जेल में भिजवा दिया था जहां 1953 में उनकी मौत हो गई थी.

नेताजी की मौत की गुत्थी को सुलझाने के लिए साल 1956 में भारत सरकार ने शाहनवाज खान कमिटी का गठन किया. इस कमिटी ने ताइवान गए बिना ही सिर्फ जापान में कुछ लोगों से बात करके रिपोर्ट दे दी. खान कमिटी की रिपोर्ट में बताया गया कि सुभाष चंद्र बोस की मौत प्लेन क्रेश में ही हुई थी. हालांकि सुभाष बोस के साथ उस विमान में सवार हबीबुररहमान ने पाकिस्तान से आकर शाहनवाज़ समिति के सामने गवाही दी कि नेता जी उस विमान दुर्घटना में मारे गए थे और उनके सामने ही उनका अंतिम संस्कार किया गया था. इस रिपोर्ट पर कमिटी में शामिल नेताजी के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस ने कड़ी आपत्ति जताई. ज्यादातर सांसद भी इस रिपोर्ट से सहमत नहीं थे.

कुछ सालों बाद नेता जी की मौत के रहस्य को लेकर जांच की मांग फिर से तेज हुई. 1970 में खोसला कमिशन का गठन किया गया…खोसला कमिशन ने अपनी रिपोर्ट में वही बात दोहराई कि नेता जी का 1945 में प्लेन क्रैश में मौत हो गई.हालांकि इस पर भी नेताजी से जुड़े कई लोगों ने आपत्ति जताई. लेकिन 1978 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने संसद में कहा कि कुछ ऐसे कागजात मौजूद हैं, जिनसे नेताजी की मौत प्लेन क्रेश में होने की बात स्वीकार नहीं की जा सकती.

इसके बाद 1999 वाजपेयी सरकार के दौरान जस्टिस मुखर्जी कमिशन ने इस गुत्थी को सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई. मुखर्जी कमिशन ने शाहनवाज और खोसला कमिशन की रिपोर्ट के उलट अपनी रिपोर्ट में कहा कि नेताजी की मौत प्लेन क्रेश में नहीं हुई थी. ताइवान ऑथॉरिटी ने भी कहा कि 14 अगस्त से 20 सितंबर 1945 के बीच वहां कोई प्लेन क्रेश नहीं हुआ था. लेकिन मुखर्जी आयोग यह बताने में सफल नहीं हो पाया कि नेताजी की मौत कब, कैसे और कहां हुई थी?

सरकार ने अब तक इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया है. वहीं नेताजी से जुड़े ज्यादातर लोग भी इस नेताजी के हवाई हादसे में बचने की बात को दुनिया के सामने स्वीकार नहीं करते.

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