नेपाल का दुख, भारत का दुख, मदद देने में पूरा साथ देंगे: मोदी

By: | Last Updated: Sunday, 26 April 2015 5:55 AM
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नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी ने आज रेडियो पर देश से ‘मन की बात’ कही. पीएम ने अपने कार्यक्रम की शुरुआत में कहा कि आज उनका मन की बात करने का मन नहीं हो रहा है. वह नेपाल के दुख में दुखी हैं. उन्होंने कहा कि नेपाल का दुख हमारा दुख है. मैं बोझ का अनुभव कर रहा हूं, नेपाल में इस समय भयानक संकट आया हुआ है. हम नेपाल की हर संभव मदद करेंगे. मैंने गुजरात के कच्छ में आए भूकंप को बहुत नजदीक से देखा है, इसलिए मैं नेपाल में आई तबाही को अच्छे से समझ सकता हूं.

पढ़ें पीएम के मन की बात का शब्दशः पूरा भाषण

 

मेरे प्यारे देशवासियो,

 

नमस्कार,

 

मन की बात करने का मन नहीं हो रहा था आज. बोझ अनुभव कर रहा हूँ, कुछ व्यथित सा मन है. पिछले महीने जब बात कर रहा था आपसे, तो ओले गिरने की खबरें, बेमौसमी बरसात, किसानों की तबाही. अभी कुछ दिन पहले बिहार में अचानक तेज हवा चली. काफी लोग मारे गए. काफी कुछ नुकसान हुआ. और शनिवार को भयंकर भूकंप ने पूरे विश्व को हिला दिया है. ऐसा लगता है मानो प्राकृतिक आपदा का सिलसिला चल पड़ा है. नेपाल में भयंकर भूकंप की आपदा. हिंदुस्तान में भी भूकंप ने अलग-अलग राज्यों में कई लोगों की जान ली है. संपत्ति का भी नुकसान किया है. लेकिन नेपाल का नुकसान बहुत भयंकर है.

 

मैंने 2001, 26 जनवरी, कच्छ के भूकंप को निकट से देखा है. ये आपदा कितनी भयानक होती है, उसकी मैं कल्पना भली-भांति कर सकता हूँ. नेपाल पर क्या बीतती होगी, उन परिवारों पर क्या बीतती होगी, उसकी मैं कल्पना कर सकता हूँ.

 

लेकिन मेरे प्यारे नेपाल के भाइयो-बहनो, हिन्दुस्तान आपके दुःख में आपके साथ है. तत्काल मदद के लिए चाहे हिंदुस्तान के जिस कोने में मुसीबत आयी है वहां भी, और नेपाल में भी सहाय पहुंचाना प्रारंभ कर दिया है. सबसे पहला काम है रेस्क्यू ऑपरेशन, लोगों को बचाना. अभी भी मलबे में दबे हुए कुछ लोग जीवित होंगे, उनको जिन्दा निकालना हैं. एक्सपर्ट लोगों की टीम भेजी है, साथ में, इस काम के लिए जिनको विशेष रूप से ट्रेन किया गया है ऐसे स्निफ़र डॉग्स को भी भेजा गया है. स्निफर डॉग्स ढूंढ पाते हैं कि कहीं मलबे के नीचे कोई इंसान जिन्दा हो. कोशिश हमारी पूरी रहेगी अधिकतम लोगों को जिन्दा बचाएं. रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रिलीफ का काम भी चलाना है. रिहैबिलिटेशन का काम भी तो बहुत लम्बा चलेगा.

 

लेकिन मानवता की अपनी एक ताकत होती है. सवा-सौ करोड़ देश वासियों के लिए नेपाल अपना है. उन लोगों का दुःख भी हमारा दुःख है. भारत पूरी कोशिश करेगा इस आपदा के समय हर नेपाली के आंसू भी पोंछेंगे, उनका हाथ भी पकड़ेंगे, उनको साथ भी देंगे. पिछले दिनों यमन में, हमारे हजारों भारतीय भाई बहन फंसे हुए थे. युद्ध की भयंकर विभीषिका के बीच, बम बन्दूक के तनाव के बीच, गोलाबारी के बीच भारतीयों को निकालना, जीवित निकालना, एक बहुत बड़ा कठिन काम था. लेकिन हम कर पाए. इतना ही नहीं, एक सप्ताह की उम्र की एक बच्ची को जब बचा करके लाये तो ऐसा लग रहा था कि आखिर मानवता की भी कितनी बड़ी ताकत होती है. बम-बन्दूक की वर्षा चलती हो, मौत का साया हो, और एक सप्ताह की बच्ची अपनी जिन्दगी बचा सके तब एक मन को संतोष होता है.

