प्रसार भारती की नीतियां ‘पुरानी, गलत’ : सरकार

By: | Last Updated: Monday, 18 August 2014 11:47 AM
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कोलकाता: प्रसार भारती की नीतियां ‘पुरानी और गलत’ हैं और इनकी समीक्षा किए जाने की जरूरत है . यह बात लोक प्रसारक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जवाहर सरकार ने कही .

 

सरकार मीडिया की उन खबरों का जिक्र कर रहे थे जिनमें कोलकाता के दो स्टेशनों एफएम रेनबो और एफएम गोल्ड में काम कर रहे 35 वर्ष से ज्यादा के 100 से ज्यादा अस्थायी आर जे को इस महीने की शुरूआत में ‘बख्रास्त’ कर देने की बात है.

 

उन्होंने कहा, ”इस मामले में मुझसे विचार..विमर्श नहीं किया गया …लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि किसी को भी बख्रास्त नहीं किया गया . यह शरारतपूर्ण है . हम मामले पर गौर कर रहे हैं और नीति की समीक्षा हो रही है .”

 

‘बख्रास्त आरजे’ द्वारा इस सिलसिले में संवाददाता सम्मेलन किए जाने के तुरंत बाद सरकार ने ट्वीट किया था, ‘‘हमने डीजी से बख्रास्त नहीं करने को कहा . यह शरारत है . नीति की समीक्षा चल रही है .’’ यह पूछने पर कि प्रसार भारती पैनल के सुझाव के मुताबिक अगर आरजे वॉयस मॉडुलेशन जांच में असफल रहते हैं तो उनकी स्थिति क्या होगी तो सरकार ने कहा, ‘‘देखते हैं.. हर पेशे में कौशल की जरूरत होती है .

 

करदाताओं के धन का संतोषजनक इस्तेमाल होना चाहिए .’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैं यहां जोर देना चाहूंगा कि खिड़कियां खुली हैं और उम्र मानदंड नहीं है .’’ प्रसार भारती ने वास्तव में बयान जारी कर कहा था कि अस्थायी उद्घोषकों, आरजे और समाचार वाचकों जो अस्थायी हैं या स्थायी सेवा में आने की इच्छा रखते हैं, सभी का कौशल परीक्षण होगा .

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