अब चिट्ठी लिखकर योगेंद्र-प्रशांत ने खोली केजरीवाल की 'डर्टी पॉलिटिक्टस' की पोल

By: | Last Updated: Wednesday, 11 March 2015 10:23 AM
Prashant and Yogendra answer to kejriwal

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी का महाभारत अपने चरम की ओर बढ़ रहा है. पार्टी के बड़े नेताओं के जरिए योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के पीएसी से विदाई का कारण गिनाए जाने के दूसरे दिन योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने साझा बयान जारी कर पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब दिया है.

 

योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने पार्टी नेतृत्व से मांग की है कि उनका जवाब भी पार्टी की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए.

 

योगेंद्र ने साफ तौर पर कहा है कि संयोजक पद का मुद्दा न था और न है. इसके साथ ही योगेंद्र यादव ने केजरीवाल पर बड़ा आरोप ये लगाया है कि लोकसभा चुनाव के बाद केजरीवाल ने कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनाने की बात कही थी.

 

आपको बता दें कि 4 मार्च को योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की पीएसी से छुट्टी कर दी गई थी. पार्टी के आरोपों के मुताबिक इन दोनों ने हर मोर्चे पर पार्टी को कमजोर करने की साजिश की है.

 

योगेंद्र-प्रशांत के केजरीवाल पर आरोप

 

इस चिट्ठी से अरविंद केजरीवाल की अलग तरह की राजनीति करने के दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं. इस चिट्ठी मे कई ऐसी बात हैं जो आम आदमी पार्टी को कार्यकर्ताओं और समर्थकों दोनों को ही निराश कर देंगी.

 

इस चिट्ठी में जो बड़े खुलासे किए गए हैं उन पर एक नजर

 

1. लोकसभा में बुरी तरह हारने के बाद दिल्ली में एक बार फिर कांग्रेस के साथ सरकार बनाना चाहते थे केजरीवाल

 

2.दिल्ली के ज्यादातर विधायकों ने उस वक्त केजरीवाल का साथ दिया था.

 

3. उस वक्त कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था.

 

4. विरोध के बावजूद एलजी को सरकार बनाने के लिए चिट्ठी लिखी गई.

 

5. बीते नवंबर तक केजरीवाल इस कोशिश में जूटे रहे कि दिल्ली में सरकार कांग्रेस के साथ मिलकर बनाई जा सके.  

 

6. हम दोनों ने उस वक्त इसका विरोध किया था और तभी से मतभेद शुरु हुआ.

 

7. हार से लेकर अब तक संयोजक के पद पर कोई बवाल नहीं.

 

8.  हार के बाद पीएसी भंग करने का प्रस्ताव  संजय, सिसौदिया का था.

 

9. राज्यों के चुनाव लड़ने का फैसला राज्यों को करना था पर केजरीवाल  राज्यों को करने देने के खिलाफ थे.

 

10. भड़काऊं पोस्टर के आरोपी अमानातुल्लाह को टिकट दिया और ओखला प्रभारी भी बनाया.

 

11. दिल्ली में संगीन आरोपियों को टिकट बांटे गए.

 

12.अनुसाशन समिति प्रमुख प्रशांत आवाम पर कड़ी कार्रवाई करना चाहते थे.

 

कुमार विश्वास का जवाब

 

योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की चिट्ठी के बाद कुमार विश्वास ने ट्वीट कर इसे पार्टी के लिए एक नाजुक मौका करार दिया.

 

विश्वास ने ट्वीट किया, “ये पहला अवसर नहीं है. सत्य की लड़ाई में ऐसे भीषण मौक़े 4 साल में अनेकों आए और मुँह की खाकर गए. आख़िरकार सच ही जीतेगा.”

 

सहरावत का केजरीवाल खेमे पर हमला

 

आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता और विधायक कर्नल देवेंद्र सहरावत ने भी योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण का बचाव किया है. उनका कहना है कि जब योगेंद्र और प्रशांत को उनकी ग़लती के लिए पीएसी से निकाला जा चुका था तो फिर उनपर हमले नहीं होने चाहिए थे.

 

सहरावत ने कहा, “एक ही गलती के लिए किसी को दो-दो बार सजा नहीं हो सकती. स्वाभाविक न्याय की थेयरी यही कहती है.”

 

योगेंद्र-प्रशांत पर क्या आरोप लगाए गए थे?

 

पार्टी के चार बड़े नेताओं गोपाल राय, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और पंकज गुप्ता ने चिट्ठी लिखी है.

