पीएम मोदी क्योटो के बाद राजधानी टोक्यो पहुंचे

By: | Last Updated: Sunday, 31 August 2014 1:47 PM

क्योटो/टोक्यो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टोक्यो पहुंचे. मोदी ने जापान की पूर्व राजधानी क्योटो में दो प्राचीन बौद्ध मंदिरों का दर्शन किया और भारत के जनजातीय इलाकों में लाल रक्त कोशिका की बीमारी से निजात दिलाने में जापान से मदद मांगी.

 

आर्थिक और सुरक्षा संबंधों में मजबूती लाने के उद्देश्य से पांच दिनों की जापान यात्रा पर गए मोदी ने पहले दिन क्योटो के मेयर दाइसाकू कोडोकावा के साथ विरासत संरक्षण पर चर्चा की और उन्हें हिंदुओं के मशहूर तीर्थस्थल वाराणसी का विस्तृत नक्शा दिखाया. मोदी वाराणसी से ही चुनकर लोकसभा में पहुंचे हैं.

 

शनिवार को क्योटो पहुंचने पर मोदी का स्वागत जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने किया. रविवार को मोदी तोजी और किनकाकू-जी मंदिरों के दर्शन करने पहुंचे.

 

समाचार एजेंसी क्योडो के मुताबिक, सफेद कुर्ता पाजामा और बंदगले के परिधान में मोदी सबसे पहले तोजी मंदिर गए. उनके साथ आबे भी थे. आबे ने मोदी को तोजी में मागदर्शन किया और एक बौद्ध प्रतिमा का दर्शन करने के बाद उन्होंने पांच मंजिले पगोडा को भी देखा. यह पगोडा जापान की राष्ट्रीय विरासत है.

 

आबे ने कहा, “बुद्ध की प्रतिमा को देखते हुए हम जापान और भारत के बीच गहरे ऐतिहासिक रिश्ते को याद करते हैं.”

 

यूनेस्को की विरासती सूची में शामिल 8वीं सदी में निर्मित 57 मीटर ऊंचे इस मंदिर के मुख्य भिक्षु ने उन्हें तीर्थस्थल की खूबियों से अवगत कराया.

 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट किया है, “तोजी मंदिर का दौरा कर दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-जापान के प्राचीन संबंधों को याद किया.”

 

इसके बाद मोदी 1397 ईस्वी में निर्मित दूसरे प्राचीन बौद्ध मंदिर किनकाकु-जी के दर्शन के लिए गए. यहां उनसे मिलने आए लोगों ने बड़ी गर्मजोशी के साथ उनका अभिवाद किया, मोदी ने लोगों से बातें भी की.

 

किनकाकु-जी मंदिर में मोदी ने मुख्य पुरोहित 83 वर्षीय बौद्ध भिक्षु यासु नागामोरी के साथ समय बिताया. मोदी ने बड़ी ही हाजिरजवाबी के साथ नागामोरी का अभिवादन करते हुए कहा, “मैं मोदी हूं और आप मोरी हैं.”

 

मोदी क्योटो युनिवर्सिटी में स्टेम कोशिका के अग्रणी चिकित्सक एवं वैज्ञानिक और 2012 के नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर शिन्या यामानाका से भी मिले.

 

उन्होंने लाल रक्त कोशिका से जुड़ी एनीमिया के इलाज और भारतीय व जापानी संस्थानों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की.

 

भारतीय प्रधानमंत्री ने एनीमिया की व्यापकता विशेषकर पूरे भारत के जनजातीय समुदायों में इसके प्रकोप पर चिंता जताई.

 

इस बीमारी में मानव शरीर की कोशिकाओं का लचीलापन घटने लगता है और कई जानलेवा बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो जाता है. यह बीमारी ज्यादातर उन क्षेत्रों में देखी जाती है, जहां मलेरिया का प्रकोप होता है.

 

बयान में कहा गया है, “प्रधानमंत्री ने यामानाका से इस बीमारी का इलाज ढूंढ़ने की दिशा में काम करने का आग्रह किया है.”

 

यामानाका ने कहा कि फिलहाल उनके संस्थान सेंटर फॉर आईपीएस सेल रिसर्च एंड एप्लीकेशन में एक भी भारतीय शोधकर्ता नहीं है. उन्होंने कहा कि वह चाहेंगे कि भारतीय वैज्ञानिक इस संस्थान में शोध करें.

 

जापान की पूर्व राजधानी क्योटो के दो दिनों के प्रवास के बाद मोदी टोक्यो के लिए रवाना हुए. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्विटर पर लिखा, “अलविदा क्योटो.”

 

भारतीय प्रधानमंत्री पांच दिवसीय जापान यात्रा के तहत शनिवार को क्योटो पहुंचे थे. मोदी का जापान दौरा तीन सितंबर को संपन्न होगा.

 

मई 2014 में प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के बाद मोदी पहली बार दक्षिण एशिया से बाहर द्विपक्षीय यात्रा पर गए हैं. उन्होंने कहा कि भारत-जापान संबंध अपनी संभावना से काफी पीछे था.

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