लालकिले से भाषण में प्रधानमंत्री ने दस साल का प्लान पेश किया, बोले- मैं प्रधानमंत्री नहीं प्रधान सेवक

By: | Last Updated: Friday, 15 August 2014 1:43 AM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज ऐलान किया कि वह देश को संसद में बहुमत के आधार पर नहीं बल्कि सहमति के आधार पर चलाएंगे. उन्होंने जातिगत और सांप्रदायिक हिंसा पर 10 वर्ष के लिए रोक लगाने का आह्वान किया.

 

ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से पहली बार राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी ने आतंकवाद और हिंसा के रास्ते पर चल निकले नौजवानों से अपने हथियार छोड़कर शांति और विकास का रास्ता अपनाने का आह्वान किया.

 

प्रधानमंत्री का पद संभालने के तीन माह से भी कम समय के भीतर मोदी ने अपनी सरकार का रोडमैप पेश किया, गरीबों के लिए जनधन योजना का ऐलान किया, जिसमें उनके लिए बीमा की सुविधा भी हो, सांसदों द्वारा आदर्श गांवों का विकास और एक समयसीमा के भीतर खुले में शौच को समाप्त करने की एक योजना का भी ऐलान किया.

 

उन्होंने कारपोरेट घरानों से कहा कि वह अपने सामाजिक दायित्व के तौर पर सरकार के साथ मिलकर काम करते हुए शौचालयों के निर्माण में सहयोग दें, जिसके अंतर्गत अगले स्वतंत्रता दिवस तक सभी स्कूलों में, लड़कियों के लिए अलग से शौचालयों का निर्माण किया जाए.

किसी बुलेट प्रूफ ढाल के बिना मोदी ने हिंदी में दिए अपने लगभग सवा घंटे के धाराप्रवाह संबोधन में योजना आयोग के स्थान पर जल्द ही भीतरी और वैश्विक आर्थिक परिवर्तनों को जहन में रखते हुए एक नये संस्थान की स्थापना की घोषणा की.

 

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर देते हुए कि वह प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं बल्कि ‘प्रधान सेवक’ के रूप में अपनी बात कह रहे हैं, राष्ट्र के निर्माण में पूर्व सरकारों, पूर्व प्रधानमंत्रियों और राज्य सरकारों के योगदान का विशेष उल्लेख किया.

 

मोदी ने ‘‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’’ नाम से वित्तीय भागीदारी योजना का ऐलान करते हुए कहा कि गरीब परिवारों का बैंक खाता खोला जाएगा, उन्हें एक डेबिट कार्ड दिया जाएगा और एक लाख रूपए का जीवन बीमा संरक्षण प्रदान किया जाएगा. प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि वह देश को संसद में बहुमत के आधार पर नहीं बल्कि सहमति के आधार पर चलाना चाहते हैं.

 

मोदी ने किसी तरह की बुलेट प्रूफ ढाल के बिना पूरे विश्वास के साथ अपनी बात रखते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री के रूप में नहीं बल्कि ‘‘प्रधान सेवक’’ के रूप में संबोधित कर रहे हैं.

 

उन्होंने इस दौरान देश के विकास में पूर्व सरकारों, पूर्व प्रधानमंत्रियों और पूर्व राज्य सरकारों का अभिवादन किया.

 

सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की मांग करते हुए और उनकी मदद का संकल्प लेते हुए मोदी ने कल ही समाप्त हुए संसद सत्र का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘कल संसद के सत्र का समापन हुआ. यह सत्र हमारी सोच की पहचान, हमारे इरादों की अभिव्यक्ति था कि हम बहुमति के बल पर आगे नहीं बढ़ना चाहते, हम सहमति के मजबूत धरातल पर आगे बढ़ना चाहते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘आप सब लोगों ने देखा होगा कि विपक्ष सहित सभी दलों को साथ लेकर चलने से हमने अभूतपूर्व सफलता हासिल की. इसका यश प्रधानमंत्री अथवा सरकार को ही नहीं जाता बल्कि विपक्ष को, इसके नेताओं को और इसके प्रत्येक सांसद को जाता है. मैं सभी सांसदों और राजनीतिक दलों का भी अभिनन्दन करता हूं, जिनकी मदद से हमने सफलता के साथ इस पहले सत्र का समापन किया.’’

