मशहूर कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण का अंतिम संस्कार आज, कल 93 साल की उम्र में पुणे के एक अस्पताल में हुआ निधन

By: | Last Updated: Tuesday, 27 January 2015 1:36 AM

नई दिल्ली: दुनिया में ऐसी और कोई मिसाल देखने को नहीं मिलती है जब किसी कार्टूनिस्ट के किरदार की मूर्ति बना दी गई हो. ये है हिन्दुस्तान का कॉमन मैन यानी आम आदमी जिस कॉमन मैन को ढूंढने में देश की सबसे बड़ी पार्टी को कई दशक लग गए हाल में लॉच हुई एक पार्टी ने अपना नाम ही रख दिया कॉमन मैन पार्टी. उस कॉमन मैन की खोज आज से करीब 60 पहले एक कार्टूनिस्ट कर चुका था- जी हां,  इस आम आदमी की खोज करने वाले शख्स थे- रासीपुरम कृष्णास्वामी लक्ष्मण (आर के लक्ष्मण)

 

काफी दिनों से बिमार चल रहे लक्ष्मण का सोमवार शाम पुणे में निधन हो गया. आज उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. आर के लक्ष्मण करीब 60 साल तक कॉमन मैन, कॉमन सेंस और कॉमन प्रॉब्लम्स की आवाज बने रहे. लक्ष्मण के आम आदमी का कार्टून पहली बार 1951 में टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार में छपा.

 

अपने कार्टूनों के जरिए आर.के लक्ष्मण ने एक आम आदमी को एक खास जगह दी. हाशिये पर पड़े आम आदमी के जीवन की मायूसी, अंधेरे, उजाले, खुशी और गम को शब्द चित्रों के सहारे दुनिया के सामने रखा.

 

लक्ष्मण के कार्टूनों की दुनिया काफी व्यापक है और इसमें समाज का चेहरा तो दिखता ही है, साथ ही भारतीय राजनीति में होने वाले बदलाव भी दिखाई देते हैं. भ्रष्टाचार, अपराध, अशिक्षा, राजनीतिक पार्टियों के छलावों से जो तस्वीर निकल कर आती है वो है आर. के लक्ष्मण का आम आदमी की.

 

आम आदमी सिर्फ जिंदगी की मुश्किलों से लड़ता है, उसे चुपचाप झेलता है,सुनता है,देखता है,पर बोलता नहीं, यही वजह है कि आर के लक्ष्मण का आम आदमी ताउम्र खामोश रहा.

 

आर के लक्ष्मण का आम आदमी शुरू-शुरू में बंगाली, तमिल, पंजाबी या फिर किसी और प्रांत का हुआ करता था लेकिन काफी कम समय में आम आदमी की पहचान बन गया ये कार्टून टेढा चश्मा, मुड़ी-चुड़ी धोती,चारखाना कोट, सिर पर बचे चंद बाल.

 

लक्ष्मण का आम आदमी पूरी दुनिया में खास बन गया था. 1985 में लक्ष्मण ऐसे पहले भारतीय कार्टूनिस्ट बन गए जिनके कार्टून की लंदन में एकल प्रदर्शनी लगाई गई.

 

लंदन की उसी यात्रा के दौरान वो दुनिया के जाने-माने कार्टूनिस्ट डेविड लो और इलिंगवॉर्थ से मिले- ये वो शख्स थे जिनके कार्टून को देखकर लक्ष्मण को कार्टूनिस्ट बनने की प्रेरणा मिली थी.

 

लक्ष्मण की काबीलीयत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लंदन का अखबार दि इवनिंग स्टैंडर्ड ने उन्हें एक समय डेविड लो की कुर्सी संभालने का ऑफर दिया था. लक्ष्मण डेविड लो को कार्टून के क्षेत्र में अपना भगवान समझते थे… हालांकि अंत में बात नहीं बन पाई थी.

 

लक्ष्मण के कार्टून फिल्मों में भी इस्तेमाल हुए. फिल्म मिस्टर एंड मिसेज और तमिल फिल्म कामराज के लिए लक्ष्मण ने कार्टून बनाए. लक्ष्मण के बड़े भाई आर.के नारायण की कृति मालगुडी डेज को जब टेलीविजन पर दिखाया गया तो उसके लिए भी लक्ष्मण ने स्केच तैयार किये.