 

मैं पिछले दिनों विदेश में जहाँ भी गया, एक बात के लिए बहुत बधाइयाँ मिली, और वो था यमन में हमने दुनिया के करीब 48 देशों के नागरिकों को बचाया था. चाहे अमेरिका हो, यू.के. हो, फ्रांस हो, रशिया हो, जर्मनी हो, जापान हो, हर देश के नागरिक को हमने मदद की थी. और उसके कारण दुनिया में भारत का ये “सेवा परमो धर्मः”, इसकी अनुभूति विश्व ने की है. हमारा विदेश मंत्रालय, हमारी वायु सेना, हमारी नौसेना इतने धैर्य के साथ, इतनी जिम्मेवारी के साथ, इस काम को किया है, दुनिया में इसकी अमिट छाप रहेगी आने वाले दिनों में, ऐसा मैं विश्वास करता हूँ. और मुझे खुशी है कि कोई भी नुकसान के बिना, सब लोग बचकर के बाहर आये. वैसे भी भारत का एक गुण, भारत के संस्कार बहुत पुराने हैं.

 

अभी मैं जब फ्रांस गया था तो फ्रांस में, मैं प्रथम विश्व युद्ध के एक स्मारक पर गया था. उसका एक कारण भी था, कि प्रथम विश्व युद्ध की शताब्दी तो है, लेकिन साथ-साथ भारत की पराक्रम का भी वो शताब्दी वर्ष हैI भारत के वीरों की बलिदानी की शताब्दी का वर्ष है और “सेवा परमो-धर्मः” इस आदर्श को कैसे चरितार्थ करता रहा हमारा देश , उसकी भी शताब्दी का यह वर्ष है, मैं यह इसलिए कह रहा हूँ कि 1914 में और 1918 तक प्रथम विश्व युद्ध चला और बहुत कम लोगों को मालूम होगा करीब-करीब 15 लाख भारतीय सैनिकों ने इस युद्ध में अपनी जान की बाजी लगा दी थी और भारत के जवान अपने लिए नहीं मर रहे थेI हिंदुस्तान को, किसी देश को कब्जा नहीं करना था, न हिन्दुस्तान को किसी की जमीन लेनी थी लेकिन भारतीयों ने एक अदभुत पराक्रम करके दिखाया थाI बहुत कम लोगों को मालूम होगा इस प्रथम विश्व युद्ध में हमारे करीब-करीब 74 हजार जवानों ने शहादत की थी, ये भी गर्व की बात है कि इस पर करीब 9 हजार 2 सौ हमारे सैनिकों को गैलेंट्री अवार्ड से डेकोरेट किया गया थाI इतना ही नहीं, 11 ऐसे पराक्रमी लोग थे जिनको सर्वश्रेष्ठ सम्मान विक्टोरिया क्रॉस मिला थाI खासकर कि फ्रांस में विश्व युद्ध के दरमियान मार्च 1915 में करीब 4 हजार 7 सौ हमारे हिनदुस्तानियों ने बलिदान दिया था. उनके सम्मान में फ्रांस ने वहां एक स्मारक बनाया है. मैं वहाँ नमन करने गया था, हमारे पूर्वजों के पराक्रम के प्रति श्रध्दा व्यक्त करने गया था.

नेपाल का दुख भारत का दुख: PM 

ये सारी घटनायें हम देखें तो हम दुनिया को कह सकते हैं कि ये देश ऐसा है जो दुनिया की शांति के लिए, दुनिया के सुख के लिए, विश्व के कल्याण के लिए सोचता है. कुछ न कुछ करता है और ज़रूरत पड़े तो जान की बाज़ी भी लगा देता है. यूनाइटेड नेशन्स में भी पीसकीपिंग फ़ोर्स में सर्वाधिक योगदान देने वालों में भारत का भी नाम प्रथम पंक्ति में है. यही तो हम लोगों के लिए गर्व की बात है.

 

पिछले दिनों दो महत्वपूर्ण काम करने का मुझे अवसर मिला. हम पूज्य बाबा साहेब अम्बेडकर की 125 वीं जयन्ती का वर्ष मना रहे हैं. कई वर्षों से मुंबई में उनके स्मारक बनाने का जमीन का विवाद चल रहा था. मुझे आज इस बात का संतोष है कि भारत सरकार ने वो जमीन बाबा साहेब अम्बेडकर के स्मारक बनाने के लिए देने का निर्णय कर लिया. उसी प्रकार से दिल्ली में बाबा साहेब अम्बेडकर के नाम से एक इंटरनेशनल सेंटर बने, पूरा विश्व इस मनीषी को जाने, उनके विचारों को जाने, उनके काम को जाने. ये भी वर्षों से लटका पड़ा विषय था, इसको भी पूरा किया, शिलान्यास किया, और 20 साल से जो काम नहीं हुआ था वो 20 महीनों में पूरा करने का संकल्प किया. और साथ-साथ मेरे मन में एक विचार भी आया है और हम लगे हैं, आज भी हमारे देश में कुछ परिवार हैं जिनको सर पे मैला ढ़ोने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

 

क्या हमें शोभा देता है कि आज भी हमारे देश में कुछ परिवारों को सर पर मैला ढोना पड़े? मैंने सरकार में बड़े आग्रह से कहा है कि बाबा साहेब अम्बेडकर जी के पुण्य स्मरण करते हुए 125 वीं जयन्ती के वर्ष में, हम इस कलंक से मुक्ति पाएं. अब हमारे देश में किसी गरीब को सर पर मैला ढोना पड़े, ये परिस्थति हम सहन नहीं करेंगे. समाज का भी साथ चाहिये. सरकार ने भी अपना दायित्व निभाना चाहिये. मुझे जनता का भी सहयोग चाहिये, इस काम को हमें करना है.

