क्या क्षेत्रीय दलों की राजनीति के दिन लद गए?

By: | Last Updated: Monday, 20 October 2014 2:25 PM
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नई दिल्ली : क्या क्षेत्रीय दलों की राजनीति के दिन लद गए . सवाल उठ रहे हैं महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद . देश के इन दो अहम राज्यों ने दो प्रमुख क्षेत्रीय दलों की हालत पतली कर दी है . महाराष्ट्र में राज ठाकरे की एमएनएस खात्मे के कगार पर पहुंच गई तो हरियाणा में चौटाला की पार्टी आईएनएलडी का दम भी निकलता दिख रहा है .

 

मराठी अस्मिता के नाम पर अपनी राजनीति चमकाने वाले राज ठाकरे की पार्टी के सितारे गर्दिश में हैं . मोदी लहर में की सूनामी में राज ठाकरे की पार्टी ऐसी उड़ी कि उसे न वोट मिले न ही सीट मिली .

 

महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में 199 सीट पर लड़ने वाली  एमएनएस को सिर्फ एक सीट मिली . वोट प्रतिशत की बात करें तो एमएनएस को सिर्फ 3.1 फीसदी वोट मिले .  एमएनएस की हालत तो पिछले चुनाव से खराब हुई है . 2009 विधानसभा चुनाव में एमएनएस को 13 सीटें मिली थीं .

 

राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र में धूल चाटती नजर आई तो हरियाणा के नतीजों ने भी आईएनएलडी की प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी . शिक्षक भर्ती घोटाले में तिहाड़ जेल में बंद ओम प्रकाश चौटाला चुनाव प्रचार के दौरान कहते रहे कि इस बार वह जेल से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे . मोदी लहर में न सिर्फ उनका सपना टूटा बल्कि उनकी पार्टी आईएनएलडी मोदी लहर में काफी बुरी हालत में चली गई . पिछले चुनाव से भी बुरा हाल हुआ आईएनएलडी का .

 

हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से आईएनएलडी को सिर्फ 19 सीटों से संतोष करना पड़ा . जबकि 2009 के विधानसभा चुनाव में आईएनएलडी को 31 सीटें मिली थीं . पार्टी को जीताने की तो छोड़िए अपने पोते दुष्यंत चौटाला तक को नहीं जीता पाए . मोदी लहर ऐसी चली कि हरियाणा के उचाना कला से दुष्यंत चौटाला हार गए .

 

आईएनएलडी के साथ कई क्षेत्रीय पार्टियों का अस्तित्व भी खत्म होता दिख रहा है . बीजेपी से गठबंधन तोड़ने वाले हरियाणा जनहित कांग्रेस को सिर्फ दो सीट मिली .

 

हरियाणा लोक हित पार्टी बनाने वाले गोपाल कांडा अपनी ही सीट नहीं बचा पाए . उनकी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली . कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा जनचेतना पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में कूदे विनोद शर्मा की पार्टी को भी कोई सीट नहीं मिली .

 

मोदी लहर की सुनामी में लोकसभा चुनाव के दौरान ही क्षेत्रीय पार्टियां बिखरने लगी थीं . लोकसभा चुनाव में मोदी लहर ने मायावती की बीएसपी, मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी, लालू यादव की आरजेडी और नीतीश कुमार की जेडीयू की हालत खराब कर दी थी .

 

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नरेंद्र मोदी के आने के बाद क्षेत्रीय दल खात्मे की ओर बढ़ रहे हैं ?

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