रेल बजट: मोदी सरकार से जनता को ये हैं उम्मीदें

By: | Last Updated: Tuesday, 8 July 2014 2:31 AM
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नई दिल्ली: आज दोपहर 12 बजे आएगा मोदी सरकार का पहला रेल बजट पेश होगा. ABP न्यूज आपको दिखाएगा हिंदी में रेल बजट. रेल मंत्री सदानंद गौड़ा का पिटारा दोपहर 12 बजे खुलेगा लेकिन अभी आपको बताते हैं कि रेल बजट में क्या-क्या हो सकता है. पूरी उम्मीद है कि रेल किराया नहीं बढ़ेगा. वित्त मंत्री ने कल इसके संकेत दे दिए हैं.

 

नहीं बढ़ेगा किराया

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने साफ संकेत दे दिया कि रेल बजट की सबसे बड़ी घोषणा होगी कि यात्री किराया नहीं बढ़ाया जाएगा. अभी हाल ही में 14.2% की किराए की बढ़त का ठीकरा यूपीए पर फोड़कर अब रेल बजट में मोदी सरकार अच्छे दिनों की अच्छी बातें करेगी. लेकिन सवाल ये कि इससे रेलवे की सेहत कैसे सुधरेगी. अभी यात्रियों पर रेलवे एक रुपया खर्च करती है तो उनसे कमाई होती है अठन्नी. जबकि माल ढोने पर एक रुपया खर्च होता है तो कमाई होती है डेढ रुपया. यानी यात्री किराया न बढ़ाने की वजह से मालभाड़ा ज्यादा हो रहा है. यानी चीनी, सब्जी, कोयला ये सब महंगा हो रहा है. कोयला महंगा तो बिजली महंगी. यानी महंगाई बढ़ रही है ताकि यात्री किराये कम रहें. ऐसा कब तक चलेगा? और ऐसे बड़े बहुमत वाली सरकार इसको ठीक नहीं करेगी तो कौन करेगा? लेकिन यात्री किराए औऱ बढ़ा दिए तो फिर आप ही सरकार से कहोगे कि अच्छे दिन के वादे का क्या हुआ? इसलिए नहीं बढ़ेगा किराया.

 

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन!

 

रेल बजट में सबसे बड़ी घोषणा होगी बुलेट ट्रेन की. मोदी की अच्छे दिन की मुहर लगेगी अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन के बड़े ऐलान से. बुलेट ट्रेन यानी 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार. यानी मोटे तौर पर अभी से तिगुनी.  चारों महानगरों को बुलेट ट्रेन से जोड़ने का सपना बीजेपी के मैनिफेस्टो में भी दिखाया गया और राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी था.

 

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चैन्न्ई को बुलेट ट्रेन से जोड़ने के लिए तो शायद मोदी को कई बार प्रधानमंत्री बनना पड़े लेकिन दिल्ली-मुंबई रूट के एक अहम हिस्से अहमदाबाद औऱ मुंबई के बीच 543 किलोमीटर के रूट पर बुलेट ट्रेन की घोषणा कर के  मोदी अच्छे दिन के सपने को बरकरार रख सकते हैं. मुंबई से अहमदाबाद दो घंटे से भी कम समय में.

 

प्लान नया नहीं है. लालू ने भी बुलेट ट्रेन का सपना दिखाया था. लेकिन रेलवे ने स्टडी की तो पाया ये हो नहीं सकता क्योंकि जितना खर्चा आएगा, वो वसूला नहीं जा सकता. फिर मनमोहन सरकार ने पिछले साल दिसंबरा जापान के साथ मिलकर मुंबई-अहमदाबाद रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने की स्टडी शुरु करवाई . अब मोदी सरकार इसी को अपने डायमंड क्वाड्रिलेटरल का हिस्सा बनाकर रेल बजट में पेश करेगी.

