'आप' में कलह तेज, प्रशांत भूषण ने कहा- संयोजक का पद छोड़ें केजरीवाल

By: | Last Updated: Monday, 2 March 2015 2:45 AM

नई दिल्ली: आप के भीतर संकट गहरा गया है. पार्टी पर वरिष्ठ नेता प्रशांत भूषण ने दिल्ली चुनावों के दौरान अरविंद केजरीवाल के इर्द-गिर्द ‘एक व्यक्ति केंद्रित’ अभियान चलाने का आरोप लगाया, जो उसके सिद्धांतों के विपरीत है.

 

प्रशांत भूषण और पार्टी के आंतरिक लोकपाल रामदास ने चिट्ठी लिखकर अपनी नाराजगी जताई है. प्रशांत भूषण ने आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को चिट्ठी में केजरीवाल और पार्टी के कामकाज पर कई सवाल खड़े किए हैं. भूषण ने फंडिंग पर सवाल उठाते हुए कार्यकर्ताओं को श्रेय ना देने जैसे आरोप भी लगाए हैं.

 

भूषण ने आप की राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्यों को एक पत्र में लिखा है, ‘एक व्यक्ति केंद्रित प्रचार से हमारी पार्टी अन्य दूसरी पारंपरिक पार्टियों की तरह बनती जा रही है जो एक व्यक्ति पर केंद्रित है. भिन्नता इतनी है जिसके बारे में हम दावा कर सकते हैं कि स्वराज का सिद्धांत जो उनके पास नहीं है.’

 

उन्होंने कहा है, ‘एक व्यक्ति केंद्रित अभियान असरदार हो सकता है लेकिन तब क्या अपने सिद्धांतों को उचित ठहराया जा सकता है? अगर हम सुप्रीमो नियंत्रित पार्टी से आगे जाना चाहते हैं तो हमें इसमें सुधार पर सहमति बनानी होगी.’

 

आंतरिक लोकपाल की चिट्ठी से आप में हलचल

आप के आतंरिक लोकपाल पूर्व एडमिरल एल रामदास ने सीएम रहते हुए केजरीवाल के संयोजक बने रहने पर सवाल उठाए हैं. रामदास ने आपसी गुटबाजी पर चिट्ठी लिखी है. रामदास ने पार्टी के बड़े नेताओं के बीच आपसी मतभेद, दिल्ली सरकार में किसी महिला को मंत्री न बनाने जैसे मुद्दों पर निशाना साधा है.

 

रामदास ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले पिछले सप्ताह राजनीतिक परामर्श समिति (पीएसी) को लिखे एक पत्र में यह स्पष्ट करने पर अधिक जोर दिया है कि क्या केजरीवाल दो पद दिल्ली के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय संयोजक संभाल सकते हैं. उन्होंने इसके साथ ही कहा कि शीर्ष नेतृत्व में ‘‘संवाद और परस्पर विश्वास पूरी तरह से विफल’’ हो गया है जो कि ‘‘अस्वीकार्य’’ है.

 

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘आज हम एक राष्ट्रीय पार्टी हैं और हम अपनी दृष्टि दिल्ली या राजधानी के भीतर कुछ क्षेत्र तक सीमित नहीं रख सकते,’’ यह रूख केजरीवाल के विपरीत है जिन्होंने कहा है कि पार्टी दिल्ली पर ध्यान केंद्रित रखेगी. केजरीवाल परोक्ष रूप से योगेंद्र यादव सहित उन नेताओं से अप्रसन्न हैं जिन्होंने इसके अन्यथा सुझाव दिये हैं.

 

दूसरी पार्टियों को एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत का पालन करने की नसीहत देने वाली आम आदमी पार्टी भले ही इस मामले में अपनी मजबूरी गिना रही हो. लेकिन एल रामदास का दूसरा आरोप कहीं ज्यादा गंभीर है.

 

उन्होंने चिट्ठी में आगे लिखा है, ‘पिछले छह महीने के दौरान पार्टी के बड़े नेताओं में आपसी विश्वास और बातचीत का अभाव देखा गया है.मुझे बेहद अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि पार्टी की बैठकों में जो फैसले लिये गए, वो कुछ मिनटों में बाहर लीक हो गए. बैठक के अंदर होने वाली बातचीत रिकॉर्ड हो गई और बाहर अपलोड कर दी गई. बिना जवाबदेही के स्टिंग ऑपरेशन हुए. 14 फरवरी को रामलीला मैदान में हम सबने सुना कि हमारे मंत्रियों ने लगता है कि उपराज्यपाल के शपथ दिलाने के पहले ही पद और गोपनीयता की शपथ ले ली थी. मैं ये नहीं कहता कि राजनीतिक पार्टी में सेना जैसा अनुशासन होना चाहिए. लेकिन कुछ नियम ,कानून और गोपनीयता तो जरूर होनी चाहिए.’

 

आम आदमी पार्टी के बड़े नेता और पीएसी के सदस्य प्रोफेसर आनंद कुमार ने एबीपी न्यूज से बातचीत में कहा है कि अरविंद केजरीवाल उनकी पार्टी की सबसे बड़ी पहचान है लिहाजा उन्हें बदलने की गलती हम नहीं कर सकते.

 

संजय सिंह के शांति भूषण पर सवाल

केजरीवाल को संयोजक पद से हटाने की मांग करने वालों पर संजय सिंह ने निशाना साधा है. संजय सिंह ने ट्विट करते हुए कहा है, ‘जो लोग अरविन्द केजरीवाल को संयोजक पद से हटाना चाहते हैं क्या उन्हें देश के कार्यकर्ताओ की भावना का ख्याल है? ‘

 

इससे पहले शांति भूषण भी केजरीवाल को संयोजक पद से हटने की मांग कर चुके हैं. शांति भूषण ने कहा था कि केजरीवाल को सीएम बनने के बाद संयोजक पद छोड़ देना चाहिए-एक ही व्यक्ति का दो पदों पर रहना ठीक नहीं–ऐसे में  योगेंद्र यादव को संयोजक बना दिया जाना चाहिए.

 

इससे पहले आम आदमी पार्टी की पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अरविंद केजरीवाल को फिर से आम आदमी पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक चुना गया और उन्हें नई पीएसी के गठन के लिए अधिकृत कर दिया गया था.

 

सूत्रों के मुताबिक अब खबर थी कि राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी)  से प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव की छुट्टी हो सकती है. राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में कुछ नेताओं के साथ योगेंद्र यादव की बहस भी हो गई. यहां पर दिल्ली चुनाव में योगेंद्र यादव भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए.

 

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Web Title: Prashant Bhushan questions decisions taken by Arvind Kejriwal
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