राहुल गांधी पार्टी संभालें, सोनिया बनें मार्गदर्शक: दिग्विजय सिंह

By: | Last Updated: Saturday, 1 November 2014 4:58 AM

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस में हड़कंप मचा हुआ है और इसको लेकर आए दिन नए-नए आइडिया सामने आ रहे हैं. पी चिदंबरम के बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने एक नया आइडिया पेश किया है. आइडिया ये है कि राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए.

 

सोनिया गांधी की जगह राहुल गांधी से कांग्रेस की कमान संभालने की वकालत कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने की है. इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक दिग्विजय सिंह ने कहा है कि वो वक्त आ गया है जब राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में ले लेनी चाहिए.

 

इकनॉमिक टाइम्स को दिए एक खास इंटरव्यू में दिग्विजय सिंह ने कहा कि सोनिया गांधी पार्टी की मेंटर यानि पार्टी की संरक्षक बनी रहें और यूपीए की चेयरमैन का भी जिम्मा अपने पास रखें. दिग्विजय सिंह ने ये भी कहा कि राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान अपने हाथ में लेने के बाद पूरे देश में जनता से संपर्क यात्रा का कार्यक्रम भी शुरू करना चाहिए.

 

दिग्विजय सिंह ने कहा है कि पार्टी में कोई ऐसा नहीं है जो राहुल गांधी के नेतृत्व को चैलेंज कर सके.

 

हालांकि दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद वे अपनों के निशाने पर आ गए हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माखनलाल फोतेदार ने कहा है, ‘संकट का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं दिग्विजय सिहं.’

 

राहुल गांधी फिलहाल कांग्रेस के उपाध्यक्ष हैं. लोकसभा चुनाव में और हाल के विधानसभा चुनावों में हार के बाद वो संगठन और पार्टी में नई जान फूंकने की कोशिशों में जुटे हैं.

 

दिग्विजय सिंह के कहने का मतलब ये है कि सोनिया गांधी की जगह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को बनना चाहिए. 24 अक्टूबर को पी चिदंबरम का भी बयान आया था. चिदंबरम ने कहा था कि जब तक सोनिया गांधी हैं वही नंबर वन हैं. हालांकि उन्होंने ये भी कहा था कि  संगठन में बदलाव की जरूरत है और भविष्य में गांधी परिवार से बाहर का भी अध्यक्ष हो सकता है. हालांकि उन्होंने सोनिया गांधी को ही नंबर वन बताया था.

 

कांग्रेस में ऐसा क्यों?

आखिर ये समझने की जरूरत है कि कांग्रेस में ऐसा क्यों हो रहा है. कांग्रेस लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारी. सिर्फ 44 सीटों पर जीत पाई. महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव में उसके हाथ से न केवल सत्ता गई बल्कि वो तीसरे-चौथे नंबर की पार्टी बनकर रह गई. राहुल गांधी को कांग्रेस को पीएम प्रोजेक्ट नहीं किया था लेकिन कांग्रेस का चेहरा वही थे.