Prime Minister Modi churned the executive,judiciary and legislature to remove the internal weakness of the country । प्रधानमंत्री मोदी ने देश की आंतरिक कमजोरी दूर करने के लिये कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका मंथन करे

संविधान दिवस पर PM बोले- 'ये समय तो भारत के लिए स्वर्ण काल की तरह है, आत्मविश्वास का माहौल है'

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 68 वर्षो में हमारे संविधान ने हर परीक्षा को पार किया और हर आशंका को गलत साबित किया है

By: | Updated: 26 Nov 2017 07:38 PM
Prime Minister Modi churned the executive, judiciary and legislature to remove the internal weakness of the country
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 68 वर्षो में हमारे संविधान ने हर परीक्षा को पार किया और हर आशंका को गलत साबित किया है लेकिन स्वतंत्रता के इतने वर्षो बाद भी आंतरिक कमजोरी दूर नहीं हुई है. ऐसे में अब बदले हुए हालात में कैसे आगे बढ़ा जाए, इस बारे में कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका तीनों ही स्तर पर मंथन किए जाने की जरूरत है.

उन्होंने आगे कहा ये समय तो भारत के लिए स्वर्ण काल की तरह है. देश में आत्मविश्वास का ऐसा माहौल बरसों के बाद बना है. निश्चित तौर पर इसके पीछे सवा सौ करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति काम कर रही है. इसी सकारात्मक माहौल को आधार बनाकर हमें न्यू इंडिया के रास्ते पर आगे बढ़ते चलना है.

राष्ट्रीय विधि दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस देश में एक दर्जन से ज्यादा पंथ हों, सौ से ज्यादा भाषाएं हों, सत्रह सौ से ज्यादा बोलियां हों, शहर-गांव-कस्बों और जंगलों तक में लोग रहते हों, उनकी अपनी आस्थाएं हों, सबकी आस्थाओं का सम्मान करने के बाद ये ऐतिहासिक दस्तावेज तैयार करना आसान नहीं था. इस हॉल में बैठा हर व्यक्ति इस बात का गवाह है कि समय के साथ हमारे संविधान ने हर परीक्षा को पार किया है. हमारे संविधान ने उन लोगों की हर उस आशंका को गलत साबित किया है, जो कहते थे कि समय के साथ जो चुनौतियां देश के सामने आएंगी, उनका समाधान हमारा संविधान नहीं दे पाएगा.

न्यू इंडिया के संकल्प पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे नौजवान देश है. इस नौजवान ऊर्जा को दिशा देने के लिए देश की हर संवैधानिक संस्था को मिलकर काम करने की आवश्यकता है. 20वीं सदी में हम एक बार ये अवसर से चूक चुके हैं. अब 21वीं सदी में न्यू इंडिया बनाने के लिए, हम सभी को संकल्प लेना होगा.

उन्होंने कहा, "स्वतंत्रता के इतने वर्षों बाद भी आंतरिक कमजोरियां दूर नहीं हुई हैं. इसलिए कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका तीनों ही स्तर पर मंथन किए जाने की जरूरत है कि अब बदले हुए हालात में कैसे आगे बढ़ा जाए. अपनी-अपनी कमजोरियां हम जानते हैं, अपनी-अपनी शक्तियों को भी पहचानते हैं." उन्होंने कहा कि ये सवाल सिर्फ न्यायपालिका या सरकार में बैठे लोगों के सामने नहीं, बल्कि देश के हर उस स्तंभ, हर उस संस्था के सामने है, जिस पर आज करोड़ों लोगों की उम्मीदें टिकी हुई हैं. इन संस्थाओं का एक एक फैसला, एक एक कदम लोगों के जीवन को प्रभावित करता है.

मोदी ने कहा कि सवाल ये है कि क्या ये संस्थाएं देश के विकास के लिए, देश की आवश्यकताओं, देश के समक्ष चुनौतियों और देश के लोगों की आशाओं-आकांक्षाओं को समझते हुए, एक दूसरे का सहयोग कर रही हैं? एक दूसरे को समर्थन, एक दूसरे को मजबूत कर रही हैं? प्रधानमंत्री ने कहा कि पाँच साल बाद हम सब स्वतंत्रता के 75 वर्ष का पर्व मनाएंगे. हमें एकजुट होकर उस भारत का सपना पूरा करना है, जिस का सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था. इसके लिए हर संस्था को अपनी ऊर्जा इस तरह से व्यवस्थित करनी होगी, उसे सिर्फ न्यू इंडिया का सपना पूरा करने में लगाना होगा.

आखिर में कहा कि 68 वर्षों में संविधान ने एक अभिभावक की तरह हमें सही रास्ते पर चलना सिखाया है. संविधान ने देश को लोकतंत्र के रास्ते पर बनाए रखा, उसे भटकने से रोका है. इसी अभिभावक के परिवार के सदस्य के तौर पर हम उपस्थित हैं. सरकार, न्यायपालिका, नौकरशाही हम सभी इस परिवार के सदस्य ही तो हैं मोदी ने कहा कि संविधान दिवस हमारे लिए एक महत्वपूर्ण प्रश्न लेकर आया है. क्या एक परिवार के सदस्य के तौर पर हम उन मर्यादाओं का पालन कर रहे हैं, जिसकी उम्मीद हमारा अभिभावक, हमारा संविधान हमसे करता है? प्रधानमंत्री ने सवाल किया, "क्या एक ही परिवार के सदस्य के तौर पर हम एक दूसरे को मजबूत करने के लिए, एक दूसरे का सहयोग करने के लिए काम कर रहे हैं?"

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Web Title: Prime Minister Modi churned the executive, judiciary and legislature to remove the internal weakness of the country
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