 

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि कब तक शुरु होगी ये ट्रेन क्योंकि स्टडी तो पिछले दिसंबर से चालू है . तो जान लीजिए कि स्टडी ही 2015 में पूरी होगी. यानी ट्रेन 2017-18 से पहले नहीं शुरु हो सकती. यानी 2019 के इलेक्शन से पहले .

 

दिल्ली-आगरा सेमी-बुलेट ट्रेन!

 

बुलेट ट्रेन के बाद दूसरी बड़ी घोषणा होगी सेमि-बुलेट या हाई स्पीड ट्रेन की. यानी 250-300 की स्पीड नहीं बल्कि 130 से 150 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड वाली ट्रेनें. अभी कुछ दिन पहले दिल्ली से आगरा पर इसका सफल ट्रायल हो चुका है. और दिल्ली से आगरा ही पहली सेमी-बुलेट चलेगी. योजना तो ये भी पिछली सरकार की ही है , लेकिन क्योंकि बुलेट ट्रेन तो दूर का सपना है, सेमी-बुलेट चलाकर मोदी सरकार बुलेट के सपने को जिंदा रखेगी. इसको चलाने के लिए नई लाइनें भी नहीं बिछानी. क्योंकि मौजूदा पटरियों पर गाड़ी 160 की रफ्तार तक  दौड़ाई जा सकती है.

 

दिल्ली से आगरा के बाद जिन रूट पर सेमी बुलेट की तैयारी हो रही है वो हैं दिल्ली- कानपुर औऱ दिल्ली-शताब्दी. ये भी हो सकता है कि इन रूट पर चलने वाली शताब्दी ट्रेन को ही सेमी-बुलेट या हाई-स्पीड ट्रेन में तब्दील कर दिया जाए.

 

राजधानी की बढ़ेगी रफ्तार!

 

बुलेट औऱ सेमी-बुलेट की बड़ी घोषणा के अलावा मौजूदा ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने की भी घोषणा होगी रेल बजट में. ये किया जाएगा, राजधानी जैसी ट्रेन में मेट्रो जैसे डिब्बों के सेट लगाकर. अभी राजधानी की औसत स्पीड 85-90 की ही है. नई मेट्रो जैसी तकनीक से औसत रफ्तार 105 किलोमीटर तक पहुंचाई जाएगी. यानी नई दिल्ली से हावड़ा पहुंचने में साढ़े-तीन घंटे कम लगेंगे. इतनी ही नहीं, पैसेंजर भी 25% ज्यादा ले जाए जा सकेंगे औऱ ईंधन भी 30% कम लगेगा. मेट्रो जैसा एक डिब्बा आता है 8 से 9 करोड़ रुपये का. 21 डिब्बों की ट्रेन के लिए चाहिए होंगे 150 से 175 करोड़ रुपये. अभी 17 डिब्बों, 2 पावर कार औऱ 2 पैंटरी कार वाली एक राजधानी की कीमत आती है कोई 75 करोड़ रुपये. यानी हर ट्रेन पर करीब 100 करोड़ का एक्स्ट्रा खर्च आएगा जो पांच साल में दाम वसूल किया जाएगा.

 

एयरपोर्ट की तरह प्राइवेट स्टेशन!

मोदी सरकार के पहले रेल बजट में अगली बड़ी घोषणा होगी निजी कंपनियों के साथ मिलकर बनाए जाने वाले एयरपोर्ट जैसे रेलवे स्टेशन. जैसे प्राइवेट कंपनियों ने दिल्ली-मुंबई जैसे एकदम चकाचक अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाए, वैसे रेलवे स्टेशन क्यों नहीं हो सकते? निजी कंपनियां बनाएं और चलाएं औऱ रेलवे इस्तेमाल करे. इसका संकेत खुद प्रधानमंत्री ने दे दिया था कुछ दिन पहले कटरा स्टेशन का उद्धाटन करते वक्त.

 

दूध-सब्जियों के लिए एग्री-नेटवर्क!

