प्रेस कांन्फ्रेंस: राम मंदिर 2016 में बन जाना चाहिए, हम इसके लिए आंदोलन करेंगे-स्वामी

By: | Last Updated: Saturday, 12 September 2015 2:25 PM
press confrence Subramanian Swamy

एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम प्रेस कांन्फ्रेंस में  बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी-

 

स्वामी ने कई सवालों के खास जवाब दिए. साथ ही किया कुछ बड़ा खुलासा. पढ़ें पूरा इंटरव्यू –

 

सवाल दिबांग– ये बात बताइए कि जिस तरह से आप हैं, ऐसे हैं क्यों?

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- लोग कहते हैं कि जो लोग वृद्ध होते हैं टेंशन से नर्वसनेस से, मैं तो दूसरे लोगों को टेंशन देता हूं इसलिए कोई प्रभाव मेरे स्वास्थ्य पर नहीं पड़ता है.

 

दिबांग– मतलब आप की थ्योरी है कि टेंशन लेनी नहीं देनी है?

सुब्रमण्यम स्वामी– बिल्कुल यही मेरा काम है.

दिबांग– सबको टेंशन देना.

सुब्रमण्यम स्वामी– टेंशन देना क्योंकि वो दूसरे लोग गलत काम कर रहे हैं. तो उनको टेंशन देना. आजकल तो ऐसा है कि जो गलत काम करते हैं वो आप को टेंशन में डाल देते हैं, डरा देते हैं. हम डरते नहीं हैं उल्टा उनको डरा देते हैं.

दिबांग– दूसरों को टेंशन देने के चक्कर में कई बार आप अपनों को भी टेंशन दे देते हैं.

सुब्रमण्यम स्वामी- हां क्योंकि उनको पता नहीं है कि मैं उनका भी नाम कभी नहीं लूंगा या उनके ऊपर केस नहीं डालूंगा. तो टेंशन तो होगा ही.

 

सवाल सिद्धार्थ- डाक्टर साहब आपका राजनीतिक करियर देखा जाए तो अंग्रेजी में कहते हैं बंडल ऑफ कॉन्ट्राडिक्शन. विरोधाभास की पोटली बिल्कुल दिखती है. आप आरएसएस विचारधारा के करीब समझे जाते हैं लेकिन चंद्रशेखर जी समाजवादी बड़े अच्छे नेता रहे. आप सोनिया गांधी और जयललिता को बैठकर चाय पिलाते हैं और आरएसएस समर्थित सरकार गिरा देते हैं और फिर चाय में पता नहीं कौन सी चीनी मिलाई कि अगले 10-15 साल के लिए उनका जीवन कड़वा कर देते हैं. ऐसा क्यों है कि जिससे आप हाथ मिलाते हैं, अगला स्टेप होता है कि आप उसी की जड़ खोद देते हैं.

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी– देखिए हर के लिए कारण तो है ही, जवाब लंबा हो जाएगा. मैं सक्षेप में बताता हूं कि हमने किसी से लड़ाई नहीं शुरू की लेकिन कोई मेरे से लड़ाई करे या फिर धोखा दे तो फिर मैं छोड़ता नहीं हूं. लोग तो जो लंबा मेरा संघर्ष रहा है उसको तो याद रखते हैं लेकिन मेरे साथ जो अन्याय या धोखा हुआ है उसे नहीं याद रखते. जैसे सोनिया गांधी और जयललिता को हमने चाय पिला कर के, उनके कहने पर मैंने बीजेपी सरकार को गिराया. गिराने के बाद सोनिया गांधी ने भाजपा से समझौता कर लिया क्वात्रोची के मुद्दे पर और मुझे खड्डे में छोड़ दिया तो फिर हमें उनको सबक सिखाना पड़ा. इस प्रकार से लोग कहते हैं कि पहले साथ थे अब विरोध में हो गए. सिर्फ मैं ऐसा नहीं कि आप तो जानते हैं कि सोनिया गांधी ने गुलजार की सरकार गिराई थी ये कह कर कि करूणानिधि ने उनके पति की हत्या की बाद में उनके साथ गठबंधन कर लिया. उनको कोई पूछता नहीं है लेकिन पता नहीं क्यों मुझे ही क्यों छोटी-छोटी बातों में सब पूछते रहते हैं.

 

सवाल दिबांग- स्वामी जी ये बताइए कि आप कई-कई टोपियां पहन लेते हैं. जब चाहें आप बड़े अच्छे प्रोफेसर बन जाते हैं, लोग बताते हैं कि बहुत ही प्रतिभाशाली प्रोफेसर रहे आप हावर्ड में फिर आप नेता बन जाते हैं. अगर ये मैं आप से पूछूं कि ये जो मौजूदा सरकार है, जिस तरह से अब तक मोदी सरकार ने काम किया है, उसको आप कैसे आंकते हैं.

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- मेरे ख्याल में मैं न्याय तभी कर सकता हूं कि जब ढाई साल हो जाएगें. अभी तो एक साल हुआ है

 

दिबांग-तो आधा न्याय आप क्या करेंगे?

सुब्रमण्यम स्वामी- आखिर में मोदी की पर्सनालिटी नहीं होती तो ये जो मोबलाइजेशन हम कर पाए नहीं कर सकते थे. लेकिन सिर्फ मोदी की पर्सनालिटी ने अकेले हमें नहीं जिताया. भ्रष्टाचार के विरूद्ध में जो अभियान छेड़ा गया था, उससे कांग्रेस का नाम खराब हुआ, वो एक और भी पहलू है. हिंदुत्व के कारण कई जगहों पर लोगों ने जाति से ऊपर उठ कर वोट दिया, जैसे यूपी में किया. जहां तक भ्रष्टाचार का विरोध करना है या हिंदुत्व को आगे बढ़ाना है उसके हम पीछे पड़े हैं. हमारी सरकार ज्यादातर गवर्नेंस पर जो दे रही है और उसमें जितने लोगों को मिला कर ले जाते सकते हैं, उसके लिए प्रयास किया. परंतु वो प्रयास मेरी राय में सफल नहीं हुआ है. इसका आखिरी हिसाब तब लेंगे जब थोड़ा समय बीत जाए तो इसीलिए मैंने ढाई साल कहा था.

 

सवाल राधिका- डॉ. स्वामी आप की घर वापसी, आप की पार्टी का विलय बीजेपी में काफी उत्सुकता से हुआ था. आप मोदी जी के एक ठोस समर्थक भी थे तो मोदी जी की सरकार जब बनी तो मंत्रिमंडल में शामिल ना करने से आप खफा हुए. अगर आज आप वित्त मंत्री होते तो आप की क्या प्राथमिकताएं होती और आप आज अर्थव्यवस्था को कैसे सीधा करते, जिसके हालात अभी बहुत अच्छी नहीं है.

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- मुझे अब भी नहीं समझ में आता कि क्यों मैं वित्तमंत्री नहीं बना. मुझे तो चुनाव अभियान के समय बता भी दिया गया था.

 

दिबांग- किसने बताया था आप को?

सुब्रमण्यम स्वामी- वो मैं अब नहीं बताउंगा, क्योंकि फिर उनको मुश्किल में डालूंगा.

दिबांग- किसी नेता ने बताया या…..?

सुब्रमण्यम स्वामी- जिनका बताने वाला कद है, उन्होंने बताया. फिर हुआ नहीं. बाद में ये कारण दिया गया कि सरकार चलाने के लिए स्वामी को बाहर रखना जरूरी है क्योंकि विपक्ष की मदद की आवश्यकता है राज्यसभा में. अब वो कारण तो फेल हो गया है क्योंकि विपक्ष ने दिखा दिया है कि आप जितना अच्छा हमसे व्यवहार करोगे, हम उतना ही बुरा व्यवहार करेंगे. परंतु इसमें मुझे कोई खौफ हुआ, घृणा हुई ये बात सही नहीं है क्योंकि मैदान तो बहुत है. और जो मैं कर रहा हूं, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और देश भर में हिंदूत्व  के लिए प्रचार कर रहा हूं उससे मेरी पापुलरटी आज पिछले एक-ढेड़ साल के तुलना में ज्यादा होगी. और थोड़ी बहुत तो ट्वीटर में भी पता लग जाती है और मेरी सभाएं, पेपर में तो कम आता है लेकिन जो यू ट्यूब देखते हैं वो देख सकते हैं. तो इसीलिए मुझे कोई घृणा नहीं है कि मैं सरकार में नहीं हूं.

