जानें- ट्रेन में जो कंबल ओढ़ते हैं, कंबल नहीं बीमारियां ओढ़ते हैं

By: | Last Updated: Friday, 26 February 2016 10:39 PM
Railway blankets washed once in two months

नई दिल्ली: क्या आप ट्रेन से सफर करते हैं? तो आपने कभी सोचा कि ट्रेन में मिलने वाले जिस कंबल को ओढ़ कर सोते हैं उसमें से बदबू क्यों आती है? इससे राज़ रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने आज राज्यसभा में खोला.

मनोज सिन्हा ने बताया कि ट्रेन में मिलने वाला कंबल दो महीने में एक बार ही धुलता है. जरा सोचिए कितना खतरनाक है ये और हम आपको कितनी बीमारियां दे सकता है दो महीने तक बिना धुला हुआ कंबल.

कल ही रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भारतीय रेल के सुनहरे सपने दिखाए थे, लेकिन सिर्फ 24 घंटों में रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने भारतीय रेल की हकीकत सबके सामने रख दी. एक बार फिर जानिए उस कंबल का सच जो आपको एसी कोच में सफर के दौरान रेलवे की तरफ से मिलता है. जी हां! दो महीने में एक बार धुलता है.

ट्रेन में मिलने वाला कंबल 2 महीने में एक बार धुलता है. 2 महीने यानी 60 दिनों तक उस कंबल को न जाने कितने यात्री ओढ़ते हैं. उनमें से कुछ ऐसे भी होंगे जिन्हें किसी तरह की बीमारियां हो सकती हैं. इसका मतलब ये है कि आप ट्रेन में कंबल नहीं बल्कि बीमारियों को ओढ़ कर सोते हैं.

यहां आपको ये बताना जरूरी है कि एसी कोच में यात्रा के लिए आप जो किराया देते हैं उसमें ट्रेन में मिलने वाले बिस्तर की कीमत भी शामिल होती है. लेकिन उस पैसे के बदले आपको सुविधा की जगह मिलता है बीमारियों का खतरा. भारतीय रेल की इस हालत पर राज्यसभा सभापति और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी भी टिप्पणी किए बगैर नहीं रह पाए.

हामिद अंसारी ने कहा कि इससे अच्छा तो अपना बिस्तरा ले जाना ही था.

हैरानी की बात है कि एक तरफ भारतीय रेल को आधुनिक बनाने और रेल के सफर को हवाई सफर जैसा बनाने के दावे हो रहे हैं. वहीं हकीकत ये है कि यात्रियों को दिए जाने वाले कंबल की सफाई भी ठीक से नहीं हो पा रही है.

हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल 41 लांड्रियों में बिस्तरों की सफाई का काम होता है और जल्द ही 25 और लांड्रियों में ये काम शुरू होगा. वहीं इस बजट में सरकार ने ऐसे बेडरोल की भी व्यवस्था शुरू की है जिसे यात्री खरीद कर इस्तेमाल करें और अपने साथ ले जाएं. लेकिन सवाल ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल जिस बजट पर रेल मंत्री को शाबाशी दी थी वो भारतीय रेल में मिलने वाले कंबलों के इस चौंकाने वाले सच पर उनसे सवाल करेंगे.

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Web Title: Railway blankets washed once in two months
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