 

मोदी सरकार के पहले रेल बजट में बड़ी घोषणा होगी एग्री रेल नेटवर्क की. बीजेपी के मैनिफेस्टो और राष्ट्रपति  के अभिभाषण में इसका जिक्र हो ही चुका है. इसका सीधा मतलब है कि दूध, फल और सब्जियों को जल्दी पहुंचाने की योजना. दूध,फल, सब्जियों का एक खास रेल नेटवर्क

 

साथ ही इनको ढोने के खास डिब्बे बनाए जाएंगे. अभी दूध के डिब्बे का वजन होता है 37 टन में 40,000 लीटर दूध आता है. नया डिब्बे हल्का होग, 30 टन का और उसमें दूध भी ज़्यादा आएगा. 44,600 लीटर. दूध ही नहीं, नमक को ढोने का हल्के वजन का डिब्बा बनाया जाएगा.

 

शताब्दी में ऑटोमैटिक दरवाज़े!

रेल बजट में शताब्दी ट्रेनों में मेट्रो जैसे ऑटोमैटिक बंद होने वाले दरवाजे लगाने के पायलट प्रॉजेक्ट की घोषणा हो सकती है. शताब्दी के अलावा करीब के छोटे शहरों को महानगरों से जोड़ने वाली EMU लोकल ट्रेनों में भी मेट्रो जैसे ऑटोमैटिक दरवाजे लगाने की पायलट योजना की  घोषणा होगी. ताकी कोई लटक के सफर ने कर सके.

 

डिस्पोजेबल चादर, तकिये-कंबल के गिलाफ!

 

रेल बजट में बडी घोषणा होगी डिस्पोजेबल लिनन यानी चादर, और तकिये-कंबल का गिलाफ ऐसा पॉलिएस्टर का मिलेगा जो एक बार  इस्तेमाल किया औऱ फिर फेंक दिया. धोने का चक्कर ही नहीं. हवाई जहाज में तकिये का गिलाफ इसी करह के कपड़े का होता है. ऐसा ही अब रेल में मिलेगा. औऱ शुरुआत होगी बैंगलोर राजधानी से. इसकी वैसे भी बहुत शिकायतें आ रही थीं कि चादर वगैरह साफ धुली हुई नहीं मिलती. बल्कि त्रिवेंद्रम राजधानी जैसी लंबे रूट की गाड़ियों में तो ऐसा होता है कि पहली रात चादर एक यात्री ने इस्तेमाल की फिर अगले दिन दूसरा यात्री चढ़ा तो वही चादर उसको दे दी. इन सब झंझटों से छुटकारा मिल जाएगा नए पॉलिएस्टर के चादर औऱ गिलाफ से. इस्तेमाल करो और फेंको.

 

हाउसकीपींग अटेंडेंट, मशीनों से सफाई!

साफ-सफाई पर बजट में खास ज़ोर होगा. साफ-सफाई के लिए हर बोगी में एक हाउसकीपिंग अटेंडेंट रखने की योजना की घोषणा हो सकती है रेल बजट में. टॉयलेट और पूरी की साफ-सफाई की जिम्मेदारी इसी अटेंडेंट की होगी. और जब ट्रेन आख़िरी स्टेशन पर पहुंचेगी तो मशीनों से डिब्बे की सफाई होगी. बाहर से औऱ अंदर से. स्टेशनों पर पटरियों की सफाई भी मशीनों से होगी. मैला ढोने को बढ़ावा देने के लिए रेलवे की काफी आलोचना होती रही है. इसी दिशा में रेलवे ने शताब्दी ट्रेनों में बायो-टॉयलेट शुरू किये थे. रेल बजट में कई और ट्रेनों में बायो-टॉलेट लगाने की घोषणा होगी ताकि पटरियों पर मैला न गिरे. एक और बड़ी समस्या स्टेशनों पर चूहों की है. इससे निपटने के लिए एक योजना की घोषणा होगी. ट्रेनों औऱ स्टेशनों का समय-समय पर पेस्ट कंट्रोल ट्रीटमेंट किया जाएगा.

