मिशन अरब पर पीएम मोदी: भव्य मस्जिद के दीदार के साथ शुरू की यूएई यात्रा

By: | Last Updated: Sunday, 16 August 2015 9:30 AM
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अबू धाबी: खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख देश संयुक्त अरब अमीरात के साथ आतंक के खिलाफ मुहिम और निवेश को आमंत्रित करने के एजेंडा के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज दो दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचे. अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम की शुरूआत यहां स्थित विश्व की तीसरी सबसे बड़ी मस्जिद के दीदार के साथ की.

 

किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा 34 साल बाद यूएई की यात्रा पर यहां पहुंचे मोदी 1,80,000 वर्ग फुट के प्रांगण वाली शेख जायेद भव्य मस्जिद देखने गए.

 

क्रीम रंग का कुर्ता और सफेद और नारंगी रंग का अंगवस्त्रम पहने मोदी ने लगभग 54 करोड़ डॉलर की लागत से बनी इस मस्जिद को देखा और इस इबादतगाह के सात आकारों वाले 82 गुंबदों में खास रूचि दिखाई.

यूएई के संस्कृति मंत्री शेख नह्यान बिन मुबारक अल नह्यान और विदेश राज्य मंत्री डा. अनवर गर्गश मस्जिद में उनके साथ थे और मोदी ने उनके साथ सेल्फी ली.

 

मस्जिद में आगंतुक पुस्तिका में मोदी ने लिखा, ‘‘मैं इस शानदार, विशाल और खूबसूरत इबादतगाह में आकर प्रसन्न हूं. यह दुनिया भर की रचनात्मकता और कौशल की बदौलत निर्मित मानवीय उपलब्धि और एकता का बेजोड़ नमूना है. मुझे विश्वास है कि यह शांति, करूणा, सौहार्द और समावेशिता का प्रतीक होगी जो इस्लाम की आस्था में समाहित है.’’

 

इससे पहले यहां पहुंचने पर हवाई अड्डे पर अबू धाबी के शहजादे और उनके पांच भाइयों ने प्रोटोकाल से हटते हुए मोदी का स्वागत किया. इस साल मई में शहजादे ने मोरक्को के बादशाह का स्वागत किया था.

मोदी यहां आई कैड आवासीय श्रमिक शिविर गए और यहां भारतीय कामगारों से बात की और उनकी समस्याएं सुनी. यूएई पहुचने पर अरबी में मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘खुशामदीद यूएई. मैं इस यात्रा को लेकर बहुत आशावान हूं. मुझे विश्वास है कि इस यात्रा के नतीजों से भारत और यूएई के संबंधों को बढ़ावा मिलेगा.’’

 

मोदी ने ट्वीट करके कहा, ‘‘मैं महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नह्यान द्वारा मेरा हवाई अड्डे पर स्वागत किये जाने का तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं. ’’ हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री का पारंपरिक रूप से स्वागत भी किया गया.

 

संयुक्त अरब अमीरात में लगभग 26 लाख भारतीय रहते हैं जो उस देश की आबादी का 30 प्रतिशत है.

 

मोदी एक वर्ग किलोमीटर में फैले आई कैड आवासीय श्रमिक शिविर गए जहां हजारों की संख्या में भारतीय उपमहाद्वीप के कर्मी रहते हैं. मोदी ने यहां भारतीय कमगारों से बात की और उनकी समस्याएं सुनी तथा इस बारे में चर्चा की कि भारत सरकार उनकी किस तरह से मदद कर सकती है. मोदी ने यहां प्रवासी कामगारों के साथ समूह फोटो भी खिंचाया. दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों ने इन चुनिंदा 300 भारतीयों को मोदी से मिलने की अनुमति दी थी.

 

मोदी ने एक स्थानीय दैनिक को दिये अपने इंटरव्यू में कल यूएई के शीर्ष नेतृत्व से होने वाली अपनी वार्ता के एजेंडा का स्पष्ट संकेत दिया था. उसमें प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह चाहते हैं कि यूएई व्यापार और आतंकवाद के खिलाफ मुहिम में भारत का अग्रणी साझेदार बने.

 

मोदी ने कहा कि क्षेत्र में उग्रवाद सहित सुरक्षा और सामरिक मामलों में दोनों देशों की साझा चिंताएं हैं.

 

मोदी ने कहा था, ‘‘हमारी इस क्षेत्र में आतंकवाद, चरमपंथ समेत व्यापक साझा सुरक्षा और सामरिक चिंताएं हैं. ऐसे में भारत और यूएई की दूसरे के प्रति शीर्ष प्राथमिकताएं हैं. मैं यूएई को इस दृष्टि से देखता हूं. भारत के आर्थिक, उर्जा और सुरक्षा हितों के लिए खाड़ी क्षेत्र महत्वपूर्ण है.’’ मोदी ने आगे कहा कि वह तेजी से बढ़ती इस अरब अर्थव्यवस्था और इसके दूरदर्शी और व्यवहारिक नेतृत्व के साथ सुरक्षा, उर्जा और निवेश के क्षेत्रों में खासतौर पर सामरिक साझेदारी बढ़ाने को इच्छुक हैं.