 

लक्ष्मण का आम आदमी उस वक्त फिर खास हो उठा जब डेक्कन एयरलाइंस की सस्ती विमान सेवा शुरू हुई. एयरलाइंस के संस्थापक कैप्टन गोपीनाथ अपने सस्ते विमान के लिए प्रतीक चिह्न की तलाश में थे, और इसके लिए उन्हें लक्ष्मण के आम आदमी से बेहतर कुछ और नही मिल सकता था.

 

आर के लक्ष्मण का जन्म कर्नाटक के मैसूर में एक शिक्षक के परिवार में हुआ था. पांच साल की उम्र से ही स्केचिंग करने वाले लक्ष्मण 12-13 की उम्र से ही अखबारों में छपने लगे थे. आर.के लक्ष्मण के बड़े भाई आर के नारायण भारत के जाने-माने अंग्रेजी कथाकार और उपन्यासकार थे जिनकी रचनाएं ‘गाइड’  और ‘मालगुडी डेज’ ने लोकप्रियता की ऊंचाइयों को छुआ था.

 

आर के नारायण ने कार्टूनिस्ट बनने में अपने छोटे भाई लक्ष्मण की मदद की. आर के नारायण की कहानियां अंग्रेजी अखबार हिन्दू में छपती थी. लक्ष्मण अपने भाई की कहानियों के लिए कार्टून और रेखा चित्र बनाते. उस वक्त उन्हें एक कृति के लिए ढाई रुपये मिलते थे.

 

स्कूल की पढ़ाई के बाद लक्ष्मण मुंबई के प्रख्यात जे जे स्कूल ऑफ आर्ट में पढ़ना चाहते थे. जे जे स्कूल में उन्होंने आवेदन दिया लेकिन कॉलेज के डीन ने आवेदन को ये कह कर खारिज कर दिया कि ड्रॉइंग बनाने के लिए जिस योग्यता और क्षमता की जरूरत है वो इनमें नहीं है.

 

आर के लक्ष्मण के कार्टूनों की एक बड़ी खासियत ये भी है कि उन्होंने हर उस शख्स को अपने कार्टून में जगह दी जो उन्हें मुनासिब लगा. व्यक्ति के पद और प्रभाव की वजह से उन्होंने कभी भी किसी तरह का समझौता नहीं किया. लक्ष्मण पद्म विभूषण से सम्मानित किय गए.

 

लक्ष्मण खुद को हमेशा आम आदमी ही मानते रहे ताउम्र इस आम आदमी के साथ रहे लक्ष्मण ने आम आदमी को खोजा पर दिलचस्प है कि लक्ष्मण हमेशा यही कहते कि आम आदमी ने ही उन्हें खोजा था.

 

पीएम मोदी ने जताया शोक.

 

प्रधानमंत्री ने कहा, ”आर.के.लक्ष्मण, भारत आपको याद करता रहेगा. हमारी जिंदगी में बेहद जरूरी हास्य घोलने के लिए हम आपके आभारी है. आपकी कृतियां हमारे चेहरों पर मुस्कान लाती हैं. इस महान विभूति के परिजनों और अनगिनत शुभचिंतकों को हमारी शोक संवेदनाएं.”

 

राष्ट्रपति ने भी जताया शोक

 

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार रात प्रख्यात कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण के निधन पर संवेदना जाहिर करते हुए कहा कि उनकी मौत ने सृजनात्मकता की दुनिया में एक शून्य पैदा कर दिया है जिसे भर पाना मुश्किल होगा.

 

राष्ट्रपति ने अपने शोक संदेश में कहा कि लक्ष्मण के निधन की खबर सुनकर उन्हें बेहद दुख हुआ है.

 

मुखर्जी ने ट्वीट किया, ‘‘मैं इसे निजी क्षति की तरह महसूस कर रहा हूं क्योंकि मैं उनका प्रशंसक भी था और उनके कार्टूनों का विषय भी.’’ महान कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण के निधन पर राष्ट्रपति ने अपने शोक संदेश में कहा, ‘‘लक्ष्मण के निधन के साथ भारत उस जीनियस को याद करेगा जिन्होंने आम आदमी को राष्ट्रीय प्रतीक बना दिया. उन्होंने हास्य को एक औजार की तरह इस्तेमाल करते हुए महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश दिए और जनता को यह याद दिलाया कि सत्ता में बैठे लोग भी गलती कर सकते हैं और वे इंसान हैं.’’ राष्ट्रपति ने कहा कि कार्टूनों के माध्यम से लक्ष्मण राष्ट्र की चेतना को जागरूक रखने वाले थे. उन्हें सरकार ने पद्मविभूषण से सम्मानित किया था.

 

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