राहुल की जासूसी से सरकार का संसद में इनकार के साथ कांग्रेस पर पलटवार

By: | Last Updated: Monday, 16 March 2015 6:04 AM

नई दिल्ली: राहुल गांधी की कथित ‘जासूसी’ किए जाने के कांग्रेस के आरोप को खारिज करते हुए सरकार ने आज राज्यसभा में कहा कि यह प्रमुख व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए प्रोफाइल तैयार करने की एक पारदर्शी प्रक्रिया है और कई पूर्व प्रधानमंत्रियों और राजनीतिक दलों के अध्यक्षों के बारे में भी इसी प्रकार की जानकारी एकत्र की गयी है.

 

राज्यसभा में सुबह कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने यह मुद्दा उठाया और सरकार पर विपक्षी नेताओं की जासूसी कराने का आरोप लगाया.

जानें: पुलिस ने राहुल से क्या-क्या पूछा?

वित्त मंत्री और सदन के नेता अरूण जेटली ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस 1957 से ही लुटियन दिल्ली में रहने वाले वीआईपी लोगों के संबंध में विभिन्न जानकारी जमा करती रही है और 1987 और 1999 में इस प्रक्रिया में संशोधन किया गया. जेटली ने इस मुद्दे को तिल का ताड़ बनाए जाने की संज्ञा दी.

 

इस मुद्दे पर कांग्रेस और अन्य दलों के सदस्यों द्वारा नियम 267 के तहत दिए गए कार्य स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद कांग्रेस के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया.

 

उपसभापति पी जे कुरियन ने विभिन्न पक्षों को सुनने के बाद इस नोटिस को नामंजूर कर दिया.

 

इससे पूर्व जेटली ने कहा कि इस फार्म का 1999 में संशोधन किया गया था और इसके तहत एच डी देवेगौड़ा, आई के गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे कई पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में भी फार्म भरा गया था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बारे में भी यह प्रक्रिया अक्तूबर 2004, 2009, 2010, 2011 और 2012 में अपनायी गयी थी.

 

जेटली ने कहा कि ऐसी प्रक्रिया राष्ट्रपति बनने के पूर्व प्रणब मुखर्जी, भाजपा नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, माकपा नेता सीताराम येचुरी और जदयू के शरद यादव के साथ भी अपनायी गयी है.

 

जेटली ने कहा कि यह सुरक्षा का मुद्दा है और सुरक्षा के मामले को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिए.

 

जूते का नंबर पूछे जाने पर बवाल

 

विभिन्न सदस्यों द्वारा जूते का नंबर, आंखों का रंग जैसे सवालों का जिक्र फार्म में होने का जिक्र करने पर जेटली ने कहा कि सुरक्षा के मामले में कई सवाल बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं. उन्होंने राजीव गांधी का नाम लिए बिना कहा कि देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के बाद उनके शव की पहचान उनके जूतों से ही हो सकी थी. उन्होंने कहा कि इस विषय को जासूसी से नहीं जोड़ा चाहिए और नेताओं को जन सेवा में ही लगे रहना चाहिए और उन्हें सुरक्षा विशेषज्ञ नहीं बनना चाहिए.

 

जेटली ने कहा कि यह पिछले आठ महीने में शुरू हुयी प्रक्रिया नहीं है. उन्होंने कहा कि तिल का ताड़ बनाया जा रहा है.

 

इसके पूर्व विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने यह मुद्दा उठाया और कहा कि कई सदस्यों ने इस संबंध में नियम 267 के तहत कार्य स्थगन का नोटिस दिया है.

 

उन्होंने कहा कि अपने 35 साल के अनुभव में उन्होंने भी भी इस प्रकार का फार्म नहीं देखा. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को लंबे समय से एसपीजी सुरक्षा प्राप्त है और उनके बारे में अब दिल्ली पुलिस तरह तरह के सवाल कर रही है.

 

आजाद ने आरोप लगाया कि यह विपक्षी पार्टी को दबाने, धमकाने और उन पर दबाव डालने का मुद्दा है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में गृह मंत्री को बयान देना चाहिए और स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.

 

उन्होंने कहा कि पिछले साल ऐसी खबरें थीं कि राजग सरकार के मंत्री के टेलीफोन टैप किए जा रहे हैं. उन्होंेने आरोप लगाया कि जब से यह सरकार आयी है, धार्मिक और राजनीतिक स्वतंत्रता कम हो रही है.

 

जदयू के केसी त्यागी ने भी गृह मंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि इस तरह की जानकारी जुटाने की बात कभी नहीं सुनी गयी. उन्होंने कहा कि उनका एक विशेषाधिकार नोटिस लंबित है. उन्होंने सदन में इस पर चर्चा कराने की मांग की.

 

सपा के नरेश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि हर दिन एक लाख फोन टैप किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोगों की निजता के अधिकार को चुनौती नहीं दी जानी चाहिए.

 

कांग्रेस के आनंद शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार नेताओं के फोन टैप कर रही है. उन्होंने इसकी जांच कराए जाने की मांग की.

 

आपको बता दें कि 12 मार्च को दिल्ली पुलिस की एक टीम ने राहुल गांधी के दफ्तर जाकर उनके बारे में तफ्तीश की है. बताया जा रहा है कि पुलिस ने राहुल गांधी के हुलिया से लेकर उनके आने जाने के बारे में सारी जानकारी ली.

 

पुलिस का जवाब

 

इससे पहले पूछताछ के मामले पर दिल्ली पुलिस पहले ही अपनी बात रख चुकी है. दिल्ली पुलिस ने कहा रुटीन सिक्योरिटी चेकअप के तहत राहुल गांधी के बारे में पूछताछ की गई थी, राजनीतिक जासूसी के आरोपों को नकारा.

 

दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर 1957 से रुटीन प्रोफाइल चेकिंग होती आ रही है. पूछताछ का मौजूदा प्रोफॉर्मा 1999 से लागू है.

 

पुलिस सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पीएम मोदी, अमित शाह, सोनिया गांधी समेत अब तक कुल 526 VVIP लोगों की प्रोफाइलिंग हो चुकी है.

 

 

यह भी पढ़ें:

राहुल की ‘जासूसी’ पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर बस्सी तलब 

क्या कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की जासूसी हुई है ?

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Rahul Gandhi_Delhi Police_Congress_NDA_Parliament_
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017