जय शाह के बहाने राहुल का मोदी पर हमला, 'चौकीदार थे या भागीदार? कुछ तो बोलिए'

जय शाह के बहाने राहुल का मोदी पर हमला, 'चौकीदार थे या भागीदार? कुछ तो बोलिए'

By: | Updated: 09 Oct 2017 03:08 PM

फाइल फोटो

अहमदाबाद:  बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह के बेटे की कंपनी का टर्नओवर सोलह हजार गुना बढ़ने की खबर द वायर वेबसाइट पर छपने के बाद हंगामा मचा हुआ है. कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमित शाह के बेटे के बहाने पीएम मोदी को निशाने पर लिया है. राहुल गांधी ने मोदी से पूछा कि पचास हजार अस्सी करोड़ कैसे हो गए?


राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी से पूछा कि आपके बयान 'न खाऊंगा, न खाने दूंगा के वादे का क्या हुआ?' ये भी कहा था मैं PM नहीं हिंदुस्तान का चौकीदार हूँ. अब कहाँ गया चौकीदार?


इसके साथ ही राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए. राहुल ने ट्वीट कर पूछा, "मोदीजी, जय शाह- 'जादा' खा गया. आप चौकीदार थे या भागीदार? कुछ तो बोलिए."


गुजरात में अपने चुनावी दौरे में राहुल ने अमित शाह के बेटे का मुद्दा उठाया और लोगों से कहा कि अमित शाह के बेटे की कंपनी 10 से 12 साल पुरानी है, लेकिन फायदा 2014 से शुरू हुआ. राहुल ने कहा, "ये मोजी जी के स्टार्टअप इंडिया का कमाल है. ये मेक इन इंडिया है, अजीब सी दुनिया है. 50 हज़ार 80 करोड़ हो जाते हैं."


झूठी रिपोर्ट है- बीजेपी
आपको बता दें कि द वायर की रिपोर्ट छपने और कांग्रेस के हमले के बाद बीजेपी नेता और केंद्रीय रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने वेबसाइट द वायर की रिपोर्ट को मनगढ़त और अमित शाह की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला करार देते हुए वेबसाइट, वेबसाइट के संपादक और रिपोर्टर के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करने का एलान किया था.


जय शाह पर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए पीयूष गोयल ने कहा था, “ये झूठ और पूरी तरह से आधारहीन और दुर्भावनपूर्ण भाव से किए गए अपमानजनक आरोप हैं. हम इन आरोपों का पूरी तरह से खंडन करते हैं, नकारते हैं.”


जय शाह की सफाई
जय शाह ने भी अपनी सफाई में कहा था कि वेबसाइट ने अपनी स्टोरी में झूठ दिखाने की कोशिश की है. उनके प्रतिष्ठा को नीचा दिखाने की कोशिश की है. लोगों के मन में ऐसी छवि बनाने की कोशिश की गई है कि उनके व्यवसाय में सफलता उनके पिता की राजनीतिक हैसियत से मिली है.


उन्होंने कहा, “मेरा व्यवसाय पूरी तरह से कानून का पालन करता है. जो मेरे टैक्स रिकार्ड और बैंक ट्रांजेक्शन से पता चलता है. किसी कॉपरेटिव बैंक से लोन नियम कानून के हिसाब से लिए गए.”

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