मोदी का 'चाणक्य' अब नीतीश के साथ बना रहा है चुनावी रणनीति!

By: | Last Updated: Thursday, 2 July 2015 4:01 PM
prashant kishore

नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी को गुजरात की गली से दिल्ली के राजपथ पर पहुंचाने वाला चाणक्य अब बिहार चुनाव में भी कूद पड़ा है. लेकिन इस बार मोदी के साथ नहीं बल्कि उनके विरोधी नीतीश कुमार के साथ. फिर एक बार नीतीश सरकार बनवाने के लिए. प्रशांत किशोर ऐसे रणनीतिकार है जो राजनीति में सपनों के सौदागर माना जाता है.

 

बिहार में चुनाव की दस्तक सुनाई दे रही है और बिहार की गलियों में नीतीश की दस्तक. गहमागहमी की तस्वीरे उसी चुनावी जंग की है जिसमें नीतीश कुमार ने अपना पहला तीर चल दिया है.

 

नीतीश ने आज पटना में खुद पार्टी के चुनाव अभियान – घर घर दस्तक की शुरुआत कर दी है. घर घर दस्तक यानी आम लोगों के घरों पर जाना, सरकारी की उपलब्धियां बताना, वोटरों का मन टटोलना और फिर दरवाजे पर चुनाव अभियान के नारे का स्टिकर लगाना.

 

असर भी दिखने लगा है. नीतीश कुमार के इस घर-घर दस्तक कार्यक्रम के दौरान बेशुमार भीड़ नजर आ रही है और बता रही है कि नीतीश की दस्तक बिहार के दिल के दरवाजे खोलने का दम रखती है.

 

अगर ये करिश्मा चल निकला तो एक बार फिर उसी शख्स का नाम लिया जाएगा जो मोदी की जीत की कहानी लिख चुका है यानी प्रशांत किशोर. साल 2013 में नरेंद्र मोदी की पीएम उम्मीदवारी को लेकर बिहार में बीजेपी से 17 साल पुराना गठबंधन छोड़कर नीतीश ने बड़ा दांव खेला था. अब जब चुनाव सर पर हैं तो नीतीश कुमार ने एक और दांव खेला है. बिहार चुनाव से ऐन पहले वो साल 2014 के लोकसभा मोदी के चुनाव अभियान के चाणक्य को वो अपने पाले में ले आए हैं. नीतीश का घर घर दस्तक कार्यक्रम उन्हीं प्रशांत किशोर की देन है जिन्हें मोदी की ब्रैंडिंग के लिए जाना जाता है.

 

प्रशांत कुमार इन दिनों बिहार में डेरा डाल चुके हैं और नीतीश के चुनाव प्रचार की पूरी कमान उनकी टीम ने संभाल ली है. प्रशांत के अगुवाई में नीतीश के चुनावी अभियान का वॉर रूम तैयार है. और प्रशांत किशोर की पोटली में नीतीश के लिए और क्या क्या है ये भी बताएंगे लेकिन पहले आपको उस दौर में ले चलते हैं जहां से प्रशांत ने भारत में पहली बार पोलिटिकल मैनेजमेंट की शुरुआत की थी.

 

साल 2014 का लोकसभा चुनाव मोदी के खेमे ने पूरी तरह हाईटेक बना दिया था. देश पहली बार एक ही शख्स को दर्जनों जगह रैली करता हुआ देख रहा था. और विपक्ष के पास इस 3डी मोदी अभियान को कोई तोड़ नहीं था.

 

3D मोदी कैंपेन की पूरी डिजाइन जिस शख्स ने तैयार की थी उसका नाम था प्रशांत किशोर. वही प्रशांत किशोर बिहार चुनाव में नीतीश के साथ जा पहुंचे हैं. दरअसल ये तकनीक जर्मनी में तैयार की गई थी. अमेरिका के चुनावों में इस्तेमाल हो चुकी थी. इसका बाजार भारत में तलाशा गया तो सोनिया और राहुल गांधी का नाम सामने आया लेकिन उन्होंने इसमें रुचि नहीं दिखाई. प्रशांत ने ये आईडिया नरेंद्र मोदी को दिया और बात बन गई.

 

इस 3D  तकनीक का इस्तेमाल मोदी ने पहले गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए किया और फिर चुनाव प्रचार में. इस अभियान ने नरेंद्र मोदी की छवि बदल दी और इस छवि को गढ़ने का काम प्रशांत लगातार कर रहे थे.

 

दरअसल नरेंद्र मोदी से प्रशांत की मुलाकात साल 2011 में ही हो चुकी थी. प्रशांत किशोर बलिया के रहने वाले थे और संयुक्त राष्ट्र के हेल्थ मिशन के तौर पर अफ्रीका में अपनी शानदार नौकरी छोड़कर आए थे. वो और उनके कुछ दोस्तों ने तय किया कि देश के राजनीतिक माहौल में कुछ करना चाहिए और फिर जन्म हुआ सीएजी. ये वो प्लेटफॉर्म था जिससे शुरू हुआ था मोदी का चुनावी अभियान.