 

दिबांग– ये जो पूछ रही हैं कि आप वित्त मंत्री होते तो आप कैसे…

सुब्रमण्यम स्वामी– हां मैं तो दूसरे रास्ते से करता

दिबांग– कोई दो बड़े काम जो आप करते

सुब्रमण्यम स्वामी– पहला मैं लोगों को उत्साहित करने के लिए इनकम टैक्स को खत्म कर देता.

दिबांग– कोई इनकम टैक्स नहीं

सुब्रमण्यम स्वामी– नो इनकम टैक्स, एकदम से हटा देता.

दिबांग– ये तो अच्छा नारा हो सकता है कि मुझे वित्तमंत्री बनाओ कोई इनकम टैक्स होगा किसी पर.

सुब्रमण्यम स्वामी– नारा नहीं मैं कर के दिखा सकता हूं.

दिबांग– पैसा कहां से आता फिर?

सुब्रमण्यम स्वामी- जो 2 लाख करोड़ घाटा होगा उस कारण से वो एक स्पेक्ट्रम के निलामी से मिल सकती है. और पहले साल 2जी का कर सकते हैं, दूसरे साल 3जी का कर सकते हैं, चौथे साल 4जी का कर सकते हैं. और कोयला का भी नीलाम होने वाला है तो उसमें भी बहुत ज्यादा मिलेगा, तो पैसे की कमी नहीं है. दूसरा है कि जो हमारे देश में ब्याज दरें हैं वो देखिए दुनिया के तुलना में कितना ज्यादा है. अमेरिका में 2 प्रतिशत ब्याज दर से आप को ऋण मिल सकता है, हमारे देश में 12 परसेंट से कम नहीं, 18 परसेंट भी जाती है ब्याज दर. किसान लोग आत्महत्या करते हैं क्योंकि उनको 25 परसेंट देना होता है. तो इस प्रकार से लोगों को खड़ा करने का कदम उठाऊंगा, आज उस रास्ते में नहीं जा रहे हम.

 

सवाल दिबांग- आप पर विश्वास कैसे करें स्वामी जी, आप जिसके साथ रहते हैं उससे लड़ जाते हैं. नानाजी देखमुख आप को उस जमाने में लेकर आए जब जनसंघ में कोई आता नहीं था. आप इतनी अच्छी जगह से वहां पर आए, आप उनसे भी लड़ लिए, आप वाजपेयी जी के खिलाफ कई बार बयान दिए.

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- नहीं नहीं ये प्रोपोगेंडा मत करिए. कई बातों पर आप गलत बोलते हैं. इन्होंने कहा कि घर वापसी हुई तो मैंने तो जनसंघ नहीं छोड़ा. जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हुआ और फिर जनसंघ के लोग जनता पार्टी छोड़ कर चले गए और उस समय बीजेपी ने गांधीवाद और समाजवाद का प्रोग्राम अपनाया जिससे मेरा कोई संबंध नहीं था. जिस दिन सरसंचालक सुदर्शन जी ने कहा कि हम दोबारा चलने वाले हैं, उस दिन हम दोबारा शामिल हो गए.

 

सवाल राजकिशोर- अब लगभग सवा साल हो चुके हैं तो आप को लगता है कि जो आर्थिक दशा और दिशा जो है ठीक है ढाई साल में आप जजमेंट देंगे कि क्या हुआ है. लेकिन आप को लगता है कि दिशा ठीक है यदि नहीं है तो कहां क्या कमी रह गई. फिर से वही दोहरा रहा हूं कि आप होते तो क्या करते.

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- दिशा तो ठीक नहीं है. क्योंकि जेटली तो वकील हैं, उनको इकोनॉमिक्स का तो कुछ पता ही नहीं है. मुझे आईएमएफ के जो वर्ल्ड बैंक के जो लोग हैं उनका भी मुझे भरोसा नहीं है. हिंदुस्तान की जो कमियां हैं, शक्ति है उसको ध्यान में रख कर कदम उठाना चाहिए. आज भी मैं कहता हूं कि इक्सटैक्स को खत्म करो, एक उत्साह आएगा. जिससे लोग पैसे की बचत करेंगे और बचत से पूंजी होगी, पूंजी से ग्रोथ बढ़ेगी. इसी प्रकार से हमारे देश में जो नदियां हैं उनका एक ग्रिड बनाएंगे तो इतना रोजगार पैदा होगा. इन्फ्रास्टक्चर पर हमने बोला तो बहुत है लेकिन अभी तक कुछ क्रियान्वित नहीं हुआ है. इसी प्रकार से हमें प्रोजेक्ट करने चाहिए दो बातों के लिए, एक लोगों की बचत बढ़ानी चाहिए, दूसरा लोगों के ब्याज को कम करना चाहिए और तीसरा रोजगार पैदा करना चाहिए ये तीन चीज करनी चाहिए.

सवाल दिबांग- स्वामी जी आप ने मुझे शुरू में ही हैरान कर दिया कि आप को वजह नहीं मालूम ऐसा बहुत कम है कि सुब्रमण्यम स्वामी को किसी चीज की वजह नहीं मालूम हो. दो नाम थे एक आप का नाम था और एक अरूण शौरी का नाम था. दोनों कहीं दिखाई ही नहीं दे रहे हैं. दोनों वित्त मंत्री के दौड़ में थे तो ऐसा क्या हुआ कि ये रह गए.

 

सुब्रमण्यम स्वामी– ऐसा नहीं है मैं तो आप के चैनल में दिखाई दे रहा हूं, देश भर में दिखाई दे रहा हूं. मैं दोड़ में नहीं था

दिबांग– दोनों का नाम था. आप तो कह रहे हैं कि आप को बताया भी गया था.

सुब्रमण्यम स्वामी- हां बताया गया था परंतु कारण क्या रहा मैं यदि प्रयास करता तो पता लग जाता, मैंने प्रयास नहीं किया. क्यों कि मैं प्रारब्ध(पिछले जन्म के कर्मों का फल) पर विश्वास करता हूं. कोई अच्छा कारण ही रहा होगा, कोई बात नहीं आगे बन जाउंगा.

 

सवाल आलोक- आप का रिश्ता 1972 से आएसएस से भी रहा और कई ऐसे नेता हैं जो हिंदूवादी रहे हैं. आएसएस तो बहुत डामिनेट करता है बीजेपी पर और फिर भी कभी जब गठबंधन की जब जरूरत हुई तो आप को वित्त मंत्री छोड़िए, प्रधानमंत्री पद के लिए आप ज्यादा लोगों को साथ ले सकते थे. आप को कभी आरएसएस ने क्यों नहीं प्रोजेक्ट किया, वो खाली आप को यूज करके फेक देती है.

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- ये तो आप का निष्कर्ष है, मेरा नहीं है. पहली चीज तो ये कि मैं आरएसएस का सदस्य कभी नहीं रहा. लेकिन उनसे निकटता के साथ और स्नेह के साथ मैंने काम किया है और जैसे नाना जी थे, माधवराज मोगले थे, उनके स्नेह के कारण हम इतने दूर आए. पांच बार में कम से दो बार इनके मदद के कारण मैं पार्लियामेंट में आया लेकिन मेरी लड़ाई जरूर सैद्धांतिक रूप से बीजेपी से हुई थी. और उस कारण से ये फैसला हुआ था कि मैं जनता पार्टी में बना रहूंगा और वो बीजेपी चलाएंगे. 2004 में शकंराचार्य की गिरफ्तारी के बाद ये तय हुआ कि अब मैं विलय के लिए रास्ता बनाऊं और फिर थोड़ा समय लगा और बन गया.

आलोक– कभी उम्मीद की कि आप प्रधानमंत्री बने.

सुब्रमण्यम स्वामी- मैं कहा ना कि प्रारब्ध(पिछले जन्म के कर्मों का फल) में है तो कोई रोक नहीं सकता. मैं तो पांच बार संसद गया हूं, दो बार मंत्री रहा हूं. जब मैं पहले दिन राजनीति में आया तो लोग कहते कि आप जैसे मुंहफट आदमी तो राजनीति में टिक नहीं सकते लेकिन फिर भी हम ये सब पाए बिना किसी के अहसान और रहनुमा के.

 

सवाल दिबांग- स्वामी जी आप को लगता है कि आप जिस टाइम पर आप बीजेपी में आए तो अगर आप बने रहते तो अटल जी, आडवानी जी के बाद तो आप ही रहते. कहीं ना कहीं आप थोड़ा अनुशासन में रहते, थोड़ा आप धैर्य रखते तो ये काम हो सकता था. अब जो नेता दिखाई दे रहे हैं, उस जमाने में इनमें से कोई था भी नहीं.