 

उर्जा और व्यापार में सहयोग बढ़ाने के अलावा मोदी भारत को निवेशकों के समक्ष एक आकषर्क निवेश स्थल के रूप में पेश करेंगे. अबू धाबी निवेश प्राधिकरण (एडीआईए) के महानिदेशक हामिद बिन जायेद अल नह्यान ने मोदी के सम्मान में रात्रि भोज का आयोजन किया है. एडीआईए 800 अरब डॉलर का स्वतंत्र कोष है और भारत ढांचागत क्षेत्रों में इससे निवेश का आकांक्षी है.

 

1970 के दशक में भारत और यूएई के बीच कारोबार 18 करोड़ डॉलर था जो आज बढ़कर 60 अरब डॉलर हो चुका है. चीन और अमेरिका के बाद 2014.15 में यूएई, भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है.

 

इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 1981 में इंदिरा गांधी यूएई गई थीं.

 

मोदी की इस यात्रा को भारत और यूएई के बीच व्यापार एवं सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. मोदी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह चाहते हैं कि यूएई आतंकवाद विरोधी मुहिम में भारत का अग्रणी सहयोगी बने.

 

यूएई की शानदार उपलब्धियों पर मोदी ने कहा कि यह खाड़ी देश मरूस्थल पर बना एक स्वर्ग है जो अतुलनीय दृष्टि और कौशल का प्रतीक है.

क्या है इस यात्रा की खास अहमियत?

भारत से करीब 26 सौ किलोमीटर दूर पर बसा है संयुक्त अरब अमिरात. 34 सालों में ये पहला मौका है जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री संयुक्त अरब अमिरात यानी यूएई का दौरा कर रहा है. 1981 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने यूएई का दौरा किया था. इस लिहाज से प्रधानमंत्री मोदी की सोमवार से शुरू हो रही यूएई की यात्रा की खास अहमियत है. प्रधानमंत्री मोदी अबूधाबी के शासक शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नयन के निमंत्रण पर यूएई की यात्रा पर जा रहे हैं. माना जा रहा है कि मोदी की यात्रा से दोनों देशों के आपसी संबंधो को ताकत मिलेगी जिसका सीधा फायदा यूएई में रह रहे करीब 20 लाख भारतीय प्रवासियों को होगा.

 

एक अनुमान के मुताबिक भारतीय प्रवासियों का यूएई की कुल जनसंख्या में करीब 30 फीसदी हिस्सा है और यह एकमात्र ऐसा समुदाय है जो किसी खाड़ी देश में इतनी बड़ी तादाद में रहता है. जहां तक आर्थिक संबंधों की बात है दोनों ही देशों के बीच इस मामले में लंबे समय से बेहतर संबंध रहे हैं. अमरीका और चीन के बाद यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी है. दोनों देशों के बीच करीब 60 अरब डॉलर का व्यापार है. पिछले वित्त वर्ष में जहां एक ओर भारत में यूएई में करीब 3 अरब डॉलर के सामान का निर्यात किया वहीं दूसरी ओर नई दिल्ली ने खाड़ी देशों से 28 अरब डॉलर के नॉन आयल सामानों का आयात किया. अरब देशों की कमान संभालने वाले ताकतवर देश यूएई ने भारत में करीब 8 अरब डॉलर का निवेश भी किया है.

 

प्रधानमंत्री की यूएई यात्रा से उम्मीद की जा रही है कि ऐसे समय में जब मोदी मेक इन इंडिया का नारा दिया है, यूएई भारत में बड़ी संख्या में निवेश करेगा. गौर करने की बात है कि साल 2013 में भारत और संयुक्त अरब अमिरात  ने द्विपक्षीय निवेश संरंक्षण समझौता किया था जिसका उद्देश्य खाड़ी देशों से भारत में निवेश को आकर्षित करना था. 2014 में अपने यूएई के दौरे के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यूएई को भरोसा दिलाया था कि नई दिल्ली इस समझौते को पूर्ण रुप से लागू करेगा. अब प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि भारत यूएई के साथ और बेहतर संबंध बनाने और खाड़ी देशों से निवेश आकर्षित करने में कामयाब होगा. कहा जा रहा है कि भारत की नजर यूएई के करीब 800 बिलियन डॉलर के धन भंडार पर है. यूएई भारत में बुनियादी ढांचे के विकास में काफी निवेश कर सकता है.

 

व्यापार और आर्थिक संबंधों के अलावा, प्रधानमंत्री की यात्रा का सबसे अहम  उद्देश्यों में से एक ये भी है कि वो अरब विश्व में आईएसआईएस के खतरों से निपटने के लिए यूएई के संसाधनों का बेहतर उपयोग करना चाहते हैं. जैसा कि हम जानते हैं इसके अलावा भारत आईएसआईएस की कैद में फंसे 39 भारतीयों की रिहाई के लिए यूएई की मदद ले रहा है. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री की यूएई की यात्रा के दौरान दोनों देश आतंकवाद-निरोधी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं.

 

प्रधानमंत्री की प्रत्येक विदेश यात्रा के दौरान जो सबका ध्यान अपनी तरफ खींचता है वो है उनका भारतीय प्रवासियों से रूबरू होना. कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी यात्रा के दौरान दुबई क्रिकेट स्टेडियम में हजारों की संख्या में मौजूद भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे.

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