धर्म की दुकान चला रही राधे मां पर बड़ा खुलासा

By: | Last Updated: Tuesday, 4 August 2015 5:08 PM
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सलमान के हिट एंड रन केस के दौरान बहुत ही विवादित ट्वीट करने वाले गायक अभिजीत भी राधे के दरबार में मौजूद रह चुके हैं.

नई दिल्ली: खुद को देवी कहने वाली राधे मां धर्म की दुकान चला रही थीं. धर्म के नाम पर चलाए जा रहे इस गोरखधंधे की शुरुआत तब हुई थी जब मुंबई का मशहूर एम एम मिठाई वाला गुप्ता परिवार राधे मां को मुंबई ले गया. उन्हें अपना घर दिया और बेशुमार प्रचार किया. लेकिन राधे मां ने रची उस परिवार में दरार डालने की साजिश और कामयाब भी हो गई. एबीपी न्यूज का बड़ा खुलासा.

 

राधे मां से जुड़ी बड़ी कहानी. लेकिन पहले आप सिर्फ इतना जान लीजिए ये उसी परिवार के करीबी का बड़ा खुलासा है जिसने राधे मां को लोकप्रियता की इन बुलंदियों पर बिठाया था. वो परिवार ना होता तो राधे मां के कार्यक्रमों का रंग शायद इतना रंगीन ना होता. लेकिन बरसों तक देवी की तरह सेवा और पूजा करवाने वाली राधे मां ने इस परिवार को अपनी साजिश का शिकार बना लिया है.

 

मुंबई के बोरीवली इलाके में साल 2013 में राधे मां का जन्मदिन मनाया जाना था. इस मौके पर चांद के आकार के गोले से भक्तों के बीच पहुंची थी राधे मां. किसी एंटरटेनमेंट शो की तरह राधे मां की शानदार एंट्री का इंतजाम किया गया था. स्टेज भी चांदनुमा था जिस पर बैठकर राधे मां दे रही थीं भक्तों को दर्शन.

 

ऐसे दर्शनों को भक्तों के लिए बाकायदा प्रचारित किया जाता रहा है. विज्ञापन भी ऐसे जिसमें ना सिर्फ राधे मां दिखती हैं बल्कि मनोरंजन की दुनिया के सितारों की तस्वीरें भी सोच समझकर पेश की जाती हैं ताकि राधे मां के दर्शन के कार्यक्रमों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़े और ऐसा ही होता भी है.

 

एक बार देखिए ये विज्ञापन – आपको इन विज्ञापनों में राधे मां के कार्यक्रम के उन आयोजकों का परिचय भी मिल जाएगा जिससे जुड़ा है आज का बड़ा खुलासा. खुलासे से पहले इन आयोजकों के बारे में जानना जरुरी है.

 

करोड़ों का कारोबार करने वाले एम एम गुप्ता के चार भाई और दो बेटे राधे मां के भक्त तब बने जब 13 साल पहले राधे मां अपनी किस्मत आजमाने मुंबई पहुंची थीं. लेकिन इस परिवार की भक्ति सिर्फ दर्शन करने तक सीमित नहीं थी. गुप्ता परिवार राधे मां को बोरीवली की सोडावाला लेन में अपने घर ले आया और अपने मकान की दो मंजिलों पर राधे मां का स्थायी ठिकाना बना दिया गया.

राधे मां पर नया खुलासा 

राधे मां मुंबई के बोरीवली इलाके की सोडावाला लेन में रहने लगीं. गुप्ता परिवार ने मकान का नाम भी राधे मां भवन रख दिया. परिवार के विज्ञापन के धंधे में साल 2007 और 2008 में आई मंदी ने तो जैसे राधे मां के लिए किस्मत के दरवाजे खोल दिए.

 

ना सिर्फ नाम का प्रचार हुआ बल्कि राधे मां की चौकियां भी एक बड़े एंटरटेनमेंट इवेंट की तरह नजर आने लगीं. पंजाब के दोरांगला की रहने वाली राधे मां ने देवी होने के दावे के साथ चमत्कार दिखाना तो पंजाब से ही शुरू कर दिया था लेकिन तब वो कुछ ऐसी सादगी से रहती थीं. 

 

लेकिन गुप्ता परिवार ने राधे मां को एक ग्लैमर गर्ल की तरह पेश किया. दसों हाथों में अंगूठियां, मेकअप के लिए पूरी टीम और दर्शन के लिए स्पेशल सेट तैयार किए जाने लगे.

 

राधे मां अब एक हाई प्रोफाइल देवी की तरह नजर आने लगी थीं. ऊपर से गुप्ता परिवार ने चमत्कार की कहानियों का छौंका भी लगाना शुरू कर दिया.

 

ये कहानियां राधेमां के नाम से चल रहे ब्लॉग और वेबसाइट के जरिए प्रचार पाने लगीं और भक्त जुटाने लगीं. कहानी अब जिस मोड़ पर जा पहुंची है वो देखकर आप चौंक जाएंगे. राधे मां पर निक्की गुप्ता नाम की महिला के दहेज उत्पीड़न की एफआईआर कराने और महिला वकील फाल्गुनी ब्रह्मभट्ट के अश्लीलता फैलाने के आरोपों के बारे में पूछताछ के लिए एबीपी न्यूज एमएम मिठाईवाला ग्रुप के चेयरमैन मन मोहन गुप्ता के समधी बाबू लाल अग्रवाल के पास पहुंचा.

 

बाबूलाल अग्रवाल ने तो राधे मां को देवी मानने से ही इंकार कर दिया. बाबूलाल अग्रवाल के मुताबिक राधे मां ने मनमोहन परिवार में दरार डाल दी है.

 

मनमोहन गुप्ता के दो बेटे संजीव और पप्पू राधे मां के साथ हैं. मनमोहन गुप्ता के भाई जगमोहन उर्फ शिव चाचा भी राधे मां के साथ हैं. बाकी परिवार का राधे मां से कोई नाता नहीं है.

 

सिर्फ बाबूलाल अग्रवाल ही नहीं मनमोहन परिवार के करीबी कमल चंदा जो कि एक प्रॉपर्टी डीलर हैं वो भी बताते हैं कि राधे मां ने उसी परिवार को धोखा दे दिया है जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया था हालांकि उन्होंने एबीपी न्यूज से बात करने से पहले मनमोहन गुप्ता से मंजूरी मांगी थी. कमल चंदा का आरोप ये है कि गुप्ता परिवार के साथ मिलकर राधे मां बाकायदा धर्म की दुकान चला रही थीं. अमीर और नामी हस्तियों के साथ इन विज्ञापनों के जरिए पहले भक्तों की भीड़ जुटाई जाती थी और फिर चढ़ावे से होती थी मोटी कमाई. हर चौकी की कमाई का कमीशन भी दिया जाता था. राजस्थान में चौकी के लिए डील की पेशकश हुई थी.

 

मनचंदा कैमरे के सामने इस बात का खुलासा नहीं करना चाहते कि उन्हें चौकी के लिए कमीशन की पेशकश की गई थी लेकिन वो इससे इंकार भी नहीं कर रहे हैं.

 

राधे मां की नीयत के साथ साथ कमाई के तरीकों से भी पर्दा उठ रहा है. गुप्ता परिवार में आई दरार के बाद राधे मां ने गुप्ता परिवार का घर भी छोड़ दिया है लेकिन ना तो मुंबई छोड़ा और ना ही बोरीवली का इलाका. खबर है कि राधे मां ने 32 करोड़ की कीमत में छह मंजिला इमारत खरीद ली है और वहीं जारी है आस्था के नाम पर राधे मां का कारोबार.

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