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- ये तो एक अनुमान लगाने वाला सवाल है. उस समय जो सिद्धांत अपनाया गया था, उस समय मैं बहुत दुखी था. पहले तो हम ये भी नहीं चाहते थे कि जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हो, होने के बाद उसको घटक के रूप में चलाना ये भी गलत था. बाद में संघ के साथ बहस होने के बाद ये तय हुआ था, मैंने कोई झट से एलान नहीं किया और ये जरूर मैंने कहा था कि जो हिंदूत्व के जो विषय हैं. जैसे कैलाश मानसरोवर का रास्ता खुलवाना या राम मंदीर पर बोलना ये सारे चीजों पर तो हमारे सिद्धांत में कोई फर्क नहीं आया और जिस दिन मुझे लगा कि जिन लोगों ने मेरा विरोध किया वो चले गए थे, तब हम बीजेपी से विलय कर लिए.

 

दिबांग– अगर मैं कहूं कि समस्या स्वामी के साथ ये है कि महत्वकांक्षा बहुत ज्यादा है, धैर्य शायद थोड़ा कम है. उनको लगता है कि अभी सब मिल जाना चाहिए, थोड़ा देर टिके रहते तो कोई रोक नहीं सकता था आप को.

सुब्रमण्यम स्वामी- ये तो कल्पना की बात है कि क्या परिस्थिति हो जाती. मैं जानता हूं कई अच्छे लोग वहां टिक नहीं पाए वहां रहकर. अब गोविंदाचार्य को हटाने की क्या बात थी और दत्तोपंत ठेंगड़ी को हटाने की क्या बात थी. तो ये मुझे पता है कि मेरे जैसा व्यक्ति जो स्पष्टवादी है तो उसके लिए जब लीपापोती होने लगती है, सेक्यूलर बनने के लिए एक पागलपन शुरू हो जाता है तो हमें फिट करना मुश्किल हो जाता है. मैं कोई कम नहीं कमाया हूं, मैं तो सीनियर मोस्ट मिनिस्टर था. उस समय मैं चाहता तो चंद्रशेखर की जगह मैं खुद बनता क्योंकि राजीव गांधी तो मुझे चाहते थे लेकिन मैं ये समझता था कि चंद्रशेखर का बनना ठीक होगा. तो सारा गठबंधन तो मैंने बनाया, नरसिम्हा राव के साथ भी रहे. मैं मोरार जी के साथ था कभी नहीं गया. चंद्रशेखर से झगड़ा हुआ लेकिन साथ रहे. नरसिम्हा राव से दोस्ती पूरे अंत तक थी. अब एक दो लोगों से हमारा झगड़ा हो गया तो उसका मूलभूत कारण है.

सवाल दिबांग- चुनाव से पहले आप ने एक बड़ी बात की, बड़ा हल्ला हुआ कि सब काला धन वापस लाया जाएगा, अब पार्टी बता रही है कि वो तो एक जुमला था. क्या कालाधन कभी आएगा.

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- कालाधन लाने के चार रास्ते हैं. इनमें से कोई भी रास्ता अपनी सरकार ने अपनाया नहीं. मैंने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख कर कहा भी था कि ये चार रास्ते हैं. एक रास्ता है कि जो म्यूचुअल असेस्टेंस पैक्टस हैं वो तो फुटकर में ही ला सकता है. दूसरा है जो जर्मनी और फ्रांस ने किया जो बैंक के अधिकारी थे उनको रिश्वत देकर डाटा निकलवा लिया. तीसरा है अमेरिकन जिन्होंने स्वीस बैंको के अधिकारियों थे उनके ब्रांचों में जैसे वाशिंगटन में गिरफ्तार करके, धमका कर के सारा इन्फॉरमेशन निकाल लिया और चौथा है कि युनाइटेड नेशन्स का जो 2005 का प्रस्ताव जिसमें आप राष्ट्रीकरण कर दीजिए सारे अकाउंट का तो आप को उस अकाउंट का आप को देना पड़ेगा. इसी प्रकार मुबारक ने मिस्र में और गद्दाफी ने लीबिया में किया. रास्ते तो हैं लेकिन अभी तक कोई रास्ता अपनाया नहीं गया है. जो रास्ते बताए रहे हैं उसमें कोई दम नहीं है.

 

दिबांग– पार्टी ने ये आसान रास्ता क्यों चुना और कह दिया कि जुमला है?

सुब्रमण्यम स्वामी– वो तो प्रेसकॉन्फ्रेंस में कहा है ना. पार्टी में नहीं कहा ना.

दिबांग- वो हमारे एबीपी न्यूज के एक इंटरव्यूव में कहा था.

सुब्रमण्यम स्वामी- आप ही ने उनको चढ़ाया होगा लेकिन पार्टी में नहीं कहा ना. अभी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक है उसमें ये मुद्दा उठाया जाएगा कि काला धन कब वापस आएगा और राम मंदिर कब बनेगा. ये सारी चीजें पर बात करेंगे.

 

सवाल दिबांग– आप कांग्रेस में फूट पड़वाने के लिए कुछ कर रहे हैं क्या?

सुब्रमण्यम स्वामी– जरूर कर रहे हैं.

दिबांग– तो कब तक उसका असर दिखाई देगा.

सुब्रमण्यम स्वामी- मैं समझता हूं कि असर ढेड़ साल में होना चाहिए. बड़ी संख्या में होनी चाहिए ऐसे एक-दो लोगों को लाने से कुछ नहीं होगा. वैसे तो कई लोग आए हैं, हरियाणा से कई लोग आए हैं, यूपी से कई लोग आए हुए हैं.

एक सैद्धांतिक रूप में कुछ लोग हैं जो अब कहने लगे हैं कि हम हिंदूत्व विरोधी लगेंगे तो हम कभी आगे नहीं आ सकते.

दिबांग– कांग्रेस वालों सावधान स्वामी आ रहे हैं.

सुब्रमण्यम स्वामी- नहीं सोनिया गांधी सावधान. कांग्रेस वाले सब समझ रहे हैं.

 

सवाल राधिका- ट्वीटर पर राहुल गांधी की काफी हंसी और मजाक उड़ाया है. संसद और देश में राहुल के आक्रामक रवैये को देखकर क्या आपकी राय बदल गई है.

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- नहीं उसकी जो इमेज गिरी पिछले चुनाव में और उसके थोड़े पहले, उसको कभी रिकवर नहीं कर सकते हैं. उनको कोई ज्ञान नहीं है, कोई पढ़ाई नहीं है, कोई सिद्धांत नहीं है.

 

राधिका– आर्टिकुलेशन काफी शार्प फोकस्ड रहे हैं.

सुब्रमण्यम स्वामी- मुझे ऐसा नहीं लगता है. मुझे लगता है कि पब्लिक में इसका असर उल्टा जाता है. और अभी उसके अध्यक्ष ना बनने का कारण है कि बिहार में 4-5 सीट से ज्यादा नहीं मिलने वाली है. इस डर से उसको अध्यक्ष बनाने से टाल दिया है.

 

दिबांग– पर ये बताइए कि आप ट्वीटर पर इतने हमलावर क्यों हो जाते हैं क्या क्या लिख देते हैं उसमें.

सुब्रमण्यम स्वामी– कानून के दायरे में ही तो है. अभी तक किसी ने केस नहीं डाला हमारे ऊपर. जयललिता डालती है तो हर बार हार जाती है.

दिबांग– आप प्रोफेसर हैं, इतनी राजनीति देखी है. राहुल को देख रहे हैं और राजीव गांधी को भी देखा है. अगर आप को एक राय देनी हो राहुल गांधी को तो क्या देंगे.

 

सुब्रमण्यम स्वामी- राजनीति छोड़ दें क्योंकि भविष्य बिल्कुल नहीं है. उस परिवार का ही भविष्य नहीं है. क्योंकि जो आज का नया तबका है वो बहुत राष्ट्रवादी है और उसको ये कभी संतुष्ट नहीं कर सकते हैं. और राष्ट्रवादी इस खोज में हैं कि राष्ट्रवाद का अर्थ क्या है, रूपरेखा क्या है, उसका मैंने एक अलग से संगठन बनाया है, विराट हिंदुस्तान संगम. जिस तेजी से उसकी मेंबरशिप बढ़ रही है उसको देखने लायक है. हमारी नेशनल कन्वेंशन भी होगी विजयवाड़ा में.

 

दिबांग– विरोधियों के लिए इतनी तल्खी ठीक लगती है आप को.

सुब्रमण्यम स्वामी- नहीं नहीं मुलायम सिंह से बात करिए वो तो मुझे भाई कहता है. मायावती से बात करिए. सिर्फ ये नेहरू परिवार के लिए आप बोल रहे होगे और एक-दो हमारे विरोधी पार्टी के अंदर के बारे में आप बोल रहे होगे.

