अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल को वापस बुलाया जाए : कांग्रेस

By: | Last Updated: Saturday, 19 December 2015 8:38 AM
political crisis in arunachal pradesh

नई दिल्ली : कांग्रेस ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा को वापस बुलाने की मांग की. पार्टी ने कहा है कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश ने राज्यपाल की ‘असंवैधानिक’ कार्रवाईयों के बारे में उसकी राय को सही साबित कर दिया है.

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने यहां संवाददाताओं से कहा कि संविधान के रक्षक माने जाने वाले राज्यपाल ‘असंवैधानिक काम करने के जिम्मेदार बताए गए हैं.’

आजाद ने कहा, “राज्य का प्रमुख संविधान के हिसाब से काम नहीं कर रहा है..हम मांग करते हैं कि राज्यपाल को वापस बुलाया जाए.”

राजखोवा ने असम के तेजपुर में संवाददाताओं से शुक्रवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश में ‘संवैधानिक संकट और कानून एवं व्यवस्था की समस्या है.’

एक होटल के कांफ्रेंस हाल में गुरुवार को विधानसभा उपाध्यक्ष टी. नोरबु थोंगडोक समेत 34 विधायकों ने ‘शीतकालीन सत्र’ में मुख्यमंत्री नाबाम टुकी और उनके मंत्रिमंडल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया था. इनमें कांग्रेस के 20 बागी विधायक, भाजपा के 11 विधायक और दो निर्दलीय विधायक शामिल थे.

इन विधायकों ने कालिखो पुल को नया मुख्यमंत्री चुन लिया था. इन्होंने एक दिन पहले विधानसभा अध्यक्ष नाबाम रेबिया को भी हटा दिया था.

लेकिन, गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्य विधानसभा की कार्यवाही पर पहली फरवरी 2016 तक के लिए रोक लगा दी और अगली सुनवाई के लिए 2 फरवरी 2016 की तारीख तय कर दी.

अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ज्योति प्रसाद राजखोवा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में संवैधानिक संकट की स्थिति है. साथ ही कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है. उन्होंने यह भी कहा है कि उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि उन्होंने क्या गलत किया है. राजखोवा ने असम के तेजपुर में संवाददाताओं से कहा, “यह एक संवैधानिक संकट है और कानून-व्यवस्था की समस्या है. अरुणाचल में बहुत समस्याएं हैं.”

राजखोवा ने पूछा, “मुझे क्यों दोषी बताया जा रहा है? मैंने क्या गलत किया है? राज्य में कानून-व्यवस्था काबू में नहीं है. वहां जंगल राज है.”

उन्होंने कहा, “मंत्री चिल्लाकर उंगली मेरी तरफ उठा रहे थे. मुख्यमंत्री (नाबाम तुकी) वहां थे, गृह मंत्री थे. उन्होंने मुझसे दुर्व्यवहार नहीं किया, बल्कि राज्य के राज्यपाल से किया. उन्होंने मुझे धमकाया भी.”

राजखोवा ने कहा कि गुरुवार रात राजभवन के सामने धरने में छह मंत्री मौजूद थे. गृहमंत्री धरने का संचालन कर रहे थे. ईटानगर में रास्तों को रोक दिया गया था. वाहनों को चलने नहीं दिया जा रहा था.

कि उन्हें या उनके सचिवालय को अपनी बात रखने के लिए कोई नोटिस या अवसर नहीं दिया गया. इसलिए माननीय न्यायाधीश का आदेश एकपक्षीय है.

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