वाड्रा जमीन सौदे पर चुनाव आयोग ने मांगी जानकारी

By: | Last Updated: Tuesday, 7 October 2014 12:15 PM

नई दिल्ली : कल हरियाणा में चुनाव प्रचार करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया था कि हुड्डा सरकार ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए वाड्रा-डीएलएफ सौदे को मंजूरी दी है. उन्होंने इस मामले में चुनाव आयोग से दखल देने की अपील की थी . अब चुनाव आयोग ने भी पूरे मामले की जानकारी राज्य चुनाव आयोग से मांगी है. हालांकि एबीपी न्यूज की पड़ताल से साफ हुआ है के ये मामला हरियाणा चुनाव के एलान से पहले का है .

 

प्रधानंत्री मोदी के इस बयान के बाद चुनाव आयोग ने कार्रवाई करते हुए हरियाणा चुनाव आयोग से वाड्रा-डीएलएफ डील की पूरी जानकारी मांगी हैं हालांकि जब एबीपी न्यूज ने पूरे मामले की पड़ताल की तो पता चला कि जिस जमीन सौदे को हरियाणा के चर्चित आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने रद्द कर दिया था, उस जमीन सौदे को हुड्डा सरकार ने 16 जुलाई 2014, मतलब हरियाणा चुनाव के एलान से पहले ही वैध करार कर दिया था.

 

गुड़गांव के डिप्टी कमिश्नर शेखर विद्यार्थी ने 16 जुलाई को लिखे एक पत्र में वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी और डीएलएफ यूनिवर्सल के बीच हुए जमीन सौदे के म्यूटेशन को वैध करार दिया था. विद्यार्थी ने हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी और फाइनेंशियल कमिश्नर (रेवेन्यू) के नाम भेजे इस पत्र में लिखा है कि गुड़गांव की मानेसर तहसील के शिकोहपुर गांव का म्यूटेशन नंबर 4513 (चार हजार पांच सौ तेरह) वैध है…रेवेन्यू रिकॉर्ड्स के मुताबिक इस ज़मीन की मिल्कियत डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड के नाम है. विद्यार्थी ने इस पत्र की एक कॉपी डायरेक्टर जनरल कंसॉलिडेशन को भी भेजी थी. विद्यार्थी के इस पत्र पर हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी और फाइनेंशियल कमिश्नर (रेवेन्यू) की तरफ से कोई टिप्पणी दर्ज नहीं की गई है. इसे उनकी टिप्पणियों के बिना ही सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया है.

 

आपको बता दें कि इस पूरे विवाद की जड़ में है गुड़गांव के मानेसर इलाके के गांव शिकोहपुर में एनएच-8 से लगी 3.5 एकड़ जमीन . यही जमीन रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलेट हॉस्पिटेलिटी ने सिर्फ 7.5 करोड़ में खरीदी थी और 2009 में ही डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेची थी. उस समय सवाल उठा था कि आखिर रॉबर्ट वाड्रा ने महज 65 दिनों के अंदर कैसे 50 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली. बाद में आईएएस अफसर अशोक खेमका ने इस मामले की जांच करते हुए सौदे में कई तरह की गडबड़ियों की बात कही थी और लैंड डील का म्यूटेशन रद्द कर दिया था. लेकिन अब एबीपी न्यूज की पड़ताल से साफ हुआ है कि 16 जुलाई 2014 को फिर से इस जमीन सौदे को वैध करार कर दिया गया है. यानी आज की तारीख में इस जमीन का मालिक DLF है.

 

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Web Title: rabert vadra
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