 

सवाल हितेश शंकर- स्वामी जी जब भी गांधी नेहरू परिवार की बात होती है या उनका कोई बयान आता है तो आप की टिप्पणी के बिना पूरा नहीं होता है. कल सोनिया गांधी जी का एक बयान आया जिसमें उन्होंने कहा कि नेहरू को लक्ष्य बनाकर सरकार इतिहास को तोड़-मरोड़ पर पेश करना चाहती है. आप क्या कहेंगे इस बारे में?

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- देश के सारे हितों को व्यक्तिगत इमेज बनाने के लिए उन्होंने त्याग कर दिया. जो उन्होंने कश्मीर का किया. अभी एक नया मिनिट्स मिला है मुझे 25 फरवरी 1948 जहां पटेल, नेहरू और माउंटबेटन मिलकर बात कर रहे हैं कि ये जो हम यूएन में ले गए ये तो गलत निकला. तो उसमें नेहरू अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने को तैयार नहीं है. कहते हैं कि जो लोग इसे यूएन ले कर गए उनको सजा मिलनी चाहिए. तो ये तो खुद उनकी जिद पर गई थी. और दूसरा ये चाइना, चाइना से दोस्ती करना बुरा नहीं है लेकिन अपनी तैयारी बंद कर दे, इस कल्पना पर कि उनका हमारा तो भाई-भाई का रिश्ता है वो एक प्रकार से देशद्रोह का काम हुआ एक प्रकार से. अब सुभाष चंद्र बोस की जो फाइल्स निकलेंगी तो मैं समझता हूं कि इस देश में नेहरू का कोई नाम लेने को तैयार नहीं होगा. इसी प्रकार से और भी अनेक रहस्य हैं जो अभी बाहर नहीं आए हैं.

 

दिबांग– सुभाष चंद्र बोस की फाइल पर क्यों हिचक रही है सरकार?

सुब्रमण्यम स्वामी- वो अनावश्यक डर रहे हैं. मैं तो कोर्ट में जाकर उसको बाहर निकाल लूंगा.

 

सवाल दिबांग- आप ने बयान बहुत दिए और फिर हुआ कुछ नहीं लगा जो आप का होम वर्क है वो फिर कहीं कमजोर रहा

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- नहीं नहीं ये तो आरोप आप का है. मैंने ये मजिस्ट्रेट के सामने पेश की थी. पूछताछ करके समन जारी किया माने प्राइमाफेसी केस बन गया है और आप प्राइमाफेसी आरोपी बन गए हो. अब ट्रायल को फेस करना है. हमारे कानून के अनुसार इन्होंने हाईकोर्ट में अपील की समन को रद्द कर दें वो एक साल से चल रहा है, अभी अंत में आ गया है, उसमें भी मैं जीत जाउंगा और दोबारा वो मजिस्ट्रेट के पास जाएगा फिर ट्रायल होगा तो गिरफ्तारी होगी और फिर बेल मिलेगी या नहीं ये मैं नहीं जानता. कार्रवाई तो होगी इसमें तो पक्का है कोई बचने वाला नहीं है.

 

दिबांग– इसमें जो अधिकारी बदले गए क्या वो भी इससे जुड़े थे

सुब्रमण्यम स्वामी– एक तो क्रिमिनल केस किया है मैंने आईपीसी के अंतर्गत. उसमें समन जारी हो गया, अब ट्रायल बाकी है, अब हाईकोर्ट के कारण. दूसरा है मैंने प्रवर्तन निर्देशालय में कहा कि पांच लाख रुपए बना कर ये कंपनी बनाते हैं यंग इंडियन तो कैसे पांच हजार करोड़ की असोसिएट्स जनरल की कैसी स्वामित्व मिल गया. इसमें मनी लॉन्ड्रिंग हुआ है. उसके लिए मैंने ईडी को दिया. ईडी में जो आज हैवी इंड्रस्टी के सेकेट्री हैं वो पक्का कांग्रेस का अप्वाइंट किया हुआ है, उसको जारी रखा इन्होंने और उसने अचानक कह दिया कि मना लॉन्ड्रिंग का केस नहीं है और बंद कर दो. अब इसमें पूरा केस है. मैंने पीएम को लिखा है कि फुल टाइम डायरेक्टर होना चाहिए, पार्ट टाइम डायरेक्टर ऐसा बोलता है कि वो दिग्विजय का रिश्तेदार है. अपने लोगों को एक बार मौका मिलना चाहिए. मैं स्वागत करता हूं कि प्रधानमंत्री ने जिसको चौथा एक्सटेंशन दो दिन पहले दिया था उसको रद्द कर दिया. और उसका परिणाम अब देखेंगे.

 

सवाल उर्मिलेश- स्वामी जी आप के प्रसंशक और आप के निंदक दोनों मानते हैं कि आप पढ़े-लिखे हैं. आप संघ के साथ दोस्ती आप का लगाव एक हिंदू राष्ट्रवादी के रूप में अपने को स्थापित करने की कोशिश ये सब बड़ी लम्बी कहानी है लेकिन वजह क्या है कि जो हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी और संगठन है आप को भरोसे के काबिल नहीं समझा, कभी उसने आप को मंत्री नहीं बनाया, कभी किसी बड़े जिम्मेदारी वाले पद पर नहीं रखा. आप को मंत्री पद भी मिला तो कांग्रेस समर्थित एक सरकार में वो भी कुछ महीने के लिए. तो ये जो आप के लाइफ की पॉलिटिकल ट्रेजडी है, इसको कैसे आप देखते हैं.

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- मैं इसे ट्रैजडी नहीं मानता हूं. कई लोग हैं जो कभी एमएलए भी नहीं बने वो हमसे भी ज्यादा महान बने. जैसे जेपी थे या महात्मा गांधी थे. इस देश में तो साधू, संत, त्यागी लोगों की बड़ी कद्र होती है. ये दूसरे देशों जैसा नहीं है. दूसरा मुझे रखा गया या नहीं रखा गया ये सवाल मुझसे क्यों पूछ रहे हैं. मेरे में कोई कमी नहीं है. दुनिया भर में मानते हैं कि हम योग्य व्यक्ति हैं. जिन्होंने बाहर रखा उनसे पूछना चाहिए.

 

उर्मिलेश- आप ने जेपी का, लोहिया का नाम लिया तो आप तो कोई आंदोलन भी नहीं कर सके आप ने अलग-अलग पार्टी और नेताओं, कभी सोनिया जी, कभी जयललिता जी, कभी अटल जी के बीच कभी बीच बचाव किया या दोस्ती तोड़वाई. सरकारें गिरवाई या सरकारें बनवाई. ये काम आप ने ज्यादा किया.

सुब्रमण्यम स्वामी- मेरा ज्यादा काम था कि लोगों के दृष्टिकोण को मैंने बदला, पहले जब मैंने शुरू किया तो मैंने सोवियत रूस के समाजवाद का मैंने विरोध किया, आखिर में सफल हुआ. जब मंत्री बना चंद्रशेखर का काल तो कम था परंतु उसमें मैंने कर दिया. नरसिम्हा राव के काल में भी मुझे मंत्री पद का दर्जा था और मैं उसमें सफल हुआ. मैंने कहा चीन और इजराइल के साथ दोस्ती होनी चाहिए, इसका उस समय में विरोध हुआ उसका भी मैंने कर दिया. मैं तो गिनाने लगूंगा तो जो कामयाबी है हो सकता है आप के नजर में नहीं है, परंतु मुझे पता है.

 

सिद्धार्थ- जयराम रमेश की किताब आई है अभी उसमें तो कोई क्रेडिट नहीं दिया आप को

सुब्रमण्यम स्वामी- कांग्रेस वाला कोई क्रेडिट देगा. वो भी राहुल गांधी का वो चमचा वो देगा मुझे. मुझे तो व्यक्तिगत कह रहा था जयराम रमेश कि आप ने ही शुरू किया है ट्रेड रिफॉर्म. मैंने उसका पुस्तक देखा नहीं, देखूंगा तो बताऊंगा.

दिबांग- स्वामी जी इस पर आप को अब खुलासा करना चाहिए कि थोड़ा सोच के कि कहां आप वित्तमंत्री बनने वाले थे. कहां आज स्थिति है कि पार्टी में बाहर से लाए हुए लोग आज पार्टी में सांसद बन गए, राज्यसभा पहुंच गए. क्यों नहीं स्वामी वहां पहुच पाते?

