यहां पढ़ें: मोदी के स्टालिन से जुड़े किस्से की असली सच्चाई क्या है?

By: | Last Updated: Friday, 4 March 2016 8:56 AM
PM Narendra Modi’s Stalin anecdote in Parliament

नई दिल्ली: बोलने की आजादी को लेकर अपनी सरकार पर हो रहे हमलों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवाब दिया है. मोदी ने 10 लाख विरोधियों को मौत के घाट उतारने वाले सोवियत संघ के तानाशाह स्टालिन और उनके बाद सोवियत संघ की सत्ता संभालने वाले निकिता ख्रुश्चेव से जुड़ी जो कहानी सुनाई है उसका खंडन निकिता ख्रुश्चेव ने 1959 में ही कर दिया था. शीत युद्ध में सोवियत संघ के विरोधी अमेरिका की जमीन पर ख्रुश्चेव ने जो खंडन किया वो सच था या नहीं इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्टालिन की कहानी सुनाकर बोलने की आजादी छीनने के विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब देने की कोशिश की है.

मोदी ने ऐसे ही आरोपों का जवाब देने के लिए संसद में जिस घटना का जिक्र किया है एबीपी न्यूज उसकी पूरी हकीकत बताने जा रहा है. मोदी की कहानी में दो किरदार हैं.

मोदी की कहानी का किरदार नंबर-1
जोसेफ स्टालिन
प्रधानमंत्री मोदी ने अब 13 देशों में बंट चुके उस अविभाजित सोवियत संघ के तानाशाह जोसेफ स्टालिन का जिक्र किया जिसने 1929 से 1953 के बीच करीब 24 साल तक सोवियत संघ पर शासन किया. स्टालिन पर आरोप लगता रहा है कि अपने शासनकाल में अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के लिए 10 लाख लोगों की हत्या करवा दी थी. यही नहीं स्टालिन ने इतिहास में खुद को वामपंथी विचारधारा का सबसे अहम किरदार साबित करने के लिए ना सिर्फ नए सिरे से इतिहास लिखवाया बल्कि उस दौर के सोवियत संघ के शहरों, गलियों मोहल्लों में अपना नाम दर्ज करवाने की सनक भरी कोशिश भी की थी. ये सिलसिला तब थमा जब 1953 में जोसेफ स्टालिन की मौत हो गई.

मोदी की कहानी का किरदार नंबर -2
निकिता ख्रुश्चेव
संसद में मोदी ने जिस दूसरे नाम का जिक्र किया वो हैं निकिता ख्रुश्चेवल जिन्होंने 1954 में स्टालिन की मौत के सोवियत संघ की सत्ता संभाली थी. ये तस्वीरें कभी स्टालिन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले ख्रुश्चेव के उस अहम कदम से जुड़ीं हैं जिसमें उन्होंने सोवियत संघ को स्टालिन की छाया से मुक्त करने के लिए एक बड़ा फैसला किया था. स्टालिन की मौत के बाद देश की कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं सालाना बैठक में बंद कमरे में ख्रुश्चेव ने स्टालिन के तानाशाही रवैये और बतौर शासक किए गए अपराधों के खिलाफ 4 घंटे लंबा भाषण दिया था. वो भाषण तो 1989 में 23 साल बाद दुनिया के सामने आया लेकिन माना जाता है कि उसी भाषण ने सोवियत संघ में नए दौर की शुरुआत की थी. मेमोयर्स ऑफ ख्रुश्चेव के तीसरे खंड में खुद निकिता ख्रुश्चेव ने लिखा था कि स्टालिन खुद को एक निर्विवाद भगवान मान बैठा था. जब वो चाहता तभी सवालों को सुनता. हमारे देश में चाहे वो अमीर हों या आम लोग हर किसी को इसकी आदत हो गई थी. दूसरों की राय पर अगर वो ध्यान भी देता था तो ये कह कर “तुम अपने आपको क्या समझते हो जो इस मुद्दे पर अपनी राय दे रहे हो? तुम्हें इसकी कोई समझ नहीं है”. उसके ही फैसले पार्टी और सरकार के जरिए लागू कर दिए जाते थे.
बोलने की आजादी को लेकर स्टालिन पर ख्रुश्चेव के इसी रुख का जिक्र पीएम मोदी ने किया है. वाशिंगटन पोस्ट के पूर्व पत्रकार पीटर कार्लसन ने K BLOWS TOP नाम की अपनी किताब में इस पूरी घटना का जिक्र किया है जो साल 1959 में ख्रुश्चेव के अमेरिका दौरे पर हुई थी. पीटर कार्लसन के मुताबिक 1959 की 16 सितंबर को वाशिंगटन प्रेस क्लब में उनसे इस घटना के बारे में पूछा गया था और तब उन्होंने इसका खंडन किया था.

पीटर लिखते हैं कि 1956 में स्टालिन के खिलाफ पहले गोपनीय भाषण के वक्त ही ख्रुश्चेव के हाथ में कागज पर लिखा हुआ सवाल आया था कि स्टालिन जब अपराध कर रहे थे तो आप क्या कर रहे थे? तब ख्रुश्चेव ने कागज पर कोई नाम ना देखकर सवाल पूछने वाले को खड़ा होने को कहा था. जब कोई खड़ा नहीं हुआ तो ख्रुश्चेव ने जवाब दिया कि कामरेड यही मैंने भी किया था जब मिस्टर स्टालिन अपराध कर रहे थे?

K BLOWS TOP किताब में पीटर ने इससे आगे का किस्सा भी लिखा है जिसके मुताबिक अमेरिकी पत्रकार ने ये किस्सा सुनाकर ख्रुश्चेव से इसकी पुष्टि करने को कहा था. द ख्रुश्चेव इस किस्से को सुनकर वाशिंगटन की उस प्रेस कान्फ्रेंस में नाराज हो गए थे और तब उन्होंने कहा यहां हंसी के फव्वारे फूट रहे हैं लेकिन मैं आपको बता दूं कि वो हंसी सबसे अच्छी होती है जो सबसे आखिर में आती है. मैं इस सवाल का जवाब नहीं देना चाहता क्योंकि ये भड़काऊ है लेकिन मैं इस मौके का इस्तेमाल ऐसी अफवाहों और झूठों का खंडन करने के लिए करना चाहता हूं जिसका सच से कोई नाता नहीं है.

आपको बता दें उस दौर में अमेरिका और सोवियत संघ शीत युद्ध में उलझे हुए थे और ख्रुश्चेव ये सवाल अमेरिकी पत्रकार ने पूछा था और जवाब ख्रुश्चेव के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता था. ऐसे में ख्रुश्चेव ने तब वाकई सच बोला था या नहीं इसकी पुष्टि करना मुमकिन नहीं है.

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Web Title: PM Narendra Modi’s Stalin anecdote in Parliament
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