सुलह की कोशिश या प्रशांत- योगेंद्र को बाहर भेजने का रास्ता बनाया जा रहा है?

By: | Last Updated: Wednesday, 18 March 2015 1:02 PM

नई दिल्ली: एक बार फिर एक चिट्ठी ने आम आदमी पार्टी में विवाद की आग को हवा दे दी है . चिट्ठी प्रशांत भूषण ने लिखी और भेजी गई अरविंद केजरीवाल को . लेकिन चिट्ठी की बात लीक हो गई है .

 

सूत्रों के मुताबिक चिट्ठी में प्रशांत ने स्वराज, पारदर्शिता और आतंरिक लोकतंत्र से जुड़े मसलों पर पार्टी में चर्चा और उसके समाधान की बात लिखी है . चिट्ठी में ये भी कहा गया है कि मुद्दे अहम हैं, पार्टी का कोई पद अहम नहीं है .

 

टीम प्रशात भूषण का कहना है कि नोट है. पार्टी महत्वपूर्ण है पद नहीं. टीम केजरीवाल का कहना है कि अगर पार्टी महत्वपूर्ण है तो चिपके क्यों हैं. पद क्यों रखा  है.

 

पहले खबर आई थी कि प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने अपने दिये सुझाव मान लेने पर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफे की पेशकश की है . लेकिन एबीपी न्यूज को प्रशांत भूषण ने बताया कि उन्होंने इस्तीफे की पेशकश नहीं की है . सिर्फ पार्टी के हित से जुड़े मुद्दे उठाये हैं .

 

पहले पीएसी का फैसला, फिर प्रशांत की चिट्ठी

 

मंगलवार की रात प्रशांत और योगेंद्र की गैरमौजूदगी में पीएसी की पहली बैठक हुई . इस बैठक में पार्टी को दिल्ली से बाहर भी मजबूत करने का फैसला हुआ . योगेंद्र और प्रशांत यही बात पहले से करते रहे हैं . ऐसे में जब यही फैसला लेना था तो फिर योगेंद्र-प्रशांत को पीएसी से बाहर क्यों किया ?

 

दिल्ली से बाहर जाने की मजबूरी क्यों ?

 

28 मार्च को पार्टी की काउंसिल की बैठक से पहले दूसरे राज्यों को संदेश देने की कोशिश की गई है कि धीरज रखें . समय पर विस्तार किया जाएगा . पार्टी की काउंसिल में राज्यों का प्रतिनिधित्व ज्यादा है . इसलिए केजरीवाल गुट राज्यों के प्रतिनिधि को अपने साथ जोड़े रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है .

 

काउंसिल का फैसला केजरीवाल के पक्ष में जाने पर पार्टी की पीएसी और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पुनर्गठन का रास्ता साफ हो जाएगा . ऐसे में केजरीवाल खेमा इन दोनों जगहों पर मनमाफिक बदलाव कर सकता है .

 

केजरीवाल गुट ऐसा इसलिए भी करना चाहता है क्योंकि 4 मार्च को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में योगेंद्र यादव को 11 के मुकाबले 8 वोट मिले थे .

 

इलाज के बाद केजरीवाल के दिल्ली आते ही योगेंद्र यादव से सुलह सलाह की कोशिश शुरू हुई थी . चार नेता योगेंद्र से मिले भी थे . लेकिन प्रशांत भूषण की किसी से मुलाकात नहीं हुई है . केजरीवाल ने व्यस्त होने का हवाला देकर प्रशांत को मिलने का समय अभी नहीं दिया है लेकिन आज भी वो पार्टी दफ्तर में लोगों से मिले हैं . सवाल ये है कि पार्टी में सुलह की कोशिश हो रही है या फिर प्रशांत- योगेंद्र को बाहर भेजने का रास्ता बनाया जा रहा है .

 

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Web Title: prasant write a letter
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