 

सुब्रमण्यम स्वामी- नहीं मैं क्यों करूं. मैं पांच बार एमपी बन. आज आप उसको इतना महत्व दे रहे हैं कि मैं इस पर विश्लेषण करूं, मैं तो देश भर में दौरा कर रहा हूं. राम सेतु का तो मैंने ही किया था और किसी ने नहीं किया था. जहां भी जाता हूं बड़ी भीड़ इकट्ठा होती है. मैं आप के जैसे बाबू नहीं बनना चाहता, मैं बाहर घूमना चाहता हूं. अभी मैं विदेश होकर आया हूं, 14 शहरों क्या स्वागत हुआ मेरा.

 

दिबांग– आप ये कह रहे हैं कि मंत्री या सांसद बनना मेरे लिए कोई महत्व नहीं है.

सुब्रमण्यम स्वामी- मैंने महत्व की बात नहीं की. मैं ने कहा ना बनना कोई मत्व की बात नहीं है. मैंने कहा बनने से उसके जरिए कुछ करूंगा. और मैंने किया भी जब चंद्रशेखर था उस टाइम में.

 

सवाल दिबांग- आप ने राममंदिर की बात की तो ये डेडलाइन है, धमकी है, वादा है या इरादा है.

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- डेडलाइन तो मैंने आगे की दी है अब तो मैं कहूंगा कि 2016 में बन जाना चाहिए. और इसके लिए हम आंदोलन करने के लिए तैयार हैं.

दिबांग– आप इस तरह से बातें करते हैं तो क्या आप ने इस पर पार्टी में बात की या प्रधानमंत्री से बात की.

सुब्रमण्यम स्वामी- ये तो मेनिफेस्टो में है, इसमें पार्टी में बात करने की क्या जरूरत है, पीएम से बात करने की क्या जरूरत है. ये तो जब मेनिफेस्टो में लीगली लिखा है कि हम बनाएंगे तो हम बनाएंगे. ये तो हमारी ड्यूटी और कर्तव्य हो गया.

 

दिबांग– इतना भरोसा आप को है. 2016 आप ने तारीख भी तय कर दी

सुब्रमण्यम स्वामी- निश्चित तौर पर. मैंने रामसेतु पर भी यही कहा था कि मैं 2 साल में उसको सुरक्षित कर दूंगा, हो गया सुरक्षित.

 

सवाल विजय विद्रोही- आप बड़ी क्रांतिकारी बातें कर रहे हैं, कह रहे हैं कि मैं वित्तमंत्री होता तो आर्थिक नीतियों को सुधारने के लिए इतना सब कर देते, काला धन लाने के लिए आप चार सुझाव दे रहे हैं और दूसरी तरफ आप ही के पार्टी के नेता है यशवंत सिन्हा वो कह रहे हैं कि जो 75 पार हो गया वो ब्रेनडेड हो गया.

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- ये तो उनकी राय है, ये कोई पार्टी की पॉलिसी नहीं है. ना किसी ने मुझ से कहा है. ये कहां कोई लकीर खींच सकता है. फिर फिटनेस की बात हो जाएगी कि कौन पार्लियामेंट में खड़ा होकर 15 मिनट से ज्यादा भाषण दे सकता है. ऐसा पार्टी में तो मुझसे कुछ नहीं कहा.

 

ये तो अखबारों में झूठी खबर चल जाती है और इसका हम कान्ट्रडिक्शन भी नहीं दे सकते क्योंकि हम इसको इंपॉर्टेंस नहीं देते हैं.

 

विजय विद्रोही- राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. आप अपनी सरकार से कहिए कि वो सुप्रीम कोर्ट से कहे कि मामले को वो जल्दी निपटाने की कोशिश करे. तो सुप्रीम कोर्ट से अलग जाकर ऐसा क्या कर पाएंगे जो 2016 में राम मंदिर का निर्माण हो शुरू हो जाएगा.

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- मैं कहां कह रहा हूं कि सुप्रीम कोर्ट से अलग जाकर करूंगा. मैं दोनो करूंगा. सरकार ने मुझसे कहा कि अभी सुप्रीम कोर्ट में पड़ा है, हम कुछ नहीं कर सकते हैं. तो मैंने नया पीटिशन डाला कि वहां तिरपाल फट गया है, वहां बाथरूम नहीं है, चप्पल रखने की जगह नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे दिया सरकार को कि ये सब करना है और ये मैंने सिर्फ 6 महीने में कर दिया. मैं सुप्रीम कोर्ट में नया पीटिशन डालूंगा और कहूंगा कि राम मंदिर के निर्माण का आदेश दिया जाए. सरकार करे तो ठीक है नहीं तो मैं तो सक्षम हूं करने में.

 

दिबांग– नहीं करेंगे का क्या मतलब है कि मैं बीजेपी से अलग होकर कर दूंगा.

सुब्रमण्यम स्वामी- नहीं नहीं बीजेपी से अलग होकर नहीं ये तो बीजेपी के मेनिफेस्टो में है. जो नहीं बनाएगें वो बीजेपी से अलग हो रहे हैं.

 

सवाल स्मिता- आपने कम से कम दो दर्जन बार हिंदुत्व का जिक्र किया है, और आप ने ये भी जताया है कि राजनीतिक जीवन कितना भी उतार-चढ़ाव क्यों ना रहे हों आप ने हिंदुत्व के सिद्धांत को छोड़ा नहीं है. हाल में देश में धार्मिक आधार पर जनगणना के आंकड़े आए हैं. और इसको लेकर वीएचपी के डॉ. प्रवीण तोगड़िया हैं जिसको लेकर बात उठाई है कि ये देश के लिए अलार्म है. क्या भारत सरकार को नीति बनानी चाहिए. क्या समान नागरिक संहिता का समय आ गया है. सरकार इस मुद्दे को लेकर कुछ सोच रही है या कोई गंभीरता है.

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- मुझे नहीं पता कि सरकार इस मुद्दे पर कुछ सोच रही है या नहीं. जैसे आपने कहा तोगड़िया जी तो पढ़े लिखे आदमी हैं, उनकी बातों में तर्क है कि फैमली प्लानिंग होगी तो सब पर लागू होनी चाहिए. मुझसे जो मुस्लिम महिलाएं मिलती हैं वो कहती हैं कि इसको ठीक करा कर कराइए, हमारे लिए अच्छा है. इसी प्रकार से जो सक्सेशन लॉ है या एनारिटेंस लॉ हैं उसमें भी मुस्लिम महिलओं का हाल बहुत बुरा है. तो उसको ठीक करने की आवश्कता है. लेकिन मैं जो डाटा है उसे अभी खतरनाक नहीं मानने को तैयार हूं.

 

मैं चाहता हूं कि मुसलमान ये माने कि जो थ्योरी ऑफ जेनेटिक्स में सिद्ध हो गया है कि उनका पुर्वज हिंदू है और उनकी उपासना पद्धती भले हमसे अलग हो परंतु संस्कृति एक ही होनी चाहिए और उन्हें इसके लिए मानना चाहिए कि वो भी इसी मिट्टी के हैं. ये होने से मुझे लगता है कि मुसलमान की बढ़ती हुई जनसंख्या से भयभीत होने की जरूरत नहीं होगी.

 

सवाल शीला रावल- स्वामी जी अभी आप ने अपने बयान में खुद कह दिया. उसके आधार पर गडकरी अमित शाह से बेहतर अध्यक्ष हैं.

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- ये नहीं कहा मैंने. मैंने ये कहा कि वो निर्णायक व्यक्ति है. अमित शाह तो ज्यादा चुनाव,पार्टी संगठन इस पर उनकी प्राथमिकता है. नीतिन गडकरी पार्टी ऑफिस में बैठकर लोगों से मिलते थे, जो अमित शाह नहीं करते. बहुत कम मिलते हैं, हमारे चिट्ठी का भी जवाब नहीं देते. नीतिन तुरंत फोन कर के बात करते थे, तो स्टाइल में फर्क है. मैं ये नहीं कह रहा कि वो अच्छा या ये बुरे हैं.

 

शीला रावल- स्वामी आप को लगता है कि आप बीजेपी में एक्सट्रा संवैधानिक शक्ति हैं. आप जो कहते हैं वो पार्टी की लाइन बन जाए, ऐसा करीब-करीब हो जाता है. जैसे आप ने चाइना की नीति में आप ने बीजेपी सरकार को बताया कि वो दकियानूसी है, पुरानी है, उसको बदल देना चाहिए. हम हमारे पीएम करीब 80 देशों में जा चुके हैं. पाकिस्तान को लेकर आपने टिप्पणी की थी तो आप को लगता है कि विदेश नीति जो प्रधानमंत्री चला रहे हैं उसमें कुछ तब्दीली आनी चाहिए.

