राष्ट्रपति ने कहा, क्या हमारा लोकतंत्र शोर-शराबे से भरा हो गया है?

By: | Last Updated: Thursday, 14 August 2014 4:51 PM

नई दिल्ली: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संसद की कार्यवाही बाधित किए जाने को पूरी तरह से खारिज करते हुए आज कहा कि यह वक्त की जरूरत है कि लोकतंत्र को मजबूत करने वाली संस्थाओं की श्रेष्ठता और गौरव को पुन:स्थापित किया जाए.

 

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश के नाम दिए संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘कभी कभी मैं सोचता हूं कि क्या हमारा लोकतंत्र बहुत शोरगुल युक्त हो गया है? क्या हम विचारशीलता और शांतिपूर्ण चिंतन की कला खो चुके हैं? क्या यह समय नहीं आ गया है कि हम अपने खूबसूरत लोकतंत्र को बनाए रखने और मजबूती प्रदान करने वाली संस्थाओं की श्रेष्ठता एवं गौरव को पुन:स्थापित करें.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘क्या संसद को एक बार फिर से गंभीर विचार मंथन और अच्छे विचार से निर्मित कानून की महान संस्था नहीं बन जाना चाहिए? क्या हमारी अदालतों को न्याय का मंदिर नहीं बन जाना चाहिए? इस सब के लिए सभी भागीदारों के सामूहिक प्रयास की जरूरत है.’’

 

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता एक उत्सव है, आजादी एक चुनौती है. आजादी के 68वें वर्ष में, हमने तीन दशकों के बाद एक उल्लेखनीय शांतिपूर्ण मतदान प्रक्रिया के द्वारा एक दल की स्पष्ट बहुमत के साथ स्थिर सरकार चुनते हुए अपनी व्यक्तिगत तथा सामूहिक स्वतंत्रता की शक्ति को पुन: व्यक्त किया है.

 

मुखर्जी ने कहा कि पिछले बार के 58 फीसदी मतदान की तुलना में इस बार 66 फीसदी मतदान का होना हमारे लोकतंत्र की उर्जा को दर्शाता है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘इस उपलब्धि ने हमें नीतियों, परिपाटियों तथा प्रणालियों में सुधार करते हुए शासन की चुनौतियों का मुकाबला करने का अवसर प्रदान किया है जिससे हमारी जनता की व्यापक अकांक्षाओं को परिकल्पना, समर्पण, ईमानदारी, गति तथा प्रशासनिक क्षमता के साथ पूरा किया जा सके.’’

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