 

देश के कुछ भागों में हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सांप्रदायिकता और जातिवाद देश की प्रगति में बाधा है. मोदी ने कहा, ‘‘हम सदियों से सांप्रदायिक तनाव से गुजर रहे हैं. इसकी वजह से देश विभाजन तक पहुंच गया..जातिवाद सांप्रदायवाद का जहर कब तक चलेगा? किसका भला होगा? बहुत लोगों को मार दिया, काट दिया, कुछ नहीं पाया, भारत मां के दामन पर दाग लगाने के अलावा कुछ नहीं पाया.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘मैं देश की प्रगति के लिए अपील करता हूं कि हिंसा पर 10 साल के लिए अंकुश लगाया जाए, कम से कम एक बार, ताकि हम इन बुराइयों से मुक्त समाज की ओर बढ़ें. शांति, एकता, सद्भावना और भाईचारे के साथ आगे बढ़ने में कितनी ताकत है. मेरे शब्दों पर भरोसा कीजिए. हम अब तक किए पापों को छोड़ दें और देश को आगे ले जाने का संकल्प करें. हम ऐसा कर सकते हैं.’’

 

मोदी ने अपनी हाल की नेपाल यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पड़ोसी हिमालय देश हिंसा का रास्ता छोड़कर संविधान के रास्ते पर आ गया है, वहां के नौजवान जो एक समय हिंसा के भटकाव में आ गए थे, अब वही संविधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

 

प्रधानमंत्री ने सवाल किया जब हमारा पड़ोसी देश नेपाल शस्त्र को छोड़कर शास्त्र (संविधान) और युद्ध से बुद्ध का का संदेश विश्व को दे सकता है तो भारत क्यों नहीं.

 

उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि भारत के नौजवान हिंसा का रास्ता छोड़ें और भाईचारे के रास्ते पर चलें. क्या भारत की भूमि हिंसा का रास्ता छोड़ने का संदेश नहीं दे सकती.

 

बलात्कार की घटनाओं पर गंभीर चिंता प्रकट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारा माथा शर्म से झुक जाता है, जब हम इस तरह की घटनाओं के बारे में सुनते हैं.’’ उन्होंने उन राजनेताओं पर प्रहार किया जो इस तरह के अपराध का विश्लेषण करने के लिए ‘‘मनोवैज्ञानिक’’ बन जाते हैं.

 

मोदी ने कहा, ‘‘मैं माताओं और पिताओं से पूछना चाहता हूं कि आपके घर में जब बेटी 10 साल की होती है तो आप उससे पूछते हैं कि कहां जा रही हो, कब तक लौटोगी? पहुंचने पर फोन कर देना क्या बेटे से पूछने की हिम्मत है कि कहां जा रहे हो? बलात्कार करने वाला भी तो किसी का बेटा है. मां बाप होने के नाते क्या कभी बेटे से पूछा कि कहां जा रहे हो. बेटियों पर जितने बंधन डाले हैं, बेटों पर डालो.’’ उन्होंने कहा, ‘‘कानून अपना काम करेगा, लेकिन समाज का भी दायित्व है. मां बाप की भी जिम्मेदारी है.

 

आतंकी और नक्सली गतिविधियों में संलिप्त नौजवानों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि कंधे पर बंदूक लेकर खून बहाने वाले किसी के तो बेटे हैं जो निर्दोषों का खून बहा रहे हैं.