 

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी- मुझे लगता है 10 साल यूपीए के शासन के बाद लोकतांत्रिक दल क्या होता है ये आप के समझ से बाहर हो गया है. क्योंकि लोकतांत्रिक पार्टियों में लोग अपने विचार देते हैं और ये दूसरे देशों में खुलेआम होता है. अभी तो मैं जो भी बता कह रहा हूं उसकी मूल बात मेनिफेस्टों में है और लंबे तौर तक पार्टी की सिद्धांत रही है. चाइना के साथ मित्रता करनी चाहिए परंतु अपने डिफेंस में कभी ढील नहीं देनी चाहिए. आप पुराने ऑर्गनाइजर पढ़ेगे तो मेरा आर्टिकल तो 1972 से है. और चाइना के साथ जो पहला सुधार कदम उठे वो तो मैंने ही किया था जब मोरारजी देसाई पीएम थे. और उस कारण से मैं कैलाश मानसरोवर का रास्ता भी खुलवा सका. अभी तो दूसरा रास्ता खुला है और ये भी उसी समय तय हुआ था. तो इसी लिए मैं पार्टी से अलग नहीं जाता हूं और पार्टी की बात को स्पष्टता से रखता हूं.

 

दिबांग– परंतु अभी आप ने कहा कि जो वर्तमान अध्यक्ष हैं वो आप की चिट्ठी का जवाब नहीं देते, मिलते नहीं हैं तो.

सुब्रमण्यम स्वामी– हां उनका स्टाइल ऐसा है वो मिलते नहीं वो तो मैं जानता हूं. परंतु चुनाव लड़ने के लिए व्यवस्था बनाने और संगठन बनाने में उसका कोई मुकाबला ही नहीं है. तो इसी लिए उनका स्टाइल दूसरा है.

दिबांग– क्या अध्यक्ष को ऐसा नहीं होना चाहिए कि महत्वपूर्ण लोगों को ये ना लगे कि मेरी चिट्ठी का जवाब नहीं दिया.

सुब्रमण्यम स्वामी- अब हो सकता है कि उसने विकेंद्रीकरण किया कि महामंत्रियों से मिलना चाहिए तो मैं महामंत्रियों से मिलता नहीं हूं.

 

दिबांग- पर चिट्ठी का का तो जवाब दे सकते हैं आपकी.

सुब्रमण्यम स्वामी- मैं अंग्रेजी में लिखता हूं, हो सकता है कि मैं हिंदी में लिखूंगा तो जवाब दे देंगे.

दिबांग- तो क्यों नहीं हिंदी में लिखते?

सुब्रमण्यम स्वामी- अब हमारे पास टाइपराइटर नहीं है हिंदी का. मैं कर सकता हूं, आगे करूंगा.

 

सवाल दिबांग-  आप वकील की भुमिका में दिखाई दे रहे हैं. आप आसाराम का बचाव कर रहे हैं और लोग आलोचना भी कर रहे हैं.

सुब्रमण्यम स्वामी-  आसाराम के बेल के लिए मैं गया हूं. आसाराम को जेल में डालने का कारण है कि उन्होंने धर्म परिवर्तन का उन्होंने डट के विरोध किया. कई बार उन्होंने घर वापसी कराई.

 

दिबांग- पर स्वामी जी आप ये मान रहे हैं कि उसमें जो कई गवाह हैं वो मारे जा रहे हैं. एक के बाद एक मारे जा रहे हैं. लोग एक ही तरीके से मारे जा रहे हैं और फिर आप क्यों जाते हैं ऐसे जगह पर.

 

सुब्रमण्यम स्वामी- अब मैं टीवी देख कर अपना मन बनाता नहीं हूं. मैं रिकॉर्ड्स को देखता हूं. अब ये रेप केस कहते हैं, मैंने एफआईआर देखा कि उसमें रेप केस है ही नहीं और दिल्ली पुलिस से दिल्ली के जेपी हॉस्पिटल से रिपोर्ट ले आई कि एक स्क्रैच भी नहीं है. तो अब बाकी केस क्या है उसमें कि लड़की 18 साल से कम है और उसको बयान को सही मान कर केस चलाना होता है. सुप्रीम कोर्ट ने मुझे कहा कि 6 गवाह हैं इनसे पूरी पूछताछ के बाद आप बेल के लिए अप्लाई कर सकते हैं. ये 6 के 6 जिंदा हैं और उनके बयान दर्ज कर लिए गए हैं तो कौन कहां मर रहा है. ये तो टीवी पर मुझे दिखाई पड़ता है,जब मैं कागज में देखता हूं तो उनका नाम नहीं दिखता. मुझे लगता है कि इसके पीछे कोई पैसा खर्च करके प्रचार कर रहा है.

 

दिबांग– पर जितना पैसा उनके पास हैं शायद ही और किसी के पास होगा.

सुब्रमण्यम स्वामी- वो अक्लमंदी से पैसा खर्च नहीं कर रहे हैं.

 

सवाल निलांजन मुखोपाध्याय- आप ने कहा कि आप को क्लियर संकेत मिले थे कि आप को मंत्री बनना था.

सुब्रमण्यम स्वामी- बनना चाहिए था मुझमें कौन सी कमी है.

निलांजन मुखोपाध्याय- मंत्रीमंडल में प्रधानमंत्री तय करता है कि कौन शामिल होगा या नहीं?

सुब्रमण्यम स्वामी- इसीलिए तो विरोध नहीं कर रहा हूं.

निलांजन मुखोपाध्याय- तो क्या इससे लगता है कि बीजेपी को कोई रिमोट कंट्रोल चलाता है और आप की इस लिए नहीं चली क्योंकि प्रधानमंत्री उस रिमोट कंट्रोल को वीटो कर गए.

सुब्रमण्यम स्वामी– नरेंद्र मोदी को कोई रिमोट कंट्रोल नहीं कर सकता. उनको गलतफहमी हो सकती है या दोस्ती में भटक सकते हैं. और वो दोस्तों का दोस्त है और वो राजनीति में ठीक नहीं है. लेकिन उसको कोई हुक्म नहीं दे सकता है.

दिबांग– आप क्या कह रहे हैं कि वो दोस्तों का दोस्त है

सुब्रमण्यम स्वामी–  हां वो दोस्तों का दोस्त है. मेरा तो उनसे परिचय पुराना है

दिबांग– आप ये कह रहे हैं कि दोस्तों का दोस्त होना राजनीति में ठीक नहीं है.

सुब्रमण्यम स्वामी- कभी ठीक है, कभी नहीं ठीक है. कभी दोस्तों के साथ अन्याय हो रहा हो तो उसके साथ खड़ा होना चाहिए. ये कि मैं खड़ा होऊंगा तो मेरा राजनीतिक करियर बिगड़ जाएगा वो कांग्रेस में बहुत होता है. लेकिन यहां तो दूसरा है आप जितना भी प्रयास करेंगे, मैं विवरण नहीं दूंगा. लेकिन मैं इतना कहूंगा कि नरेंद्र मोदी की पर्सनालिटी ऐसी है कि उसको कोई डिक्टेट नहीं कर सकता है. दूसरा ये कि आप लोगों को इतनी गलतफहमी है आरएसएस के बारे में कि आरएसएस हुक्म देता है. मैं समझता हूं कि आरएसएस अपनी बात बोलता है वो सुने तो ठीक है, नहीं सुने तो ठीक है. ये सब अपने लोग हैं.

 

आदेश देने की नौबत तब आएगी,जब कोई घृणापूर्ण घटना हो जाए. जैसे आडवानी ने कह दिया कि जिन्ना सेक्यूलर है तो उसमें सभी स्वयं सेवक भड़क उठे तो उसी लिए जाकर मोहन भागवत को उनको पद से हटाना पड़ा. लेकिन ऐसे तो रेयर होता हैं.

 

सवाल निलांजन मुखोपाध्याय- पिछले साल जयललिता की गिरफ्तारी के बाद सबने मान लिया था कि तमिलनाडु की राजनीति में जबरदस्त बदलाव तय है और आप की पार्टी को अच्छा मौका मिलेगा लेकिन अब आपको क्या लगता है सबकुछ फिर से जयललिता के काबू में आ गया है.

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी– जयललिता मजबूत तो नहीं हुई है लेकिन बीजेपी का जो माहौल बना बीजेपी की मीटिंग के कारण और ये जो नया तबका तमिलनाडु में आया राष्ट्रवाद के विचार साथ कि हम तमिल पहले ना होकर पहले भारतीय हैं, बाद में तमिल हैं. वो जो एक द्रविड़ आंदोलन से अलग हो गए हैं, उस माहौल में हम आगे बढ़ सकते थे. लेकिन हमारे वहां के लोग संकीर्ण विचारों के कारण और कार्ट अप्रोच के कारण हम उसको खो बैठे, परंतु उसको कभी भी वापस ला सकते हैं.

