सरकार की नई नीति की वजह से देश में दाल महंगी?

By: | Last Updated: Wednesday, 21 October 2015 12:18 PM
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नई दिल्ली: देश में दाल की जितनी खपत है उससे कम पैदावार होती है, इसी वजह से सालाना 20 फीसदी दाल विदेश से मंगानी पड़ती है. विदेशों से दाल मंगाने के बावजूद आम आदमी के लिए दाल सस्ती नहीं हो पा रही है, क्योंकि राज्य सरकारों ने दाल की जो स्टॉक लिमिट तय कर रखी है, उससे थोक व्यापारियों के लिए दाल का स्टॉक रखना मुश्किल हो रहा है.

 

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भारतीय दाल एसोसिएशन का दावा है कि सरकार की नई नीति की वजह से देश में दाल सस्ती नहीं हो पा रही है. प्राइवेट दाल व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र सरकार ने दाल की जो स्टॉक लिमिट तय की है, उसकी वजह से मुंबई पोर्ट पर पड़े 2 करोड़ 50 लाख किलो दाल की खेप को व्यापारी अपने गोदामों में नहीं ले जा पा रहे हैं.

 

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भारतीय दाल एसोसिशन ने राज्य और केंद्र से दाल सस्ती करने के लिए स्टॉक लिमिट को बढ़ाने की मांग की है. दाल व्यापारियों ने कनाडा, ऑस्ट्रेलिया से दालों का आयात किया है, इसमें से सवा दो लाख टन दाल मुंबई पोर्ट पर फंसी हुई है . जबकि अगले तीन महीनों में देश में 25 करोड़ किलोग्राम दाल विदेशों से आनी है.

 

ये दाल सरकार नहीं मंगवा रही है. बल्कि व्यापारी मंगा रहे हैं. राज्यों को ये अधिकार है कि वो अपने-अपने राज्यों में अनाज की स्टॉक लिमिट तय करें. महाराष्ट्र सरकार ने थोक व्यापारियों के लिए दाल की स्टॉक लिमिट तय की है.

 

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यानी दाल का थोक कारोबारी 3 लाख 50 हजार किलोग्राम से ज्यादा दाल अपने पास नहीं रख सकता है. महाराष्ट्र के छोटे शहरों में ये सीमा सिर्फ दो लाख किलोग्राम तय की गई है. पहले महाराष्ट्र में कोई स्टॉक लिमिट नहीं थी. महाराष्ट्र की तरह मध्य प्रदेश सरकार ने 2 लाख किलोग्राम स्टॉक लिमिट तय कर रखी है, छोटे शहरों में सीमा 1 लाख किलोग्राम है. गुजरात में थोक व्यापारियों के लिए दाल की स्टॉक लिमिट 1 लाख किलोग्राम है. इससे ज्यादा दाल जमा करके रखने वाले व्यापारी के खिलाफ जमाखोरी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी.

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महाराष्ट्र में स्टॉक लिमिट तय होने के बाद व्यापारियों के यहां छापेमारी में अब तक 190 करोड़ रुपये की दाल जब्त हो चुकी है. स्टॉक लिमिट तय होने से कई राज्यों के व्यापारी परेशान हैं. व्यापारियों का दावा है कि अगर सरकार स्टॉक लिमिट बढ़ाती है, तो दाल की कीमतें जल्द कम हो सकती हैं.

 

देश में जितनी दाल खाई जाती है, उससे कम दाल पैदा होती है. भारत को करीब 20 फीसदी दाल विदेशों से आयात करनी पड़ती है. ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, और म्यांमार से दाल का आयात किया जाता है. लेकिन दाल आयात करने के बावजूद  जनता के लिए दाल सस्ती नहीं हो पा रही है.

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