 

प्रशांत ने सीएजी की वेबसाइट पर मोदी के लिए सोशल मीडिया के दरवाजे खोले. फेसबुक और ट्विटर के जरिए मोदी युवाओं के बीच लोकप्रिय होने लगे और फिर प्रशांत ने पूरे कैंपेन को मोदी के इर्द-गिर्द केंद्रित कर दिया. चुनाव प्रचार अभियान की टीम ने नारा दिया अबकी बार मोदी सरकार.

 

प्रशांत और उनकी टीम के मनीष बार्डिया जैसे लोगों ने मोदी को हर वोटर का चेहरा बना दिया. बारी थी मोदी मास्क की. लेकिन प्रशांत को जिस सबसे कामयाब अभियान के लिए जाना जाता है वो थी चाय पर चर्चा.

 

पूरे देश में नरेंद्र मोदी से सीधे मुलाकात का जरिया बन गई चाय पर चर्चा. नाम भी लोगों की जुबान पर चढ़ गया. महज 37 साल के प्रशांत किशोर ने चुनावी माहौल को बदल दिया. मोदी का चुनावी अभियान मोदी लहर में बदल गया. लेकिन लोकसभा चुनाव में जीत के बाद बीजेपी ने चार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की मदद नहीं लेने का फैसला कर लिया.

 

दो साल तक मोदी के लिए काम करने वाले प्रशांत कुमार शायद इसी नाते बिहार चुनाव में नीतीश कुमार के लिए चाणक्य बन गए हैं. प्रशांत कुमार इन दिनों पटना में जेडीयू मुख्यालय को नीतीश के पोस्टरों से पाटने में जुटे हैं. मोदी के कैंपेन की ही तर्ज पर प्रशांत की टीम नीतीश कुमार के लिए नए नारे गढ़ रही है.

 

प्रशांत की टीम करीब दो महीने से काम कर रही है. शुरुआत हुई थी मोदी की चाय की चर्चा की ही तरह पर्चे पर चर्चा और नाश्ते पर चर्चा कैंपेन से. इसके बाद 27 जून को नीतीश कुमार के फेसबुक पेज पर नीतीश कनेक्ट के नाम से ऑनलाइन जनता दरबार भी शुरू किया गया. इस पेज पर लोगों के सुझाव और शिकायतें आती हैं और फिर उन लोगो के मोबाइल नंबर तलाशे जाते हैं. रिंगटोन भेजने के लिए एक अलग टीम है जो उन नंबरों पर नीतीश की आवाज में रिकॉर्डेड मैसेज भेजती है.

 

रणनीति का अहम केंद्र है लोगों को नीतीश से जोड़ना और पूरे माहौल को एक उत्सव में बदलना. इसलिए नीतीश कुमार के चुनाव अभियान में गाने भी मसालेदार हैं. इन गानों की सीडी घर घर पहुंचाने की योजना बनाई गई है. और ये सब कुछ हो रहा है इस रणनीति केंद्र में यानी नीतीश कुमार का वो वॉर रूम जो प्रशांत किशोर की अगुवाई में काम कर रहा है. यहां हर जिले हर सीट का डाटा जुटाया जा रहा है. हर जगह के मुद्दों को समझना और फिर चुनाव प्रचार अभियान को डिजाइन करना प्रशांत किशोर की टीम का काम है.

 

दरअसल मोदी के चुनाव अभियान और नीतीश कुमार के चुनाव अभियान में प्रशांत किशोर के मुताबिक जो फर्क था वो जमीनी कार्यकर्ताओं का ना होना. प्रशांत ने 400 लोगों की टीम बनाई और फिर कार्यकर्ताओं को इस तरह से ट्रेनिंग देनी शुरू की.

 

इस एक अभियान से नीतीश कुमार को 3 से 4 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचाने की तैयारी में हैं प्रशांत किशोर की ये टीम. दरअसल प्रशांत किशोर ने जो हिसाब लगाया है उसके मुताबिक बिहार में 7 से 12 फीसदी लोग जाति के आधार पर वोट नहीं करते. ये वो लोग हैं जिनकी उम्र 25 साल के आस पास है और या तो पहली बार वोट देंगे या फिर दूसरी बार. प्रशांत इस युवा वर्ग को नीतीश के करीब लाना चाहते हैं. इसके लिए अब मोदी की तरह ही नीतीश को भी डिजिटल दुनिया का बाशिंदा बनाया जा रहा है. देखना है ये कि सपनों के सौदागर प्रशांत किशोर नीतीश के लिए भी वही करिश्मा कर पाते हैं या नहीं जो उन्होंने मोदी के लिए किया था.

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