निलांजन मुखोपाध्याय– सेंट्रल लीडरशिप से थोड़ी गलती हुई थी.

सुब्रमण्यम स्वामी– केंद्रीय नेतृत्व अभी तमिलनाडु की सही लीडरशिप पहचान नहीं पाई है.

राजगोपाल– क्या आप को डीएमके और एमडीएमके के अलावां कोई तीसरा विकल्प उभर सकता है तमिलनाडु में.

सुब्रमण्यम स्वामी- नहीं ये बात तो सही है कि दोनों से जनता ऊब गई है. परंतु वो कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा है. और बीजेपी के लिए बहुत अच्छी भूमिका बनी है. लेकिन बीजेपी की जो स्टेट यूनिट है वो डीएमके या एडीएमके से जुड़ने की मंशा में है. उससे हम कभी आगे नहीं बढ़ सकते हैं.

निलांजन– आप जा कर क्यों नहीं स्टेट यूनिट को टेकओवर कर लेते.

सुब्रमण्यम स्वामी- मुझे दे दें लेकिन मैं पूछने वाला नहीं लेकिन मुझे दे दें मैं वहां जाकर बैठ जाऊंगा. मुझसे ज्यादा किसी की जान-पहचान वाला तमिलनाडु में बीजेपी में है नहीं.

 

दिबांग– तालमेल क्यों नहीं बैठ रहा आप इतनी तीखी बातें करते हैं, प्रधानमंत्री जाते हैं तो जयललिता के साथ चाय भी पीते हैं, फिर बधाई भी देते हैं.

सुब्रमण्यम स्वामी- पार्टी का गठबंधन तो नहीं है ना. लेकिन भ्रष्टाचार उसने किया है मैं हूं कंप्लेनेंट और सुप्रीम कोर्ट के जरिए उनको दोबारा जेल भेज देंगे हम उनको निश्चित तौर पर. तो उसमें पार्टी का सवाल ही नहीं है. नरेंद्र मोदी और उनका पुराना परिचय है और वो जाएगें तो निश्चित तौर पर उनके घर में जाकर चाय पीएगें. मैं भी जयललिता को अच्छे से जानता हूं, कभी अच्छी दोस्ती होती है, कभी बिगड़ जाती है बहुत. अभी बिगड़ी हुई स्थिति है, हो सकता है कि कल हम दोबारा दोस्ती कर लें.

उर्मिलेश- आप कह रहे हैं कि वो करप्ट हैं लेकिन जब आप की इतनी दोस्ती थी तो क्या वो करप्ट नहीं थीं.

सुब्रमण्यम स्वामी- नहीं करप्ट थी मैंने केस उसी समय डाला था. मैंने उसको बोल दिया था कि मैं तो केस डालूंगा.

 

सवाल संजय सिंह- स्वामी जी नरेंद्र मोदी जयललिता के यहां जाकर खाना खाते हैं और उनकी अच्छी दोस्ती है  और आप जयललिता को जेल भेजना चाहते हैं. तो ये आप टेंशन किसको दे रहे हैं जयललिता को या पीएम मोदी को.

सुब्रमण्यम स्वामी- नरेंद्र मोदी के ऊपर कोई असर नहीं होगा इसका. ये तो जयललिता सोचती थी कि नरेंद्र मोदी मुझे कंट्रोल कर सकता है लेकिन अब उसका दिमाग ठीक हो गया है. उसने चिट्ठी भी लिखी थी एकबार और मोदी ने जवाब नहीं दिया. वो जो श्रीलंका का मामला है उस पर मेरा विरोध करते हुए चिट्ठी लिखी थी. लेकिन वो चला नहीं. देखिए लोकतांत्रिक पार्टी की सीमा को इतना मत बांधिए. हम लोगों को छूट होती है,हमारे कई कार्यकर्ताओं की अलग-अलग राय होती है. आखिर में सब एक हो जाएंगे. इसमें कोई दो राय नहीं है. इसीलिए कोई प्राब्लम नहीं है ना नरेंद्र मोदी को ना मुझको.

 

सवाल राजगोपाल- आप के बयान से ऐसा लगता है कि आप जंग के लिए अफवाह फैला रहे हैं ये सच है या झूठ

सुब्रमण्यम स्वामी- नहीं इसमें कोई अफवाह नहीं है. मैं तो स्पष्ट बात कर रहा हूं कि वो हमारे ऊपर आक्रमण करेंगे तो इस बार हम उसके चार टुकड़े कर देंगे. पिछली बार आक्रमण किया तो दो टुकड़े कर दिए. तो ये तो उत्साहित करता है हमारे लोगों को .

 

सवाल दिबांग- हम देख रहे हैं कि कभी-कभी आप पार्टी की लाइन से अलग भी खड़े हो जाते हैं तो इसीलिए मैं कह रहा था कि आप एकदम अलग-अनूठे दिखाई देते हैं.

सुब्रमण्यम स्वामी- पार्टी से अलग कभी नहीं खड़ा होउंगा. सरकार की कोई पॉलिसी हो तो उसके विपरीत तो मैं नहीं जाऊंगा. लेकिन अटॉर्नी जनरल कह दें तो मैं इसको पार्टी का विषय नहीं मानता हूं.

 

मेरी राय में सरकार के वकीन हैं उन्होंने गलत किया कि उन्होंने अपराधिक मानहानि का समर्थन किया और वो हारने वाले हैं उसमें. 66 ए जो इंटरनेट वाला था उसमें भी हार गए थे. अंग्रेजों के बनाए हुए कानून का समर्थन करना ये तो गलत है. ये तो मैंने पीएम को चिट्ठी लिख कर भी बता दिया कि ऐसा हो रहा है और आप इस पर रोक लगाइए. जब पार्टी किसी बात पर फैसला नहीं करती तो मुझे तो छूट होती है बोलने और पार्टी का मन बनाने के लिए.

 

सवाल दिबांग- पिछले दिनों आडवानी जी ने कहा कि इमरजेंसी के दिन लौट सकते हैं, आपको भी क्या ऐसा लगता है.

सुब्रमण्यम स्वामी- मुझे नहीं पता है कि किस संदर्भ में आडवानी जी ने ये बात की थी या आप लोगों ने उसको तोड़-मरोड़ कर पेश किया है. सवाल ये है कि देश में लोकतंत्र ऐसी चीज है जिसकी हमें सदा के लिए रक्षा करनी होती है. निश्चित तौर पर जो अन्य पार्टियों की हालत है, वो मुलायम सिंह की पार्टी हो, मायावती की पार्टी हो या कांग्रेस की हो उसमें तो कोई लोकतंत्र ही नहीं है. बीजेपी में क्योंकि अनेक संगठन होने के कारण इनका जो माहौल बनता है वो सबसे ज्यादा लोकतांत्रिक बनता है और मैं उसका सबूत हूं. मैं बात कहता हूं, दूसरी पार्टी में मैं कभी नहीं कह सकता था. ये हमारी पार्टी का बड़प्पन है कि ये सब एडजस्ट करते हैं.

 

सवाल दिबांग- आप को कुछ बोलना होता है तो आप सीधा बोल देते हैं कि ये नक्सली हैं.

सुब्रमण्यम स्वामी- सब को नहीं कहता हूं, आप को तो नहीं कहा मैंने. पिछले 10 साल में एक मंशा पैदा की गई थी जो हमारे अंग्रेजी पढ़ने वाले लोग हैं. वो नक्सलाइट प्रेमी बन गए हैं. नक्सली नेताओं का एक ही उद्देश्य है कि किसी तरह सब को समाज से अलग कर दें. एफटीआईआई का जो आंदोलन है कि चेयरमैन उनके वोट के बिना नहीं बन सकता है. मुझे माफ करें वो नहीं हो सकता कि विद्यार्थी तय करेंगे कि अध्यक्ष कौन होगा, ये तो हमारा अधिकार है, पहले कभी नहीं हुआ ऐसा.

 

दिबांग- तो आप चाहते हैं कि सब को बाहर निकाल दें

सुब्रमण्यम स्वामी- यदि वो क्लासरूम वापस नहीं जाएंगे तो उनको बाहर निकाल दिया जाए.

 

सवाल दिबांग– आखिर मैं पूछता हूं कि आपका क्या अनुमान है कौन जीतेगा बिहार में.

सुब्रमण्यम स्वामी– हम भारी बहुमत से जीतेंगे.

 

रैपिड फायर राउंड

 

इस राउंड में पांच सवाल पूछे जाएंगे, उसके जवाब के दो ऑप्शन दिए जाएंगे और आप चाहें तो कह सकते हैं कि इस सवाल का जवाब मुझे नहीं देना है.