 

गोमतीनगर लखनऊ का दूसरा मुख्य स्टेशन!

 

रेल बजट में बीजेपी अध्यक्ष गृह मंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र लखनऊ के लिए बड़ी घोषणा होगी. चारबाग रेलवे स्टेशन पर भार कम करने के लिए गोमती नगर स्टेशन को लखनऊ का दूसरा मुख्य स्टेशन बनाया जाएगा. रेल बजट से ठीक पहले ऐसी मांग करके राजनाथ सिंह ने संकेत भी दे दिए कि ऐसा होने जा रहा  है. दिल्ली, मुंबई, कटरा की तरफ जाने वाली ट्रेनें गोमती नगर स्टेशन से चलेंगी. इस योजना की नींव असल में 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी थी. फिर यूपीए सरकार  ने उस पर पानी फेर दिया. अब उसे फिर नया जीवन मिलेगा. कानपुर से आने वाली ईएमयू ट्रेनों के भी गोमती नगर स्टेशन पहुंचने की घोषणा होगी. साथ ही रेल बजट में लखनऊ के रकाबगंज सेक्शन पर लाइन डबल करने का काम भी शुरू करने की भी घोषणा की जाएगी रेल बजट में.

 

हालांकि इस रेल बजट में बहुत ज्यादा नई रेल लाइनों और ट्रेनों की घोषणा तो नहीं होगी लेकिन इस बार वाराणसी को कुछ तोहफे ज़रूर मिलेंगे. पीएम के संसदीय क्षेत्र को जाने वाली रेल लाइनों को डबल लाइन बनाने की घोषणा की जाएगी. औऱ वाराणसी को आसपास के शहरों  तक नई इंटरसिटी ट्रेनें चलाई जाएंगी.

 

स्टेशनों पर  सोलर पैनल!

 

सौर ऊर्जा से जुड़ी घोषणाओं से भी रेल बजट पर नरेंद्र मोदी की मुहर लगेगी. गुजरात में सोलर प्लांट लगाकर मोदी ने खूब सुर्खियां बटोरीं थीं. अब रेलवे में भी सोलर पावर पर जोर रहेगा. कटरा स्टेशन से शुरुआत हो ही गई है.

 

रेलवे प्लेटफॉर्म के ऊपर शेड पर सौर ऊर्जा के पैनल लगाए जाएंगे. जिससे स्टेशन के बिजली वहीं से मिले. इतना ही नहीं रेलवे की कालोनियों और खाली जमीन पर भी सोलर  पैनल लगाने की योजना का घोषणा होगी. अभी ईंधन पर रेलवे एक साल में 28,000 करोड़ रुपये खर्च करती है. जिसमें से 10,000 करोड़ रुपये बिजली पर खर्च होते हैं. कुल करीब 65000 किलोमीटर के रूट में से करीब 25 हजार किलोमीटर पर बिजली की लाइन है. लेकिन सवाल ये हैं कि सोलर पैनल लगाने के लिए पैसा कहां से आएगा?

 

LNG से चलने वाले इंजन!

रेल बजट में बड़ी घोषणा हो सकती है LNG यानी Liquified Natural Gas यानी तरल प्राकृतिक गैस से चलने वाले इंजन. अभी रेलवे में या तो डीजल के इंजन हैं या बिजली के. रेलवे का 28 से 30 हजार करोड़ का खर्च ईंधन पर आता है. जिसमें से लगभग 20 हजार करोड़ का खर्च डीजल पर आता है और 8-10 हजार करोड़ का बिजली पर. गैस के इंजन से इस खर्च में कुछ कमी आएगी. इसके अलावा टीजल में भी एथनॉल मिलाने की योजना की घोषणा होगी जिससे वो खर्च भी कम हो. गैस के इंजन से प्रदूषण भी कम होगा.

 

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