दूसरे देशों से संबध बनाए रखने के लिए सार्वजनिक नहीं करेगा पीएमओ  'नेता'  जी की फाइलें

By: | Last Updated: Thursday, 27 August 2015 3:50 PM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) से कहा है कि वह स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक नहीं कर सकता, क्योंकि इससे दूसरे देशों के साथ संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

 

 सीआईसी के समक्ष कल सुनवाई के दौरान पीएमओ ने स्वीकार किया कि उसके पास बोस से संबंधित फाइलें हैं, लेकिन वे इस बारे में कोई सूचना नहीं दे सकते और यह भी कहा कि अन्य देशों के साथ रिश्तों को ध्यान में रखते हुए इन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.

 

 पीएमओ ने आरटीआई (सूचना का अधिकार) कानून की धारा 8 (1) (ए) का हवाला दिया जिसके तहत उन सूचनाओं को सार्वजनिक होने से रोका जा सकता है जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, सुरक्षा, सामरिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता हो तथा भारत के अन्य देशों के साथ संबंध प्रभावित हो या किसी अपराध को बढ़ावा मिले.

 

 बोस से संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक किए जाने की मांग करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल ने आरटीआई कानून की धारा 8 (2) का हवाला देते हुए मजबूत पक्ष रखा जिसमें यह कहा गया है कि ऐसी सूचनाओं को सार्वजनिक किया जाना चाहिये जिनका जनहित महत्व संरक्षित हित से ज्यादा हो.

 

अग्रवाल ने कहा कि दूसरे देशों के साथ संबंध इससे प्रभावित नहीं हो सकता क्योंकि 70 साल पहले बोस कथित रूप से लापता हो गए थे. मुख्य सूचना आयुक्त विजय शर्मा ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रखा है.

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Web Title: PMO refuses to declassify Bose files
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