सवाल नं 1

दिबांग– आप के राजनैतिक जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक भूल क्या थी?

a). शुरूआती दिनों में आप ने जिस तरह से वाजपेयी जी पर हमले किए.

b). आप ने जो सोनिया और जयललिता की टी पार्टी की

जवाब सुब्रमण्यम स्वामी– दोनो भूल नहीं थी. दोनों सही बात थी. मैं विपक्ष में था और मुझे सरकार को गिराना था, ये मेरा कर्तव्य था और सरकार मेरे अनुकूल काम नहीं कर रही थी तो मैंने सरकार को गिरा दिया.

 

सवाल

दिबांग– आप के अनुसार आप अपने आप को एक बेहतर अर्थशास्त्री मानते हैं या राजनीतिज्ञ?

सुब्रमण्यम स्वामी– मैं दोनों हूं.

दिबांग– बेहतर क्या हैं आप दोनो में?

सुब्रमण्यम स्वामी– दोनो बराबर पसंद है.

 

सवाल नं 3

दिबांग– आप बेहतर प्रधानमंत्री किसको मानते हैं a). अटल विहारी वाजपेयी b). नरेंद्र मोदी

सुब्रमण्यम स्वामी– नरेंद्र मोदी को सिर्फ एक साल हुआ है तो दोनों के बीच तुलना करना गलत है.

दिबांग- आप सीधे नहीं आ रहे हैं?

सुब्रमण्यम स्वामी– मैं आप के जाल में फंसने वाला नहीं हूं.

दिबांग– अगर अटल जी के पहले 15-16 महीने देखें और मोदी के तो किसको बेहतर मानते हैं?

सुब्रमण्यम स्वामी– मैं तो नरेंद्र मोदी को ज्यादा जानता हूं तो मैं उन्हीं को कहूंगा.

 

सवाल नं.4

दिबांग– आप को क्या लगता है कि बीजेपी के बेहतर अध्यक्ष कौन रहे

a).नीतिन गडकरी  b). अमित शाह

सुब्रमण्यम स्वामी– अब ये भी संतरा और सेब वाला सवाल हुआ.

दिबांग– दोनों पार्टी अध्यक्ष हैं.

सुब्रमण्यम स्वामी– दोनों अलग-अलग आयाम में सक्षम हैं तो मैं इनकी तुलना नहीं कर सकता हूं. इस सवाल का मैं जवाब नहीं दे सकता.

सवाल नं 5

दिबांग– आप भविष्य में आप खुद को कहां देखते हैं. केंद्र में मंत्री या किसी राज्य में राज्यपाल.

सुब्रमण्यम स्वामी– राज्यपाल का तो सवाल ही नहीं है.

दिबांग– तो केंद्र में मंत्री?

सुब्रमण्यम स्वामी– ये तो प्रारब्ध(पिछले जन्म के कर्मों का फल) की बात हो गई. लेकिन मैं राज्यपाल कभी नहीं मानूंगा.

दिबांग– क्यों आप को लगता है कि राज्यपाल के पद का महत्व नहीं होता है.

सुब्रमण्यम स्वामी– मैं तो कर्मयोगी हूं. मैं कहां वहां जाकर बैठ कर लंच और डिनर करूंगा. मुझे तो वैसे राज्यपाल के लिए ऑफर हो गया है लेकिन मैंने ना कह दिया है.

दिबांग– अच्छा ये चुनाव के बाद ऑफर हुआ.

सुब्रमण्यम स्वामी–  हां हां अभी चार महीने पहले ऑफर हुआ. और एक ब्रिक्स बैंक वाला भी दिया गया था उसको भी मैंने ना कर दिया.

दिबांग– तो इसको पीछे मकसद क्या है़?

सुब्रमण्यम स्वामी– मैं यहीं मैदान में रहता हूं. मैं विचार अपने व्यक्त नहीं कर सकूंगा. हां मंत्री बनाएं तो क्रियान्वित कर सकता हूं. लेकिन ये जो राज्यपाल है या राजदूत या ब्रिक्स बैंक का प्रेसीडेंट ये तो मैं नहीं कर सकता हूं.

दिबांग– आप तो स्वामी राजनीति को अच्छा समझते हैं. आप को राज्यपाल बनने और ब्रिक्स भेजने की बात कर रहे हैं तो आप को कोई ढकेल रहे हैं क्या?

सुब्रमण्यम स्वामी– पर ढकेल नहीं सके ना. करने को तो बहुत लोग चाहते थे. इंदिरा गांधी भी चाहती थीं कि आईआईटी से बाहर निकाल दूंगी तो अमेरिका वापस चला जाएगा. मैं गया नहीं, मैं सब छोड़ कर यहीं बैठ गया. और इंदिरा गांधी ने खुद मुझे कहा कि अगर मुझे पता होता तो नहीं निकालती आईआईटी से आपको.

 

दिबांग– ऐसा हो रहा है तो क्या आप जानते हैं कि कौन लोग हैं पार्टी में जो चाहते हैं कि स्वामी हटे यहां से.

सुब्रमण्यम स्वामी– हां जानता हूं लेकिन वो सफल नहीं होंगे. क्योंकि जो मुझे सपोर्ट कर रहे हैं वो 10 और एक के बराबर हैं. उस अनुपात में हैं.

दिबांग- कर क्यों रहे हैं, क्या परेशानी है लोगों को?

सुब्रमण्यम स्वामी– हमारे हिंदुस्तान में एक कमजोरी है कि ईष्या होती है, कभी डर होता है. कब ये बुरा नजर मेरी तरफ कर देंगे, ये भी लोग सोचते हैं.

दिबांग– आप नरेंद्र मोदी को आप कब से जानते हैं, वो आप को तब से जानते हैं जब आप स्टार थे इमरजेंसी के टाइम में. तो क्या आप उनसे बात नहीं करते इस बारे में?

सुब्रमण्यम स्वामी– तो क्या आप बात नहीं करते इस बारे में. मैं तो इस पर बात नहीं करूंगा. वो तो मुझे अच्छी तरह जानते हैं. नहीं कर रहे हैं तो कोई विवशता है. उसका मैं क्यों विश्लेषण करूं. ना करो मेरा क्या जाता है, मेरा कोई नुकसान नहीं होता इससे. हां ये हो सकता है कि जो बाबू का संसार उसमें पद के बिना कोई महत्व ना मिलता हो. हमारी तो हिंदू संस्कृति है कि जिसके पास कोई पद नहीं है, पैसा नहीं है वो सबसे ज्यादा महान है.

सवाल– ब्रिक्स वाला प्रधानमंत्री ने ऑफर किया था.

सुब्रमण्यम स्वामी– हां प्रधानमंत्री ने ऑफर किया था.

दिबांग– प्रधानमंत्री ने स्वयं कहा आप से?

सुब्रमण्यम स्वामी– अमित शाह ने कन्वे किया था.

दिबांग– और आप ने क्या कहा.

सुब्रमण्यम स्वामी– मैंने कहा ये मेरे लिए छोटा काम है. मैं नहीं लूंगा. मैं हावर्ड छोड़ कर इसके लिए नहीं आया.

दिबांग– स्वामी जी आप नहीं देख रहे हैं कि सब इतनी कोशिश कर रहे हैं. अगर आप सरकार में रहते तो आप सक्षम तरीके से और अच्छा काम कर सकते हैं. उसका तो एक तरीके से नुकसान होता है. इसके लिए आप को नहीं लगता कि आप को लड़ना चाहिए.

 

सुब्रमण्यम स्वामी– मैं अनुमान लगा सकता हूं, कई लोग समझते हैं कि इसको हजम करना मुश्किल है. कहीं गले में अटक जाएगा तो क्या करूंगा. बाहर के लोग कहते हैं कि ये आएगा तो सहयोग नहीं करेंगे. अनेक कारण हो सकते हैं परंतु मुझे तो बुरा नहीं लगा. मैंने कभी शिकायत नहीं किया. मैं तो आज भी नरेंद्र मोदी को आज भी सपोर्ट करता हूं. अभी अमेरिका गया था सब लोग बड़े नाराज से उससे क्योंकि काला धन नहीं आया, मैंने उनको डिफेंड किया.

दिबांग– तो आप को अब भी उम्मीद है?

सुब्रमण्यम स्वामी– उम्मीद का सवाल नहीं है. मैं उसको जानता हूं और वो मेरे लिए प्रिय है. इसलिए मैं किसी सौदे के लिए नहीं कर रहा हूं.

  

 

 

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Web Title: press confrence Subramanian Swamy
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