भारत जल्दी ही आठ-नौ प्रतिशत की विकास दर हासिल कर लेगा: राष्ट्रपति

By: | Last Updated: Sunday, 30 November 2014 4:10 AM

वाराणसी: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि भारत जल्दी ही आठ से नौ प्रतिशत की सालाना विकास दर हासिल कर लेगा और यह तीन खरब डालर की अर्थव्यवस्था वाला देश हो जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विकास के वास्तविक अर्थ के संबंध में स्पष्टता होनी चाहिए.

 

मुखर्जी ने यहां महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में इंडियन सोशियोलोजिकल सोसायटी के 40वें राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह साफ होना चाहिए कि विकास का अर्थ क्या है.

 

उन्होंने सवाल किया, ‘‘ क्या इसका अर्थ सिर्फ जीडीपी विकास है या इसमें सकल राष्ट्रीय खुशी (ग्रॉस नेशनल हैपीनेस) जैसे तत्व भी शामिल हैं?’’ भूटान ने ‘‘ग्रॉस नेशनल हैपीनेस’’ की परिकल्पना को 1970 के दशक में स्वीकार किया था. इसके पहले उसने प्रगति को मापने के एकमात्र तरीके जीडीपी को खारिज कर दिया था.

 

राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि भारत जल्दी ही आठ.नौ प्रतिशत की सालाना विकास दर हासिल कर लेगा और तीन खरब डालर की अर्थव्यवस्था वाला देश हो जाएगा.

 

उन्होंने सामाजिक वैज्ञानिकों से यह पहचान करने को कहा कि किस प्रकार पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना प्रगति हासिल की जा सकती है. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और मानसून की अनियमितता का देश और उसके लोगों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है.

 

सम्मेलन की थीम ‘‘विकास, विविधता और लोकतंत्र’’ के संदर्भ में मुखर्जी ने कहा कि आजादी के बाद शुरूआती दिनों में कइयों के मन में आशंका होती थी कि क्या भारत में लोकतंत्र कायम रह पाएगा.

 

उन्होंने कहा कि बहरहाल, हमारा लोकतंत्र काफी सफल रहा है. 2014 के लोकसभा चुनावों ने स्थापित कर दिया है कि किस प्रकार देशवासी अपने खुद के शासन के लिए पूरी तरह से सक्षम हैं.

 

मुखर्जी ने कहा कि लोकतंत्र का मतलब सिर्फ मतदान और चुनाव नहीं है बल्कि यह इससे कहीं बढ़कर है . उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संविधान ने समग्र न्याय – सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक को समाहित किया है . हम एक को पूरा करने के क्रम में दूसरे पहलू की अनदेखी नहीं कर सकते .’’

 

भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे की अगुवाई वाले प्रदर्शन की तरफ इशारा करते हुए मुखर्जी ने कहा कि जन जागरूकता के जरिए नागरिकों को एकजुट किया गया और सरकार को समाजसेवियों से बातचीत के लिए विवश होना पड़ा .

 

भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल कानून के पारित होने का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘यह दिखाता है कि हमारी राजनीतिक व्यवस्था एक आदर्श के तौर पर विकसित हुई है जहां लोग हर चरण में कानून एवं कार्रवाई पर नजर रखते हैं, भले ही निर्वाचित प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार उनके पास नहीं हो .’’

 

भारतीय समाज में विविधता की ताकत के बाबत मुखर्जी ने कहा, ‘‘एक जैसी चीजें हर जगह कायम करने की कोशिशें नाकाम हुई हैं और भारतीय स5यता क्षसलिए बची हुई है क्योंकि इसमें विविधता एवं एक-दूसरे के प्रति सहिष्णुता है .’’

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Web Title: pranav mukharji
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