अर्थशास्त्र के नोबेल का एलान आज दोपहर 2.05 बजे, रघुराम राजन भी हैं रेस में

राजन तीन साल तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे. रघुराम राजन 4 सितंबर 2016 तक रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे थे. राजन इस समय शिकागो विश्वविद्यालय में बूथ स्कूल आफ बिजनेस में प्रोफेसर हैं.

Raghuram Rajan could get nobel prize of economics, name appears in clarivate list of worthies

नई दिल्ली: अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार की घोषणा आज भारतीय समयानुसार दोपहर 2.05 बजे स्टॉकहोम(स्वीडन) में की जाएगी.  भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार पाने के संभावित दावेदारों में शामिल है.

वॉल स्ट्रीट जनरल की एक खबर के मुताबिक क्लेरीवेट एनालिटिक्स द्वारा तैयार संभावित छह उम्मीदवारों की सूची में राजन का नाम भी है. हालांकिइस सूची में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि राजन पुरस्कार पाने वालों में सबसे आगे हैं बल्कि वह इसे जीतने वाले संभावित दावेदारों में से एक हैं. क्लेरीवेट एनालिटिक्स नोबेल पुरस्कार के दर्जन भर संभावित विजेताओं की सूची अनुसंधान कार्य के आधार पर तैयार करती है. इस फर्म के अनुसार राजन कारपोरेट फाइनेंस में फैसलों के आयामों को रोशन करने में अपने योगदान के लिए पुरस्कार के एक दावेदार माने जा रहे हैं.

राजन तीन साल तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे. रघुराम राजन 4 सितंबर 2016 तक रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे थे. राजन इस समय शिकागो विश्वविद्यालय में बूथ स्कूल आफ बिजनेस में प्रोफेसर हैं.

राजन ने हाल में ही अपनी किताब ‘आई डू व्हाट आई डू’ में खुलासा किया कि उन्होंने फरवरी 2016 में नोटबंदी के प्रस्ताव का विरोध किया था. लंबे समय में इसके फायदे हो सकते हैं, लेकिन तत्काल समय में डिमॉनेटाइजेशन से भारतीय इकोनॉमी को नुकसान होगा.

अगर राजन को इकोनॉमिक्स का नोबेल प्राइज मिलता है तो भारत के लिए ये काफी बड़ी बात है क्योंकि अर्थशास्त्र का नोबल सिर्फ एक बार ही भारतीय अर्थशास्त्री-फिलॉसफर अमर्त्य सेन को मिला है.

क्यों बने राजन नोबेले के दावेदारों में से एक
नोबेल दावेदारों की लिस्ट में राजन का नाम कॉर्पोरेट फाइनेंस के क्षेत्र में किए गए काम के लिए चुना गया है. रघुराम राजन ने साल 2008 में आई मंदी के पहले ही साल 2005 में दे दिए थे जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ा था. अमेरिका में रघुराम ने ग्लोबल इकोनॉमिस्ट्सबैंकर्स की प्रतिष्ठित सालाना सभा में जो रिसर्च पेपर पढ़ा था उसमें आर्थिक मंदी का अनुमान जताया गया था. तीन साल बाद 2008 में यह भविष्यवाणी सच भी साबित हो गई जबकि 2005 में इसी के लिए रघुराम राजन का मजाक बनाया गया था.

रघुराम राजन का परिचय
रघुराम राजन का पूरा नाम रघुराम गोविंद राजन है और राजन तीन साल तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे. भारतीय रिजर्व बैंक के 23वें गवर्नर के तौर पर 4 सितम्बर 2013 को यह पदभार ग्रहण किया था. डी सुब्बाराव के रिटायरमेंट के बाद वो आरबीआई गवर्नर नियुक्त हुए थे. राजन इस समय शिकागो विश्वविद्यालय में बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर हैं. आरबीआई चीफ बनने से पहले राजन भारतीय वित्त मन्त्रालय, विश्व बैंक, फेडरल रिजर्व बोर्ड और स्वीडिश संसदीय आयोग के सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं. 2003 से 2006 तक वे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख अर्थशास्त्री व अनुसंधान निदेशक रहे.

रघुराम राजन का जन्म भारत के भोपाल शहर में 3 फ़रवरी 1963 को हुआ था. 1985 में उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया. आईआईएम (इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट) अहमदाबाद से उन्होंने 1987 में एमबीए किया. मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से 1991 में उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी डिग्री हासिल की.

अर्थशास्त्र का नोबेल जीतने वाले एकमात्र भारतीय अमर्त्य सेन
प्रोफेसर अमर्त्य सेन को अर्थशाष्त्र में उनके कार्यों के साल 1998 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. साल 1999 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया गया था.

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