 

बाबा साहेब अम्बेडकर जीवन भर शिक्षित बनो ये कहते रहते थे. आज भी हमारे कई दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित समाज में, ख़ास करके बेटियों में, शिक्षा अभी पहुँची नहीं है. बाबा साहेब अम्बेडकर के 125 वीं जयन्ती के पर्व पर, हम भी संकल्प करें. हमारे गाँव में, नगर में, मोहल्ले में गरीब से गरीब की बेटी या बेटा, अनपढ़ न रहे. सरकार अपना कर्त्तव्य करे, समाज का उसमें साथ मिले तो हम जरुर संतोष की अनुभूति करते हैं. मुझे एक आनंद की बात शेयर करने का मन करता है और एक पीड़ा भी बताने का मन करता है.

 

मुझे इस बात का गर्व होता है कि भारत की दो बेटियों ने देश के नाम को रौशन किया. एक बेटी साईना नेहवाल बैडमिंटन में दुनिया में नंबर एक बनी, और दूसरी बेटी सानिया मिर्जा टेनिस डबल्स में दुनिया में नंबर एक बनी. दोनों को बधाई, और देश की सारी बेटियों को भी बधाई. गर्व होता है अपनों के पुरुषार्थ और पराक्रम को लेकर के. लेकिन कभी-कभी हम भी आपा खो बैठते हैं. जब क्रिकेट का वर्ल्ड कप चल रहा था और सेमी-फाइनल में हम ऑस्ट्रेलिया से हार गए, कुछ लोगों ने हमारे खिलाड़ियों के लिए जिस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया, जो व्यवहार किया, मेरे देशवासियो, ये अच्छा नहीं है. ऐसा कैसा खेल हो जिसमें कभी पराजय ही न हो अरे जय और पराजय तो जिन्दगी के हिस्से होते हैं. अगर हमारे देश के खिलाड़ी कभी हार गए हैं तो संकट की घड़ी में उनका हौसला बुलंद करना चाहिये. उनका नया विश्वास पैदा करने का माहौल बनाना चाहिये. मुझे विश्वास है आगे से हम पराजय से भी सीखेंगे और देश के सम्मान के साथ जो बातें जुड़ी हुई हैं, उसमें पल भर में ही संतुलन खो करके, क्रिया-प्रतिक्रिया में नहीं उलझ जायेंगे. और मुझे कभी-कभी चिंता हो रही है. मैं जब कभी देखता हूँ कि कहीं अकस्मात् हो गया, तो भीड़ इकट्ठी होती है और गाड़ी को जला देती है. और हम टीवी पर इन चीजों को देखते भी हैं. एक्सीडेंट नहीं होना चाहिये. सरकार ने भी हर प्रकार की कोशिश करनी चाहिये. लेकिन मेरे देशवासियो बताइये कि इस प्रकार से गुस्सा प्रकट करके हम ट्रक को जला दें, गाड़ी को जला दें…. मरा हुआ तो वापस आता नहीं है. क्या हम अपने मन के भावों को संतुलित रखके कानून को कानून का काम नहीं करने दे सकते हैं? सोचना चाहिये.

 

खैर, आज मेरा मन इन घटनाओं के कारण बड़ा व्यथित है, ख़ास करके प्राकृतिक आपदाओं के कारण, लेकिन इसके बीच भी धैर्य के साथ, आत्मविश्वास के साथ देश को भी आगे ले जायेंगे, इस देश का कोई भी व्यक्ति…दलित हो, पीड़ित हो, शोषित हो, वंचित हो, आदिवासी हो, गाँव का हो, गरीब हो, किसान हो, छोटा व्यापारी हो, कोई भी हो, हर एक के कल्याण के मार्ग पर, हम संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहेंगे.

 

विद्यार्थियों की परीक्षायें पूर्ण हुई हैं, ख़ास कर के 10 वीं और 12 वीं के विद्यार्थियों ने छुट्टी मनाने के कार्यक्रम बनाए होंगे, मेरी आप सबको शुभकामनाएं हैं. आपका वेकेशन बहुत ही अच्छा रहे, जीवन में कुछ नया सीखने का, नया जानने का अवसर मिले, और साल भर आपने मेहनत की है तो कुछ पल परिवार के साथ उमंग और उत्साह के साथ बीते यही मेरी शुभकामना है.

 

आप सबको मेरा नमस्कार.

 

धन्यवाद.

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