 

पहला आरोप: दिल्ली चुनाव में हराने का आरोप

 

चिट्ठी में लिखा है कि जब सारे कार्यकर्ता आम आदमी पार्टी को जिताने के लिए अपना पसीना बहा रहे थे, उस वक़्त हमारे तीन बड़े नेता पार्टी को हराने की पूरी कोशिश कर रहे थे. ये तीनों नेता हैं- प्रशांत भूषण, योगेन्द्र यादव और शांति भूषण. प्रशांत भूषण ने, दूसरे प्रदेशों के कार्यकर्ताओं को फ़ोन कर कर के दिल्ली में चुनाव प्रचार करने आने से रोका. प्रशांत जी ने दूसरे प्रदेशों के कार्यकर्ताओं को कहा – “मैं भी दिल्ली के चुनाव में प्रचार नहीं कर रहा. आप लोग भी मत आओ. इस बार पार्टी को हराना ज़रूरी है, तभी अरविन्द का दिमाग ठिकाने आएगा.”

 

दूसरा आऱोप: पार्टी को चंदा देने से रोका

 

चिट्ठी के मुताबिक जो लोग पार्टी को चंदा देना चाहते थे, प्रशांत भूषण ने उन लोगों को भी चंदा देने से रोका. इस आरोप को बल उस लीक हुए ईमेल से मिला है जो प्रशांत की बहन शालिनी गुप्ता ने डोनर्स को भेजा था जिसमें फंड के अनुचित इस्तेमाल की बात कही गई थी.

 

तीसरा आरोप: पार्टी के खिलाफ़ धमकी

 

पार्टी के चार नेताओं की तरफ से जारी चिट्ठी के मुताबिक  पूरे चुनाव के दौरान प्रशांत भूषण ने बार-बार ये धमकी दी कि वे प्रेस कांफ्रेंस करके दिल्ली चुनाव में पार्टी की तैयारियों को बर्बाद कर देंगे. उन्हें पता था की आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर है. और अगर किसी भी पार्टी का एक वरिष्ठ नेता ही पार्टी के खिलाफ बोलेगा तो जीती हुई बाजी भी हार में बदल जाएगी.

चौथा आरोप

 

मीडिया में कुछ उलट-पुलट ना बोलें इसके लिए प्रशांत भूषण और उनके पिताजी को समझाने के पार्टी के लगभग 10 बड़े नेता प्रशांत भूषण के घर पर लगातार 3 दिनों तक उन्हें समझाते रहे. ऐसे वक़्त जब आम आदमी पार्टी के नेताओं को प्रचार करना चाहिए था, वो लोग इन तीनों को मनाने में लगे हुए थे.

 

पांचवां आरोप

 

पांचवां आरोप योगेंद्र यादव पर है चिट्ठी के मुताबिक पार्टी के पास तमाम सबूत है जो दिखाते है कि कैसे अरविंद की छवि को ख़राब करने के लिए योगेंद्र यादव ने अखबारों में नेगेटिव ख़बरें छपवाईं. 2014 अगस्त में हिंदू अख़बार में एक आर्टिकल में अरविंद और पार्टी की एक नकारातमक तस्वीर पेश की गयी. जिस पत्रकार ने ये खबर छापी थी, उसने पिछले दिनों इसका खुलासा किया कि कैसे योगेंद्र यादव खबर प्लांट की थी.

 

छठा आरोप

 

दिल्ली चुनाव से ऐन पहले अवाम ने पार्टी में चंदे को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे. चिट्ठी में कहा गया है कि ‘अवाम’ को भाजपा संचालित करती है ‘अवाम’ ने चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी को बहुत बदनाम किया औऱ ‘अवाम’ को प्रशांत भूषण ने खुलकर सपोर्ट किया था. शांति भूषण जी ने तो ‘अवाम’ के सपोर्ट में और ‘आप’ के खिलाफ खुलकर बयान दिए.

 

सातवां आरोप

 

चुनावों के कुछ दिन पहले शांति भूषण जी ने कहा कि उन्हें भाजपा की CM उम्मीदवार किरन बेदी पर अरविंद से ज्यादा भरोसा है. पार्टी के सभी साथी ये सुनकर दंग रह गए. कार्यकर्ता पूछ रहे थे कि यदि ऐसा है तो फिर वे आम आदमी पार्टी में क्या कर रहे हैं, भाजपा में क्यों नहीं चले जाते?

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