 

उन्होंने हिंसा की राह पर चलने वाले नौजवानों का आह्वान किया, ‘‘हिंसा के रास्ते पर गए नौजवानों से कहना चाहता हूं कि आप आज जो भी कुछ हैं, कुछ न कुछ तो भारत माता और आपके मां बाप ने दिया है. धरती को लाल तो कर सकते हो, पर कंधे पर हल होगा तो धरती पर हरियाली होगी वह कितनी प्यारी होगी. कब तक जान लेते रहोगे, हिंसा के रास्ते ने कुछ नहीं दिया.’’ गिरते लिंगानुपात पर चिंता प्रकट करते हुए मोदी ने कन्या भ्रूण हत्या की निंदा की और कहा कि समाज में ऐसी सोच है कि बेटा होगा तो बुढ़ापे का सहारा बनेगा, लेकिन देखने में आता है कि पांच-पांच बेटे होने और बंगले होने के बावजूद मां बाप ‘ओल्ड ऐज होम’ या वृद्धाश्रम में रहते हैं.

 

उन्होंने कहा, ‘‘बेटियों की बलि मत चढ़ाइए.. जिनकी अकेली बेटी संतान के रूप में है तो वह अपने सपनों की बलि चढ़ा देती है, शादी नहीं करती और अपने मां बाप की सेवा करती है.’’ मोदी ने कहा, ‘‘मां के गर्भ में बेटी की हत्या, ये कितना बड़ा अपराध है. 21वीं सदी के मानव का मन कितना कलंकित और पाप भरा है, इसे प्रदर्शित करता है. इससे हमें मुक्ति पानी होगी.’’

 

:स्लग में टेक का नंबर बदलते हुए: देशवासियों को अर्थव्यवस्थाओं के वैश्वीकरण की वास्तविकता को स्वीकार करने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी निवेशकों को भारत के विनिर्माण क्षेत्र में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का निमंत्रण दिया.

 

मोदी ने ‘कम, मेक इन इंडिया’ .. ‘आइये, हिंदुस्तान में विनिर्माण कीजिए’ के नारे के साथ विदेशी निवेशकों से ‘इलेक्ट्रिक से इलेक्ट्रानिक, केमिकल से फार्मास्युटिकल्स, प्लास्टिक से लेकर पेपर, आटो से एग्रो इंडस्ट्री और उपग्रह से लेकर पनडुब्बी के विनिर्माण जैसे विविध क्षेत्रों में भारत में निवेश के अवसरों का लाभ उठाने की अपील की.

 

मोदी ने कहा कि भारत को विश्व में आये बदलावों के संदर्भ में सोचना होगा. उन्होंने उद्योगों और औद्योगिक हुनर रखने वाले युवकों का भी आह्वान किया कि वे ऐसे उत्पाद तैयार करे ताकि दुनिया भर में ‘मेड इन इंडिया’ का नाम स्थापित हो. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में रोजगार को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने तथा देश की ताकत का सही इस्तेमाल करने के लिये हमें विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना होगा. उन्होंने ‘जीरो डिफेक्ट’ (त्रुटिहीन उत्पाद) और ‘जीरो इफेक्ट’ (पर्यावरण अनुकूल उद्योग) पर बल देते हुए भारत के इस प्रयास में दुनिया के लोगों को जुड़ने का आह्वान किया. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज विश्व बदल चुका है. भारत अलग-थलग एक कोने में बैठकर अपना भविष्य तय नहीं कर सकता.’’ उन्होंने इस मौके पर देश के गरीबों तक बैंकिंग सुविधा और बीमा सुरक्षा पहुंचाने के लिये ‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’ की घोषणा की. इस योजना के तहत हर गरीब परिवार का बैंक खाता खोला जाएगा, जिसमें खाताधारक को एक लाख रपये के जीवन बीमा का संरक्षण होगा.

 

मोदी ने इसे गरीबों के लिये एक अवसर बताते हुए कहा, ‘‘यही तो है, जो खिड़की खोलता है.’’ प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि इस योजना के तहत जो खाते खोले जाएंगे, उन्हें डेबिट कार्ड दिया जाएगा और इसके साथ खाताधारक का एक लाख रपये का बीमा भी कराया जाएगा ताकि ऐसे व्यक्ति के जीवन में कोई संकट आये तो उसके परिजन को एक लाख रपये का बीमा मिल सके.

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